Sirdard ke karan: सिरदर्द एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है, जो किसी का भी पूरा दिन खराब कर सकती है। कभी सिर में हल्का भारीपन महसूस होता है, तो कभी तेज धड़कता हुआ दर्द, वहीं कई बार आंखों के पीछे चुभन-सी होने लगती है। आज के समय में यह समस्या हर दूसरे व्यक्ति को प्रभावित कर रही है। कई लोग बार-बार दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन कुछ समय बाद दर्द फिर लौट आता है। क्या आप जानते हैं कि आपकी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें भी तेज सिरदर्द की वजह बन सकती हैं? AIIMS-ट्रेंड डॉक्टर ने ऐसी ही आम गलतियों का खुलासा किया है, जो सिरदर्द को गंभीर रूप दे सकती हैं। AIIMS-ट्रेंड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत के अनुसार, तेज या बार-बार होने वाला सिरदर्द सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल से जुड़ी एक अहम चेतावनी हो सकता है। आइए जानते हैं उन रोजमर्रा की आदतों के बारे में, जो अनजाने में सिरदर्द को बढ़ा रही हैं।
सुबह का नाश्ता स्किप करना
दरअसल, डॉ. प्रियंका सेहरावत के अनुसार 80 से 90 प्रतिशत सिरदर्द के मामलों में कोई बड़ी बीमारी नहीं होती। डॉक्टर के अनुसार सिरदर्द की सबसे आम और बड़ी वजह है सुबह का नाश्ता न करना। आजकल कई लोग जल्दी में या वजन घटाने के चक्कर में नाश्ता छोड़ देते हैं। ऐसा करने से शरीर में शुगर लेवल गिर जाता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है और सिरदर्द शुरू हो जाता है। इसके अलावा अगर खाने का कोई तय समय न हो, कभी देर से लंच करना और कभी रात का खाना छोड़ देना, तो दिमाग को जरूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती। यही अनियमितता धीरे-धीरे सिरदर्द को आदत बना देती है।
देर रात तक जागना
देर रात तक जागना और पूरी नींद न लेना भी सिरदर्द की एक बड़ी वजह है। जब हम रोज देर से सोते हैं, तो शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल पाता। वहीं, अगर सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन देखते रहें, तो नींद की गुणवत्ता और खराब हो जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि सुबह उठते ही सिर भारी और दर्द से भरा महसूस होता है।
फिजिकल एक्टिविटी की कमी
आज की लाइफस्टाइल में ज्यादातर लोग घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं। न चलना-फिरना, न कोई एक्सरसाइज और न ही शरीर को एक्टिव रखना, ये सभी आदतें शरीर में तनाव बढ़ाती हैं। यही जमा हुआ तनाव सिरदर्द की वजह बन जाता है। इसके साथ ही पानी कम पीना यानी डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द को ट्रिगर करता है। कई बार लोग समझ ही नहीं पाते कि सिर्फ पानी की कमी से भी सिर में तेज दर्द हो सकता है।
काम का दबाव और मानसिक तनाव
लगातार तनाव में रहना, ज्यादा सोचना और काम का दबाव भी सिरदर्द को बढ़ाता है। जब दिमाग हर वक्त अलर्ट मोड में रहता है, तो उसका असर सिर के दर्द के रूप में सामने आता है। ऑफिस की टेंशन, पारिवारिक चिंता या भविष्य की फिक्र, ये सभी मिलकर सिरदर्द को और गंभीर बना सकते हैं।
दवाइयों से नहीं, लाइफस्टाइल से मिलेगा आराम
डॉ. प्रियंका के अनुसार, दवाइयां सिरदर्द में कुछ समय के लिए राहत जरूर देती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हैं। अगर लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं किया गया, तो सिरदर्द बार-बार होता रहेगा। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी दिनचर्या पर ध्यान दें।
सिरदर्द से बचने के लिए क्या करें?
सिरदर्द से राहत पाने के लिए समय पर नाश्ता और भोजन करना बेहद जरूरी है। रोज 7–8 घंटे की नींद लें, देर रात मोबाइल देखने से बचें और दिन में थोड़ा समय चलने-फिरने या हल्की एक्सरसाइज के लिए निकालें। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और खुद को हाइड्रेट रखें।
निष्कर्ष
सिरदर्द कोई अचानक आने वाली बड़ी बीमारी नहीं, बल्कि अक्सर हमारी छोटी-छोटी गलत आदतों का नतीजा होता है। अगर समय रहते इन आदतों को सुधार लिया जाए, तो बिना दवाइयों के भी इस परेशानी से राहत मिल सकती है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
