दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी के खिलाफ रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) के बैंक अकाउंट में धोखाधड़ी घोषित करने से जुड़ी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की नोटिस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

जस्टिस जसमीत सिंह ने याचिकाकर्ता और आरएचएफएल के निदेशल जय अनमोल अंबानी को 10 दिनों के अंदर बैंक के सामने अपना पक्ष रखने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बैंक द्वारा लिए गए किसी भी फैसले का प्रभाव इस मामले में कोर्ट के आदेश के अधीन रहेगा। न्यायाधीश ने बैंक को एक स्पष्ट आदेश जारी करने और कोर्ट के सामने पेश करने को कहा।

नोटिस के खिलाफ रोक नहीं- कोर्ट

हाई कोर्ट ने जय अनमोल अंबानी से कहा, “हम कारण बताओ नोटिस के खिलाफ रोक नहीं लगाएंगे। आप इस नोटिस में अपनी बात रखें। हम कहेंगे कि आपको जो भी कहना है, वे उसका जवाब देंगे। हम नोटिस पर रोक नहीं लगाऊंगा। हम आपकी याचिका लंबित रखेंगे, देखते हैं क्या आदेश आता है।”

‘दोनों पक्षों के बीच जवाब के लिए सहमति’

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, “दोनों पक्षों के बीच यह सहमति हुई है कि याचिकाकर्ता आज से 10 दिनों के अंदर नोटिस का जवाब देंगे, 30 जनवरी को याचिकाकर्ता व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होगा और प्रतिवादी याचिकाकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि की सुनवाई के बाद एक आदेश पारित करेगा, जिसे अगली सुनवाई की तारीख पर कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। आदेश का प्रभाव याचिका में पारित आदेश के अधीन होगा।”

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए तारीख 27 फरवरी तक आगे बढ़ा दी यानी अब अगली सुनवाई इसी दिन होगी।

अंबानी के वकील ने दिया तर्क

जय अनमोल अंबानी के वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि 22 दिसंबर 2025 को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस स्वाभाविक रूप से त्रुटिपूर्ण था। आगे कहा कि चूंकि आरएचएफएल के लिए समाधान योजना को कर्ज देने वाले सभी बैंकों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में पहले ही मान लिया है, ऐसे में कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप नहीं हो सकते। आगे कहा गया कि किसी भी अन्य स्थिति में बैंक के पास 2020 से ही संबंधित जानकारी मौजूद थी और पांच साल बाद कारण बताओ जारी करना कानून के विपरीत था।

बैंक के वकील ने किया विरोध

बैंक के वकील ने याचिका का विरोध किया और कोर्ट के सामने तर्क दिया कि कारण बताओ नोटिस जारी करने के चरण में न्यायालय का अधिकर क्षेत्र सीमित था। कोर्ट ने बैंक के वकील से फिर सवाल किया कि दिवालियापन कानून के तहत समाधान योजना की मंजूरी के बाद कारण बताओ नोटिस कैसे जारी किया गया और कहा कि याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर विचार किया जाना चाहिए।

पिछले साल 19 दिसंबर को हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस आधार पर राहत दी कि उसे कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया था क्योंकि इसे उस पते पर भेजा गया था जिसे कंपनी ने 2020 में खाली कर दिया था।

हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश बैंक को जय अनमोल अंबानी को नया कारण बताओ नोटिस जारी करने और मामले में आगे बढ़ने से नहीं रोकेगा।

क्या है मामला?

बता दें कि सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्ववर्ती आंध्र बैंक) के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले में जय अनमोल अंबानी और आरएचएफएल के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को लगभग 228 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। एजेंसी ने आरएचएफएल, जय अनमोल अंबानी और कंपनी के निदेशक रविंद्र शरद सुधाकर के खिलाफ बैंक की शिकायत पर कार्रवाई की।

शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने व्यावसायिक जरूरतों के लिए मुंबई स्थित बैंक की एससीएफ शाखा से 450 करोड़ रुपये की ऋण सीमा ली थी। अधिकारियों के अनुसार कंपनी किश्तें चुका नहीं सकी, जिसके फलस्वरूप 30 सितंबर 2019 को उस अकाउंट को एनपीए घोषित कर दिया गया।

(इनपुट- PTI)

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