जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे शरीर की गति में कमी आना आम बात है। जोड़ों में जकड़न, मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन की समस्या रोजमर्रा के कामों को भी मुश्किल बना देती है। ऐसे में योग एक ऐसा प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय है, जो बिना शरीर पर ज्यादा दबाव डाले आपको सक्रिय रख सकता है। योग के सरल आसन न केवल शरीर की लचीलापन बढ़ाते हैं, बल्कि मन को भी शांत रखते हैं। ऐसे में आज हम आपको ऐसे 8 योग आसनों के बारे में बता रहे हैं, जो खासतौर पर उम्रदराज लोगों के लिए बेहद फायदेमंद हैं।
उम्र बढ़ने पर योग है सबसे बेहतर विकल्प
योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें धीमी और नियंत्रित गति के साथ सांसों का तालमेल होता है। यही वजह है कि यह बुजुर्गों और मध्यम आयु के लोगों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है। नियमित योग अभ्यास से रक्त संचार बेहतर होता है, जोड़ों का दर्द कम हो सकता है और शरीर में लचीलापन आता है। योग रीढ़, घुटनों और कूल्हों को सहारा देने वाली मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके साथ ही योग मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है।
ताड़ासन
ताड़ासन देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन यह शरीर की सही मुद्रा और संतुलन के लिए बहुत जरूरी है। इसमें दोनों पैरों को कंधों की चौड़ाई पर रखकर सीधे खड़ा हुआ जाता है। कंधों को ढीला छोड़ते हुए सिर को ऊपर की ओर खींचने का भाव रखें। यह आसन पैरों और कोर मसल्स को मजबूत करता है और झुककर चलने की आदत को कम करता है। रोजाना इसका अभ्यास करने से खड़े होने और चलने में आत्मविश्वास बढ़ता है।
कुर्सी की सहायता से उत्कटासन
इस आसन में कुर्सी या दीवार का सहारा लिया जाता है, जिससे गिरने का डर नहीं रहता। कुर्सी के सामने खड़े होकर धीरे-धीरे बैठने जैसी स्थिति बनाएं और फिर वापस खड़े हो जाएं। ध्यान रखें कि पीठ सीधी रहे और वजन एड़ियों पर हो। यह आसन जांघों, कूल्हों और नितंबों को मजबूत करता है, जो उठने-बैठने और चलने के लिए बहुत जरूरी है।
मार्जारी- बिटिलासन (कैट एंड काउ पोज)
यह आसन हाथों और घुटनों के बल किया जाता है। सांस लेते हुए पेट को नीचे की ओर छोड़ें और छाती को ऊपर उठाएं, फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और गर्दन व कमर की जकड़न को दूर करता है। साथ ही यह सांस और शरीर के तालमेल को भी बेहतर बनाता है।
बैठकर आगे झुकने का आसन
इस आसन में आराम से बैठकर पैरों को आगे फैलाया जाता है और कूल्हों से धीरे-धीरे आगे की ओर झुका जाता है। हाथों को घुटनों या टखनों पर रखा जा सकता है। यह आसन रीढ़ और जांघों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और मन को शांत करता है। तनाव कम करने के लिए यह आसन बहुत उपयोगी है।
सहारे के साथ वृक्षासन
वृक्षासन संतुलन बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद है। दीवार या कुर्सी के पास खड़े होकर एक पैर पर वजन डालें और दूसरे पैर को टखने या पिंडली पर रखें। हाथों को छाती के पास जोड़ लें। यह आसन पैरों, टखनों और कोर मसल्स को मजबूत करता है और गिरने के खतरे को कम करता है।
सेतु बंधासन (ब्रिज पोज)
पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं। यह आसन कमर और पैरों को मजबूत करता है। साथ ही छाती खुलने से सांस लेने में भी सुधार होता है। जरूरत हो तो कूल्हों के नीचे तकिया रखा जा सकता है।
बैठकर मोड़ का आसन
सीधे बैठकर धीरे-धीरे शरीर को एक ओर मोड़ें और हाथ को कुर्सी या जांघ पर रखें। यह आसन रीढ़ की गतिशीलता बढ़ाता है और जकड़न को कम करता है। पाचन तंत्र के लिए भी यह लाभकारी माना जाता है।
शवासन
शवासन में शरीर पूरी तरह विश्राम करता है। पीठ के बल लेटकर आंखें बंद करें और सांस पर ध्यान दें। यह आसन पूरे योग अभ्यास के फायदे को शरीर में समाहित करता है और मानसिक शांति देता है।
कितनी बार करें योग
इन आसनों को हफ्ते में 3 से 5 बार करना पर्याप्त है। रोज 15 से 20 मिनट का अभ्यास भी शरीर में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। हमेशा धीरे-धीरे करें और शरीर की सीमा का ध्यान रखें।
निष्कर्ष
सही और सरल योग आसनों के जरिए शरीर को मजबूत, लचीला और संतुलित रखा जा सकता है। नियमित योग अभ्यास से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी बेहतर महसूस किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
