Anil Ambani

अनिल अंबानी को कर्जदारों ने नहीं छोड़ने दी कंपनी, इस्तीफा खारिज; RCom की संपत्ति खरीदने को आज एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज लगा सकती हैं बोली

कंपनी ने कहा, ‘आरकॉम के संबंधित डायरेक्टरों को बताया जा रहा है कि उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं किए गए हैं और उन्हें आरकॉम के डायरेक्टर के नाते दायित्वों और जिम्मेदारियों को निभाना जारी रखने का सुझाव दिया जाता है।

अनिल अंबानी की केवल चार कंपनियों पर 93,900 करोड़ का कर्ज, अब चीनी बैंकों ने लंदन के कोर्ट में घसीटा

चीन के तीन बैकों ने लंदन की एक अदालत में 680 मिलियन डॉलर के भुगतान नहीं करने पर मुकदमा ठोक दिया है।

अनिल अंबानी की नई मुसीबत, रिलायंस हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी नहीं बेच पाएगी नई पॉलिसी, IRDA ने लगाई रोक!

इंश्योरेंस रेगुलेटर संस्था ने RHICL को अपने सभी पॉलिसीधारकों की जिम्मेदारियों (Liabilities) को ग्रुप की अन्य कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (RGICL) को ट्रांसफर करने के निर्देश भी दिए हैं।

ANIL AMBANI मुश्किल में, शेयरधारकों ने दी मुकदमा दर्ज करवाने की चेतावनी

Reliance Communications: इस शेयरधारक ने खुद को शहर का कॉर्पोरेट वकील बताया और उसका कहना था कि वह रिलायंस समूह की सात कंपनियों में से तीन में अपने शेयरों की 90 प्रतिशत से अधिक राशि गंवा चुका है जो कि लगभग 3 करोड़ रुपये होगी।

ANIL AMBANI को तगड़ा झटका, 20 साल के न्यूनतम स्तर पर Reliance कैपिटल के शेयर, यह ऐलान बना वजह

अनिल अंबानी ने रिलायंस पावर के शेयरहोल्डर्स के साथ बातचीत में बताया कि ग्रुप अब सोलर, वायु ऊर्जा, बायोगैस, कचरे से ऊर्जा के निर्माण और रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में विकास करेगा।

कंपनी के शेयर गिरवी रख कारोबारी सुभाष चंद्रा ने ले रखा है कर्ज! अनिल अंबानी भी गहरे आर्थिक संकट में

सुभाष चंद्रा के साथ-साथ अनिल अंबानी और इमामी ग्रुप के फाउंडर भी इसी तरह के संकट में घिरे हैं और उन्होंने भी कंपनी के शेयर गिरवी रखकर लोन लिया है, लेकिन अब इन बिजनेस टायकून के लिए कर्ज की अदायगी चुनौती बन गई है।

Reliance Capital की डिफॉल्ट रेटिंग, अनिल अंबानी की कंपनी की चेतावनी- लाखों निवेशकों पर पड़ेगा असर

एजेंसी ने रिलायंस कैपिटल की तरफ से गैर परिवर्तनीय ऋण पत्रों (Non-Convertible Debentures) पर ब्याज के भुगतान में एक दिन की देरी के बाद रेटिंग घटाई है। जबकि कंपनी का कहना है कि यह देरी बैंक सर्वर में आई तकनीकी खराबी के कारण हुई थी।

कर्ज का बढ़ता बोझ, वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस बेचेगी अनिल अंबानी की कंपनी! 3500 करोड़ की प्रॉपर्टी करती है मैनेज

अनिल अंबानी ने नॉन-कोर ऐसेट्स बिजनेस बेचने का फैसला किया है जिसके बाद इसी प्लानिंग के तहत आगे बढ़ रही है।

Anil Ambani की मुश्किलें बढ़ीं, एक और कंपनी ने दी दिवालिया होने की अर्जी

कंपनी ने कहा , ” जीसीएक्स ने आज पुनर्गठन की घोषणा की है जो कि बॉंड कर्ज को 15 करोड़ डॉलर घटाकर दीर्घकालिक वृद्धि और विकास का समर्थन करेगी। यह प्रक्रिया एक स्थायी पूंजी संचरना की व्यवस्था करेगी।

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आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, आर्थिक मंदी के दौर में ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों की हालत और ज्यादा खराब हो जाती है और उन्हें सर्वाइव करना मुश्किल हो जाता है।

अनिल अंबानी की अब RELIANCE NAVAL मुश्किल में, भीषण नकदी संकट से घिरी

रिलायंस नेवल के कर्जदाताओं ने कंपनी के कर्ज भुगतान प्लान को खारिज कर दिया है, जिसके बाद कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

RCom की संपत्ति बेचकर भी 49,000 करोड़ में से 20 फीसदी ही कर्ज चुका पाएंगे अनिल अंबानी, बिक्री में देर हुई तो और कम मिलेगी रकम

इस मामले के जानकार लोगों का कहना है कि यदि दिवाला प्रक्रिया अगले कुछ महीनों में पूरी हो जाती है तो रिलायंस कम्यूनिकेशन और इसकी दो यूनिट जिसमें स्पेक्ट्रम और टॉवर्स शामिल हैं, की बिक्री से 9000 से 10 हजार करोड़ की राशि मिल सकती है।

खत्म नहीं हो रहीं अनिल अंबानी की मुश्किलें, अब एक और कंपनी होगी दिवालिया

रिलयांस मरीन रिलायंस नवल की सहायक कंपनी है। कंपनी पर करीब 1000 करोड़ का कर्ज है।

मुश्किल में अनिल अंबानी, रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के ऑडिटर्स ने छोड़ी कंपनी

बीते 3 माह के दौरान रिलायंस ग्रुप की कंपनियों के 4 ऑडिटर अपने पद छोड़ चुके हैं। इसी साल जून में रिलायंस कैपिटल और रिलायंस होम फाइनेंस के ऑडिटर PWC ने भी अपना पद छोड़ दिया था।

9 हजार करोड़ रुपये का बकाया, दिवालिया होने की कगार पर अनिल अंबानी की एक और कंपनी

रिलायंस ग्रुप ने साल 2016 जनवरी में इस का मैनेजमेंट अपने हाथ में लिया था। अधिग्रहण के बाद रिलायंस ग्रुप ने इसे वित्तीय मदद उपलब्ध कराई थी।

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इस अधिग्रहण से रिलायंस जियो की सेवाओं को जबरदस्त विस्तार मिलेगा और भारत के दूरसंचार क्षेत्र में कंपनी की पकड़ और मजबूत होगी।

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अनिल अंबानी कर्ज के बोझ को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर कोशिशें कर रहे हैं। 11 जून को उन्होंने कहा था कि उनके रिलायंस ग्रुप ने बीते 14 महीने में संपत्तियां बेचकर 35 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

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डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशंस का कहना है कि स्पेक्ट्रम पर अधिकार सरकार का है और इन्हें किसी ऑपरेटर को सिर्फ 20 साल के लिए लीज पर ही दिया जा सकता है।

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