सूरजमुखी के बीज सर्दियों में बेहतरीन सुपर फूड माने जाते हैं। ये शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ गर्माहट भी देते हैं, जिससे ठंड के मौसम में शरीर मजबूत और सक्रिय रहता है। इनमें मौजूद हेल्दी फैट्स, प्रोटीन, विटामिन E और मैग्नीशियम शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने, स्किन को पोषण देने और हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करते हैं। इनमें मौजूद हेल्दी फैट्स और मिनरल्स शरीर में हीट प्रोडक्शन बढ़ाते हैं, जिससे ठंड के मौसम में तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है। सनफ्लावर सीड्स में मौजूद प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और B विटामिन शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं और थकान दूर करते हैं। सनफ्लावर सीड्स हेल्दी फैट्स, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं जिसका सेवन लोग कच्चा और भून कर दोनों तरह से करते हैं।
रजिस्टर्ड डायटीशियन और हेल्थ राइटर मॉर्गन पियर्सन ने वेरी वेल हेल्थ में छपे एक लेख में बताया है कि सनफ्लावर सीड्स से बॉडी को पर्याप्त पोषण मिलता है। सनफ्लावर सीड्स में मौजूद न्यूट्रिएंट्स की बात करें तो कच्चे सनफ्लावर सीड्स में विटामिन E, मैग्नीशियम, सेलेनियम, B विटामिन, प्रोटीन, हार्ट-हेल्दी अनसैचुरेटेड फैट्स मौजूद होता है जो दिल और दिमाग दोनों को हेल्दी रखते हैं। इन सीड्स का सेवन करने से एनर्जी बूस्ट होती है और मेटाबॉलिज्म भी बूस्ट होता है। वजन घटाने में ये सीड्स जादुई असर करते हैं। आइए जानते हैं कि एक्सपर्ट ने इन सीड्स के कौन-कौन से फायदे बताएं है और इसका सेवन कच्चा करना सेहत के लिए बेहतर है या रोस्टेड खाना।
सूरजमुखी सीड्स को रोस्टेड खाने पर न्यूट्रिएंट्स पर क्या असर पड़ता है?
सनफ्लावर सीड्स को भूनने पर गर्मी इनके न्यूट्रिएंट प्रोफाइल को बदल सकती है। रिसर्च के अनुसार इन सीड्स को भूनने से हीट-सेंसिटिव कंपाउंड जैसे विटामिन E और फिनोलिक एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा कम हो जाती है। प्रोटीन की क्वालिटी भी थोड़ी घट सकती है क्योंकि गर्मी अमीनो एसिड्स की संरचना को प्रभावित कर सकती है। एक स्टडी में पाया गया कि भुने हुए सीड्स में फिनोलिक और फ्लेवोनॉयड स्तर कच्चे सीड्स की तुलना में कम होता हैं।
सीड्स रोस्ट करने पर न्यूट्रिएंट पर कैसा होता है असर?
न्यूट्रिएंट लॉस खासतौर से तापमान और समय पर निर्भर करता है। अगर सीड्स को हल्का या मध्यम रोस्टिंग किया जाता है तो कम न्यूट्रिएंट लॉस होते हैं। अगर हाई टेम्परेचर पर ज्यादा समय तक रोस्ट किया जाता है तो इनसे ज्यादा न्यूट्रिएंट्स की कमी होती है। दिलचस्प बात यह है कि कुल एंटीऑक्सीडेंट्स भले ही इन सीड्स में कम हो जाएं, लेकिन कुछ पोषक तत्वों का अवशोषण रोस्टिंग से बढ़ सकता है। गर्मी सीड्स की सेल वॉल को तोड़ती है, जिससे कुछ कंपाउंड्स शरीर आसानी से अवशोषित कर पाता है।
कुछ स्टडी में पाया गया है कि रोस्टिंग से कैरेटेनॉयड्स और कुछ पॉलीफेनॉल्स की बायोअवेलेबिलिटी यानी शरीर में उपयोग की क्षमता बढ़ जाती है। एक्सपर्ट ने बताया इन सीड्स को भूनने से फ्लेवर और टेक्सचर दोनों बेहतर होते हैं भुने हुए सीड्स का नटी, क्रंची स्वाद लोगों को ज्यादा पसंद आता है। रोस्टेड सीड्स की नमी कम करती है, जिससे शेल्फ लाइफ बढ़ती है और तेल जल्दी खराब नहीं होता।
सूरजमुखी के बीज कच्चे खाएं या भुन कर खाएं
एक्सपर्ट ने बताया अगर आप ज्यादा न्यूट्रिएंट्स चाहते हैं तो आप इन सीड्स का सेवन कच्चे ही करें। इनमें विटामिन E, फिनोलिक कंपाउंड और एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी ज्यादा होती है। अगर आपको बॉडी में बेहतर अवशोषण चाहिए तो आप इन सीड्स का सेवन हल्के या मध्यम रोस्टेड सीड्स के रूप में कर सकते हैं। क्योंकि उनकी बायोअवेलेबिलिटी बेहतर होती है। आप बेहतर स्वाद और पाचन चाहिए भुने हुए सीड्स खा सकते हैं। रोस्टेड सीड्स खाने में स्वादिष्ट लगते हैं जिसके कारण इन्हें नियमित रूप से खाया जा सकता है।
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