BJP President Nitin Nabin: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भावी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के सामने देश में इस वर्ष होने वाले चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव सबसे बड़ी चुनौती बनने वाले हैं। संभावना है कि निर्वाचन आयोग अप्रैल में इन सभी प्रदेशों-असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी-के विधानसभा चुनाव करा सकता है।

मई में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु व केरल की विधानसभाओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जबकि पुदुचेरी की जून में। नबीन के नेतृत्व में भाजपा इन चुनावों को दक्षिण और पूर्वी भारत में अपनी पैठ मजबूत करने का सुनहरा अवसर मान रही है। पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए सबसे कठिन रणभूमि है।

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बंगाल में सबसे कठिन चुनौती

2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 77 से अधिक सीटें हासिल कीं, जो 2016 के मात्र चार सीटों से उल्लेखनीय उछाल था। फिर भी, 294 सदस्यीय सदन में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और सहयोगियों ने 216 सीटें जीतकर ममता बनर्जी को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाया। 2011 से सत्ता पर काबिज ममता के खिलाफ भाजपा अब पूर्ण बहुमत की कोशिश करेगी।

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तमिलनाडु-केरल में विस्तार की कोशिश

दक्षिण में तमिलनाडु और केरल भी भाजपा के लिए दुर्गम रहे हैं। तमिलनाडु में द्रविड़ पार्टियों का वर्चस्व और केरल में वाम-कांग्रेस की बारी-बारी की सरकारें भाजपा की प्रगति में बाधक बनीं। कर्नाटक में हालिया हार के बाद दक्षिण में आंध्र प्रदेश और पुदुचेरी ही आशा की किरण हैं।

केरल में भाजपा का एक लोकसभा सांसद और तिरुवनंतपुरम में पहला महापौर चुने जाना सकारात्मक संकेत है। पुदुचेरी में मौजूदा एनडीए सरकार को बचाना नबीन की प्राथमिकता होगी। यह देखना होगा कि नए अध्यक्ष के कार्यकाल में केरल में पार्टी की यह बढ़त कायम रह पाती है या नहीं। बीजेपी में अब तक कितने अध्यक्ष बने हैं, ये जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

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