आज यानी 7 अप्रैल के दिन को दुनिया भर में वर्ल्ड हेल्थ डे यानी विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health Day) मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना और लोगों को हेल्दी जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। वहीं, इस साल ये खास दिन ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा अधिकार’ थीम पर मनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि हमारे देश में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं में मुद्दों का एक व्यापक स्पेक्ट्रम शामिल है। इसी कड़ी में वर्ल्ड हेल्थ डे के मौके पर यहां हम ऐसी 3 प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बात करने वाले हैं, जो देश के लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर उभरकर सामने आई हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
मामले को लेकर इंडियन एक्सप्रेस संग हुई एक खास बातचीत के दौरान दिल्ली के सीके बिड़ला अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के निदेशक डॉ. राजीव गुप्ता ने कहा, ‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बीते सालों के मुकाबले आज के समय में लोगों के औसत जीवनकाल में वृद्धि हुई है, पोलियो और टेटनस के मामलों में गिरावट आई है, ट्यूबरक्लोसिस और मलेरिया जैसी घातक बीमारियों के मामले कम सामने आते हैं। हालांकि, इन तमाम बातों से अलग कुछ समस्याएं आज भी स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनी हुई हैं। जैसे-
नॉन कम्युनिकेबल डिजीज यानी गैर-संचारी रोग (NCDs)
नॉन कम्युनिकेबल डिजीज जैसे हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियां आदि के चलते भारत में मृत्यु के मामले तेजी से बढ़े हैं। इन बीमारियों के पीछे खराब खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइस को अहम कारण माना जाता है। शारीरिक गतिविधि की कमी, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का अत्यधिक सेवन लोगों की आदत में शुमार हो चुका है। वहीं, इस तरह की आदतें एनसीडी के खतरे को तेजी से बढ़ाने में योगदान करती हैं।
कुपोषण
कुपोषण भी भारत में एक व्यापक समस्या है, जिससे देश भर में लाखों बच्चे और वयस्क प्रभावित हैं। अल्पपोषण (Undernutrition) और अतिपोषण (Overnutrition) दोनों ही कुपोषण के बोझ में योगदान करते हैं, जिसका फिर व्यक्ति के स्वास्थ्य और विकास पर सीधा प्रभाव पड़ने लगता है।
कम्युनिकेबल डिजीज यानी संचारी रोग
डॉ. के मुताबिक, भारत में कम्युनिकेबल डिजीज के मामलों में कमी देखने को मिली है। हालांकि, टीबी, मलेरिया और डेंगू जैसी कुछ बीमारियों को लेकर अभी भी कुछ हद तक जागरूकता और सतर्कता की आवश्यकता है।
कैसे करें स्वास्थ्य की देखभाल?
इसे लेकर जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बबीना एनएम बताती हैं, भारतीय निवारक उपायों को प्राथमिकता देकर और हानिकारक आदतों से बचकर लंबे समय तक अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख सकते हैं। जैसे-
संतुलित आहार लें
अनहेल्दी फैट, प्रोसेस्ड फूड और खाने में नमक की मात्रा को सीमित कर, इनकी जगह फलों, सब्जियों और साबुत अनाज को आहार का हिस्सा बनाएं।
खुद को एक्टिव रखें
इसके लिए आप नियमित एक्सरसाइज का सहारा ले सकते हैं। शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद कर एनसीडी के जोखिम को कम करती है।
तनाव से दूरी बनाएं
किसी भी बात का अधिक तनाव लेने से बचें। ज्यादा स्ट्रेस बीमारियों के खतरे को अधिक बढ़ा देती है।
समय-समय पर कराएं जांच
सेहत से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या को समय रहते पहचानकर सही इलाज के साथ अधिक गंभीर होने से रोका जा सकता है। ऐसे में समय-समय पर अपना स्वास्थ्य चेकअप कराते रहें।
प्रदूषण का जोखिम कम करें
हवा की गुणवत्ता खराब होने पर बाहर समय कम से कम बिताएं। इस तरह भी आप श्वसन संबंधी बीमारियों के खतरे को कम कर अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं।
समग्र स्वास्थ्य के साथ संतुलन
इन सब से अलग डॉ. बबीना आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रथाओं को भी रूटीन में शामिल करने की सलाह देती हैं। ये कुछ बातें व्यक्ति को समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करती हैं।
Disclaimer: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।
