India-US Trade Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब पिछले साल जनवरी में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया था, तो दुनियाभर के देशों के साथ ट्रेड डील की बात कही थी। फरवरी 2025 में जब राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई थी, तो भी ट्रेड डील को लेकर सार्थक वार्ता हुई थी। इसके बाद से पूरा साल बीत चुका है लेकिन ट्रेड डील नहीं हुआ है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति है। इस ट्रेड डील में गतिरोध की बड़ी वजह यह भी रही कि भारत, यूक्रेन से युद्ध लड़ रहे मित्र राष्ट्र रूस से सस्ते में कच्चा तेल खरीद रहा है, और इस ऑइल डील को लेकर ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ के अलावा अतिरिक्त 25 यानी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है।
अब जब अमेरिका के भारत में नियुक्त नए राजदूत सर्जियो गोर ने भारत यूएस के बीच नए सिरे से ट्रेड डील पर बातचीत होने की बात कही तो ऐसे में ट्रंप ने ईरान को लेकर नया बयान दे दिया, और ये ट्रंप ने जो कहा वो भारत के लिए नई परेशानी बन सकता है। दरअसल, ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के चलते अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने कहा है कि अगर कोई भी देश ईरान के साथ व्यापरिक संबंध रखेगा तो अमेरिका उस पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगा देगा।
भारत के लिए खड़ी हो सकती है नई परेशानी
गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहे ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद आक्रामक है। ईरान पर ट्रंप की ये आक्रामकता और 25 प्रतिशत टैरिफ की बात भारत को परेशान कर सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का असर भारत पर भी पड़ सकता है क्योंकि भारत के रणनीतिक और व्यापारिक हित ईरान के साथ काफी गहरे हैं।
कैसे हैं भारत-ईरान के रिश्ते?
ईरान और भारत के रिश्तों की बात करें तो विदेश और व्यापार नीति के लिहाज से ईरान भारत के लिए अहम है। भारत ने मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए जिन परियोजनाओं में निवेश किया है, उनमें ईरान एक प्रमुख ट्रांजिट है। खासतौर पर ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक भारत की सीधी व्यापारिक रणनीतिक पकड़ को मजबूत करता है।
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रणनीतिक तौर पर लग सकता है झटका
ईरान का ये चाबहार बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC का भी अहम हिस्सा है। इस रास्ते से भारत को निर्यात-आयात में करीब 40 प्रतिशत समय और लगभग 30 प्रतिशत लागत की बचत होती है। अगर ईरान में अस्थिरता बढ़ती है और अमेरिका के साथ टकराव ज्यादा होता है, तो भारत की भू-आर्थिक रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है।
ईरान के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों की बात करें तो साल 2024-25 में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.68 अरब डॉलर का रहा था। भारत को 0.80 अरब डॉलर का व्यापारिक लाभ हुआ था। अगर ट्रंप टैरिफ प्रभावी होता है, तो भारत के सामने वही समस्य़ा खड़ी होगी जो कि रूस के साथ रिश्तों को लेकर थी।
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दोराहे पर खड़ा हो सकता है भारत
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत पर लगातार ये दबाव बनाया जाता रहा कि वह रूस से अपने व्यापार को खत्म करें और कच्चे तेल की खरीद पर रोक लगाए। भारत पर ये आरोप भी लगाए गए थे कि भारत यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को कच्चे तेल की खरीद के लिए फंड कर रहा है। वहीं जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बात नहीं बनी, तो अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया, और 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ केवल इसलिए लगाया, क्योंकि प्रतिबंध के बावजूद भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है।
ट्रेड डील पर और बढ़ सकता है टकराव?
इतना ही नहीं, भारत और अमेरिका के बीच जो ट्रेड डील अटकी हुई है, उसकी अहम वजह भी अमेरिका ने भारत के रूस के साथ जारी व्यापारिक रिश्तों को बताया था। ऐसे में अगर रूस वाला यही सिनेरियो अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान के साथ भी बनता है, तो भारत को फिर दोराहे पर खड़ा नजर आएगा। वहीं अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भारत पर जो दबाव बढ़ा रहा है, ईरान के नए सिनोरियो की वजह से यह ट्रेड डील का दबाव दोगुना भी हो सकता है। ऐसे में देखना यह होगा कि इस वैश्विक चुनौती का सामना करने के लिए भारत का अगला कदम क्या होता है।
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