अक्सर लोग हर्निया को तब तक गंभीर बीमारी नहीं मानते, जब तक उसमें तेज दर्द या कोई बड़ी परेशानी शुरू न हो जाए। कई लोगों को लगता है कि अगर दर्द नहीं है तो इलाज कराने की जरूरत भी नहीं है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह सोच बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। मुंबई के मशहूर अस्पतालों (सैफी, अपोलो और नमाह) की कंसल्टेंट सर्जन डॉ. अपर्णा गोविल भास्कर के अनुसार, हर्निया चाहे बच्चों में हो या बड़ों में, इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। बिना दर्द वाला हर्निया भी अचानक गंभीर रूप ले सकता है और इमरजेंसी की स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए समय रहते इसकी पहचान कर सही इलाज कराना बेहद जरूरी है।
हर्निया होता क्या है?
हमारे पेट की मांसपेशियां शरीर के अंदर मौजूद अंगों को उनकी सही जगह पर थामे रखती हैं। लेकिन जब किसी कारणवश ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं या उनमें छेद पड़ जाता है, तो अंदर के अंग, जैसे आंतें, उस कमजोर जगह से बाहर की ओर उभरने लगते हैं। पेट या कमर के किसी हिस्से में दिखाई देने वाली यही सूजन या उभार हर्निया कहलाता है। शुरुआत में यह उभार बिना दर्द के भी हो सकता है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकता है।
हर्निया के रूप
डॉ. अपर्णा गोविल के मुताबिक, हर्निया मुख्य रूप से तीन स्टेज में देखा जाता है। पहला है साधारण हर्निया, जिसमें अंदर का अंग बाहर तो आ जाता है, लेकिन वहां फंसता नहीं है और कई बार लेटने पर वापस अंदर चला जाता है। दूसरा है फंसा हुआ हर्निया (इंकार्सरेटेड हर्निया), जिसमें आंतें बाहर निकलकर वहीं अटक जाती हैं और वापस अंदर नहीं जा पातीं। तीसरा और सबसे खतरनाक रूप है स्ट्रैंग्युलेटेड हर्निया, जिसमें फंसी हुई आंतों तक खून की सप्लाई बंद हो जाती है। इस स्थिति में आंतें खराब हो सकती हैं और गैंग्रीन जैसी जानलेवा समस्या पैदा हो सकती है।
क्यों बन जाता है हर्निया इमरजेंसी?
फंसा हुआ और स्ट्रैंग्युलेटेड हर्निया दोनों ही मेडिकल इमरजेंसी माने जाते हैं। इनमें तुरंत ऑपरेशन करना जरूरी होता है, क्योंकि थोड़ी सी देरी भी मरीज की जान को खतरे में डाल सकती है। यही कारण है कि डॉक्टर साधारण हर्निया होने पर भी समय रहते सर्जरी कराने की सलाह देते हैं, ताकि आगे चलकर इमरजेंसी स्थिति से बचा जा सके।
हर्निया की सर्जरी में क्या किया जाता है?
हर्निया की सर्जरी में बाहर निकले हुए अंग को उसकी सही जगह पर वापस रखा जाता है। इसके बाद मांसपेशियों के उस कमजोर हिस्से को मजबूत किया जाता है, जहां से हर्निया निकला था। इसके लिए आमतौर पर एक खास तरह की जाली, जिसे मेश कहा जाता है, लगाई जाती है। मेश लगाने से हर्निया के दोबारा होने की संभावना काफी कम हो जाती है।
हर्निया का इलाज कैसे किया जाता है?
हर्निया की सर्जरी मुख्य रूप से तीन तरीकों से की जाती है – ओपन सर्जरी, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और रोबोटिक सर्जरी। सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीज 36 से 72 घंटे के भीतर घर जा सकते हैं। कई मामलों में मरीज उसी दिन डिस्चार्ज भी हो जाता है।
ओपन हर्निया सर्जरी क्या है?
ओपन सर्जरी में मरीज को लोकल, स्पाइनल या जरूरत पड़ने पर जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है। सर्जन हर्निया वाली जगह पर चीरा लगाता है और बाहर निकली आंतों को धीरे-धीरे अंदर उनकी सही जगह पर वापस रखता है। इसके बाद कमजोर मांसपेशियों को टांकों से बंद किया जाता है और मेश लगाया जाता है। आज के समय में ओपन सर्जरी कम ही की जाती है और यह आमतौर पर बहुत बड़े या बार-बार होने वाले हर्निया में की जाती है।
लेप्रोस्कोपिक हर्निया सर्जरी क्यों है बेहतर?
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी आज सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली तकनीक है। इसमें जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है और पेट में छोटे-छोटे कट लगाए जाते हैं। कैमरे और खास उपकरणों की मदद से सर्जरी की जाती है। इस तरीके से दर्द कम होता है, घाव जल्दी भरता है और मरीज जल्दी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लौट आता है। रिसर्च के मुताबिक, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज ओपन सर्जरी की तुलना में करीब एक हफ्ता पहले सामान्य जीवन जीने लगता है।
रोबोटिक हर्निया सर्जरी क्या है?
नई तकनीक के तहत अब हर्निया की सर्जरी रोबोट की मदद से भी की जा रही है। इसमें सर्जन को अंदर का दृश्य ज्यादा साफ और सटीक दिखाई देता है। यह तरीका खासतौर पर जटिल और मुश्किल हर्निया के मामलों में काफी फायदेमंद माना जाता है।
किस मरीज के लिए कौन-सी सर्जरी सही?
हर मरीज के लिए एक ही तरह की सर्जरी सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। सर्जरी का तरीका हर्निया के आकार, प्रकार और उसकी जगह पर निर्भर करता है। इसके अलावा मरीज की उम्र, उसकी सेहत और जीवनशैली को ध्यान में रखकर डॉक्टर सर्जरी का फैसला करते हैं।
निष्कर्ष
अगर आपको हर्निया है, चाहे वह दर्द कर रहा हो या नहीं, तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और सही इलाज करवाना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ इमरजेंसी ऑपरेशन से बचा जा सकता है, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से भी राहत मिलती है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
