भारत में व्रत या उपवास के दौरान सिंघाड़ा (Water Chestnut) और मखाना (Fox Nuts) दोनों का ही सेवन खासतौर पर किया जाता है। दोनों ही फूड जलजनित पौधों से प्राप्त होते हैं, लेकिन इनके पोषक तत्व, स्वाद और शरीर पर असर एक-दूसरे से काफी अलग हैं। सिंघाड़ा जहां हल्का, हाइड्रेटिंग और मिनरल्स से भरपूर होता है, वहीं मखाना प्रोटीन और फाइबर से समृद्ध है जो पेट को देर तक भरा रखता है और वजन को कंट्रोल करता है। दोनों ही ग्लूटेन-फ्री फूड है जिन्हें पचाना आसान होता है।

सिंघाड़ा और मखाना दो ऐसे सुपरफूड हैं जो स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखते हैं। जहां सिंघाड़ा हल्का, ठंडक देने वाला और मिनरल्स से भरपूर माना जाता है, वहीं मखाना प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है जो वजन घटाने और ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद करता है। अब सवाल ये उठता है कि दोनों फूड्स में से कौन सा फूड ऐसा है जो पाचन और वजन दोनों के लिए बेस्ट होता है।  

सिंघाड़ा का पाचन और वजन पर असर

सिंघाड़ा हल्का, हाइड्रेटिंग और मिनरल्स से भरपूर होता है जिसे उबालकर और सुखाकर दोनों तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। सिंघाड़ा एक पानी से भरपूर फल है जिसे लोग उबालकर और सुखाकर दोनों तरह खाते हैं। इसमें फैट बहुत कम और पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल्स अधिक पाए जाते हैं। यह शरीर को ठंडक देता है और पाचन को आसान बनाता है। सिंघाड़े के आटे से बनने वाले व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि पेट के लिए भी हल्के रहते हैं।

मखाना कैसे करता है सेहत पर असर

मखाना एक ऐसा ड्राई फ्रूट है जो प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का पावरहाउस है। मखाना यानी कमल के बीज, जो सूखने के बाद हल्के और कुरकुरे बन जाते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है। ये ड्राई फ्रूट दिल की सेहत को दुरुस्त करता है, वजन कंट्रोल करता है और ब्लड शुगर के स्तर को भी कंट्रोल में रखता है। मखाना लो-कैलोरी स्नैक है, जिसे भूनकर नमक या मसालों के साथ खाया जा सकता है। यह प्रोसेस्ड स्नैक्स का हेल्दी विकल्प है।

पाचन और गट हेल्थ के लिए मखाना खाएं या फिर सिंघाड़ा

मखाना और सिंघाड़ा दोनों ही खाद्य पदार्थ पाचन के लिए फायदेमंद हैं, पर अलग-अलग तरीके से। सिंघाड़ा में पानी की मात्रा ज्यादा और हल्का फाइबर होता है, जो कब्ज से राहत देता है और पेट को ठंडक पहुंचाता है। हेल्थलाइन के मुताबिक मखाना में फाइबर ज्यादा होता है, जो आंतों की सफाई करता है और गट माइक्रोबायोटा को मजबूत बनाता है। अधिक मात्रा में मखाना खाने से कुछ लोगों को हल्की गैस या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है।

वजन घटाने और भूख कंट्रोल करने के लिए मखाना खाएं या सिंघाड़ा

अगर आप वजन कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप मखाना और सिंघाड़ा दोनों का सेवन कर सकते हैं। सिंघाड़ा कम कैलोरी और कम फैट वाला भोजन है जो हल्का और एनर्जाइज़िंग होता है। वहीं मखाना में प्रोटीन और फाइबर रिच फूड है जो पेट को काफी देर तक भरा रखता है, जिससे अनहेल्दी स्नैकिंग कम होती है।

ब्लड शुगर कंट्रोल में भी असरदार

मखाना और सिंघाड़ा दोनों ऐसे फूड हैं जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, यानी ये धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करते हैं और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं। सिंघाड़ा का आटा डायबिटीज के मरीजों के लिए ग्लूटन-फ्री विकल्प है, जबकि मखाना का फाइबर और प्रोटीन कॉम्बिनेशन ब्लड शुगर को नॉर्मल रखता है।

मखाना और सिंघाड़ा का सेवन कैसे करें

सिंघाड़ा का सेवन आप उसके आटे के रूप में रोटियां बनाकर कर सकते हैं। आप सिंघाड़ा के आटे से पैनकेक या हलवा बनाकर भी खा सकते हैं। उबला हुआ सिंघाड़ा सलाद या सब्जी में मिलाकर खाएं फायदा होगा।

मखाना को हल्का भूनकर नमक या मसाले डालकर खाएं आपको फायदा होगा। मखाना खीर में मिलाएं या स्मूदी में ब्लेंड करके खाएं आपका वजन कंट्रोल रहेगा।

ब्लड प्रेशर हाई होना नहीं बल्कि लो भी है जानलेवा, कम बीपी वाले ये 5 ड्राई फ्रूट खाएं तो BP रहेगा नॉर्मल, देखिए कैसे