आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों कुर्सी पर बैठना हमारी आदत बन चुका है। ऑफिस का काम हो, लैपटॉप पर फ्रीलांसिंग, मोबाइल चलाना या टीवी देखना, हमारा ज्यादातर समय बैठे-बैठे ही गुजर जाता है। लेकिन हमारा शरीर इस तरह लगातार बैठने के लिए बना ही नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर हमारे हिप्स यानी कूल्हों पर पड़ता है। लंबे समय तक बैठे रहने से हिप्स की मसल्स टाइट और सुस्त हो जाती है। धीरे-धीरे चलने में अकड़न, उठते समय दर्द, कमर में जकड़न और घुटनों पर दबाव महसूस होने लगता है। अक्सर लोग इसे उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असल वजह होती है हिप मोबिलिटी की कमी।

लगातार बैठने से हिप्स क्यों हो जाते हैं कमजोर?

जब हम लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो हिप्स के आसपास की मसल्स सुस्त और टाइट हो जाती है। इससे उठते समय दर्द, चलने में जकड़न और कमर में खिंचाव महसूस होने लगता है। कई लोग इसे उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असल वजह होती है हिप मोबिलिटी की कमी। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यही समस्या आगे चलकर लोअर बैक पेन और घुटनों के दर्द में बदल सकती है।

हिप मोबिलिटी एक्सरसाइज

हिप मोबिलिटी एक्सरसाइज का मतलब है हिप जॉइंट को उसके पूरे प्राकृतिक मूवमेंट में एक्टिव रखना। जब हिप्स सही तरीके से मूव करती है, तो शरीर का बैलेंस बेहतर रहता है। इससे न सिर्फ दर्द कम होता है, बल्कि चलने, बैठने, झुकने और एक्सरसाइज करने की क्षमता भी बढ़ती है। अच्छी हिप मोबिलिटी शरीर को फुर्तीला बनाए रखती है।

लंबे समय तक बैठने से होने वाले नुकसान

लगातार बैठने की आदत से हिप फ्लेक्सर मसल्स छोटी और टाइट हो जाती है। साथ ही, इससे ब्लड सर्कुलेशन कम होने लगता है, जिससे थकान और भारीपन महसूस होता है। इतना ही नहीं, इसकी वजह से लोअर बैक पेन और साइटिका का खतरा बढ़ जाता है। गलत पोश्चर की आदत पड़ जाती है और चलने-दौड़ने की ताकत भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

हिप फ्लेक्सर स्ट्रेच

यह एक्सरसाइज उन लोगों के लिए सबसे जरूरी है, जो दिन में 6–8 घंटे कुर्सी पर बैठते हैं। इसमें एक घुटना जमीन पर और दूसरा पैर आगे मोड़कर हल्का सा आगे झुकना होता है। इससे हिप्स के आगे की मसल्स खुलती है, जकड़न कम होती है और लोअर बैक पर पड़ने वाला दबाव घटता है। नियमित रूप से इसे करने से उठने-बैठने में आराम मिलता है।

बटरफ्लाई स्ट्रेच

जमीन पर बैठकर पैरों के तलवों को आपस में मिलाएं और घुटनों को धीरे-धीरे नीचे की ओर दबाएं। यह एक्सरसाइज इनर थाई और हिप जॉइंट को खोलती है। लंबे समय तक बैठने से आई अकड़न को दूर करने में यह बेहद कारगर मानी जाती है। इससे शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है।

ग्लूट ब्रिज से हिप्स को मिलती है ताकत

ग्लूट ब्रिज एक्सरसाइज में पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ा जाता है और कमर को ऊपर उठाया जाता है। इससे हिप्स और ग्लूट्स एक्टिव होते हैं। बैठने की वजह से कमजोर हुई मसल्स दोबारा मजबूत बनने लगती है। यह एक्सरसाइज़ कमर और हिप्स दोनों के लिए फायदेमंद है।

90-90 हिप एक्सरसाइज का असर

इस एक्सरसाइज में जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को 90 डिग्री के एंगल पर मोड़ा जाता है और धीरे-धीरे साइड बदली जाती है। इससे हिप जॉइंट का पूरा मूवमेंट बेहतर होता है। चलने, बैठने और झुकने में आसानी होने लगती है और शरीर ज्यादा लचीला बनता है।

डीप स्क्वाट होल्ड से मिलता है पूरा सपोर्ट

डीप स्क्वाट होल्ड में पैरों को थोड़ा खोलकर बैठने की कोशिश की जाती है और कुछ सेकंड उसी पोजिशन में रुका जाता है। इससे हिप्स, घुटने और टखने एक साथ मजबूत होते हैं। बॉडी बैलेंस सुधरता है और बैठने-उठने में दर्द कम होता है।

कितनी देर और कितनी बार करें एक्सरसाइज

हिप मोबिलिटी के लिए रोज 10–15 मिनट काफी होते हैं। ऑफिस में हर 1–2 घंटे में कुर्सी से उठकर थोड़ा मूव करना भी जरूरी है। एक्सरसाइज करते समय तेज दर्द नहीं, सिर्फ हल्का खिंचाव महसूस होना चाहिए। धीरे-धीरे शरीर खुद बेहतर रिस्पॉन्स देने लगता है।

निष्कर्ष

अगर आप दिन का बड़ा हिस्सा बैठकर बिताते हैं, तो हिप मोबिलिटी एक्सरसाइज आपके लिए कोई ऑप्शन नहीं, बल्कि जरूरत है। ये आसान एक्सरसाइज शरीर को दोबारा एक्टिव बनाती हैं, दर्द से बचाती है और भविष्य में होने वाली बड़ी समस्याओं को रोकने में मदद करती है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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