Sleep Banking: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा नजरअंदाज की जाने वाली जरूरत बन गई है। देर रात तक काम, मोबाइल स्क्रीन, सफर, नाइट शिफ्ट और पढ़ाई के दबाव के बीच लोग अक्सर अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते। लेकिन अब नींद को लेकर एक नई और दिलचस्प अवधारणा सामने आई है, जिसे ‘स्लीप बैंकिंग’ कहा जाता है। हाल ही में ऑक्सफोर्ड एकेडमिक की Sleep जर्नल में प्रकाशित थॉमस जे. बाल्किन की रिसर्च ने इस कॉन्सेप्ट को वैज्ञानिक आधार दिया है।

क्या है स्लीप बैंकिंग का मतलब?

स्लीप बैंकिंग का मतलब है आने वाले दिनों में अगर नींद कम होने वाली है, तो उससे पहले कुछ दिनों तक थोड़ा ज्यादा सो लेना। जैसे कोई लंबी यात्रा, नाइट ड्यूटी, एग्जाम, प्रतियोगिता या बहुत व्यस्त काम का समय आने वाला हो, तो उससे पहले अपनी नींद बढ़ा लेना। हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि नींद को पैसों की तरह जमा नहीं किया जा सकता, लेकिन अतिरिक्त नींद शरीर और दिमाग के लिए एक बफर यानी सुरक्षा कवच जरूर बनाती है।

रिसर्च क्या कहती है?

थॉमस जे. बाल्किन की नवंबर 2025 में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, स्लीप बैंकिंग से हर व्यक्ति को फायदा हो सकता है, चाहे उसकी नींद की पुरानी आदतें कैसी भी रही हों। रिसर्च में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति कुछ दिनों तक रात में 1–2 घंटे ज्यादा सोता है, तो नींद की कमी से होने वाले नुकसान कम हो जाते हैं। इतना ही नहीं, नींद कम होने के बाद शरीर और दिमाग पहले की तुलना में जल्दी रिकवर भी कर पाते हैं।

डॉक्टर की राय

बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल में इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के लीड कंसल्टेंट डॉ. सुनील कुमार के. के मुताबिक, स्लीप बैंकिंग एक सरल लेकिन असरदार तरीका है। उन्होंने बताया कि ज्यादा नींद लेने से दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है और थकान देर से महसूस होती है। ऐसे लोग जिनकी नींद आगे चलकर कम होने वाली होती है, वे ज्यादा सतर्क रहते हैं, बेहतर फैसले लेते हैं और उनका मूड भी बेहतर रहता है। डॉ. कुमार के अनुसार, अतिरिक्त नींद इम्युनिटी को मजबूत करती है और तनाव को कंट्रोल करने में भी मदद करती है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि स्लीप बैंकिंग गंभीर और लंबे समय तक नींद की कमी की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन इसके असर को जरूर कम कर देती है।

स्लीप बैंकिंग कैसे करें?

अगर आप स्लीप बैंकिंग अपनाना चाहते हैं, तो इसे धीरे-धीरे और प्लान के साथ करें। डॉ. कुमार के अनुसार, किसी बड़े या तनाव भरे इवेंट से 3 से 7 दिन पहले शुरुआत करें। रोज की तुलना में 30 से 60 मिनट पहले सोने जाएं। कोशिश करें कि रोज एक ही समय पर उठें और जरूरत हो तो 20–30 मिनट की छोटी दोपहर की झपकी लें, लेकिन देर शाम न सोएं। नींद की मात्रा के साथ-साथ नींद की गुणवत्ता पर ध्यान दें।

स्लीप बैंकिंग तभी असरदार होती है जब आपकी नींद अच्छी हो। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे कि बेडरूम को अंधेरा, शांत और आरामदायक रखें। दोपहर के बाद कैफीन से बचें। सोने से एक घंटे पहले मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। रात का खाना हल्का रखें। सुबह की धूप लें ताकि बॉडी क्लॉक सही बनी रहे

किन बातों से बचना चाहिए?

डॉ. कुमार के अनुसार, जबरदस्ती बहुत ज्यादा सोने की कोशिश न करें। एक ही दिन बहुत देर तक सोना आपकी नींद की लय बिगाड़ सकता है। स्लीप बैंकिंग को इलाज नहीं, बल्कि एक तैयारी समझें।

निष्कर्ष

स्लीप बैंकिंग एक समझदारी भरा तरीका है, जिससे शरीर और दिमाग आने वाले तनाव और नींद की कमी को बेहतर ढंग से झेल पाते हैं। यह तभी असर करती है जब इसे समय रहते, नियमित और शांति से किया जाए। लेकिन याद रखें, यह रोज की हेल्दी नींद का विकल्प नहीं है। अच्छी सेहत के लिए नियमित और पूरी नींद लेना सबसे जरूरी है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

नेस्थिसियोलॉजिस्ट और पेन मेडिसिन फिजिशियन डॉ. कुनाल सूद के मुताबिक, कुछ आदतें जो देखने में सामान्य लगती हैं, वही दिल को नुकसान पहुंचाती हैं। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।