सूजन (Inflammation) हार्ट अटैक और आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों की जड़ है। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। सीधी भाषा में कहें तो शरीर में सूजन बॉडी का ‘डिफेंस मैकेनिज्म है यानी सुरक्षा कवच है। जब हमारी बॉडी पर किसी बाहरी बैक्टीरिया, वायरस या चोट का हमला होता है तो ये मैकेनिज्म खुद को बचाने के लिए उस जगह पर खून का प्रवाह और इम्यून सेल्स (Immune Cells) भेजता है, जिसे हम सूजन के रूप में देखते हैं। सूजन दो तरह  की होती है एक एक्यूट सूजन और दूसरी क्रोनिक सूजन है। एक्यूट सूजन चोट लगने, जलने या संक्रमण होने पर तुरंत होती है। ये सूजन साफ संकेत है कि आपका शरीर हीलिंग (Healing) कर रहा है। ये कुछ दिनों में ठीक हो जाएगा।

क्रोनिक सूजन मतलब जब सूजन शरीर के अंदर लंबे समय यानी महीनों या सालों तक बनी रहती है। ये सूजन कई बीमारियों की वजह मानी जाती है। अगर शरीर में क्रोनिक सूजन लंबे समय तक रहे, तो ये कई बीमारियों जैसे हार्ट डिजीज, डायबिटीज, आर्थराइटिस,  अल्जाइमर और कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती है। बॉडी में होने वाली इस सूजन को डाइट से कंट्रोल किया जा सकता है।

मूली एक ऐसा फूड है जो बॉडी की क्रॉनिक से लेकर नॉर्मल सूजन तक को कंट्रोल करती है। मूली कैलोरी में बेहद कम होती है, लेकिन ज़रूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें लगभग 94% पानी होता है, जो इसे हाइड्रेशन के लिए बेहतरीन बनाता है। साथ ही, इसमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं को सपोर्ट करते हैं। आइए जानते हैं कि मूली का सेवन कैसे सूजन को कंट्रोल करता है और बॉडी को फायदा पहुंचाता है।

मूली कैसे सूजन को कंट्रोल करती है?

मूली एक ऐसी सब्जी है जो विटामिन सी  से भरपूर होती है जो इम्यूनिटी और कोलेजन के लिए ज़रूरी है। इसमें विटामिन B6 और फोलेट होता है जो एनर्जी मेटाबॉलिज्म और ब्रेन हेल्थ के लिए जरूरी है। इसमें पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी मौजूद होता है जो हड्डियों और मसल्स के लिए जरूरी है। फाइबर से भरपूर ये सब्जी बॉडी में होने वाली सूजन को कंट्रोल कर सकती है।

Journal of Food Science and Technology में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक मूली के एक्सट्रैक्ट्स COX-2 जैसे इंफ्लेमेटरी मार्कर्स को दबा सकते हैं। मूली में मौजूद एंथोसायनिन और सल्फर यौगिक उन प्रोटीन्स जैसे C-Reactive Protein को रोक देते हैं जो शरीर में सूजन का संदेश फैलाते हैं। इसीलिए इसे नेचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी कहा जाता है।  Journal of Agricultural and Food Chemistry के अनुसार ये यौगिक शरीर में सूजन पैदा करने वाले मुख्य पाथवे NF-κB (Nuclear Factor kappa B) को ब्लॉक कर देते हैं। जब यह पाथवे ब्लॉक होता है, तो शरीर में सूजन पैदा करने वाले साइटोकिन्स(Cytokines) का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे आर्थराइटिस और नसों की सूजन में राहत मिलती है।

पाचन के लिए मूली के फायदे

मूली एक बेहतरीन नेचुरल डाइजेस्टिव एड है, क्योंकि इसमें भरपूर डाइटरी फाइबर होता है। ये फाइबर मल को भारी बनाकर आंतों की गति को बेहतर करता है जिससे कब्ज़ की परेशानी से राहत मिलती है। मूली का सलाद और सब्जी के रूप में सेवन करने से गट हेल्थ सुधरती है। आयुर्वेद में मूली को दीपन माना जाता है और भोजन से पहले पाचन को सक्रिय करने के लिए इसे खाने की सलाह दी जाती है। यह पाचन रस और पित्त के स्राव को बढ़ाने में मदद करती है, जिससे फैट का पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। मूली का सेवन करने से इसमें मौजूद प्राकृतिक एंज़ाइम जटिल कार्बोहाइड्रेट्स को तोड़ने में मदद करते हैं। रोजाना इसका सेवन करने से पेट की गैस, एसिडिटी और अपच से राहत मिलती है ये हेल्दी गट माइक्रोबायोम को बनाए रखने में मददगार होती है।

इम्यूनिटी बूस्ट करती है मूली

मूली में भरपूर विटामिन C होता है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। ये सफेद सब्जी सफेद रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाकर इम्यून सिस्टम को मज़बूत करती है। इससे सर्दी-ज़ुकाम और फ्लू जैसे लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। मूली में रैफैनिन (Raphanin) नामक सल्फर युक्त तत्व होता है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं जो बॉडी को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। मूली ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करती है और कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है। इसका सेवन करने से इम्यूनिटी नेचुरल तरीके से स्ट्रांग होती है।

डायबिटीज़ कंट्रोल में है असरदार

मूली का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है यानी इसे खाने के बाद ब्लड में शुगर का स्तर तेजी से नहीं बढ़ता। इसमें मौजूद फाइबर शुगर के अवशोषण को धीमा करता है जिससे ग्लूकोज़ लेवल बैलेंस रहता है। 2024 की एक रिसर्च के मुताबिक मूली की जड़ से बने एक्सट्रैक्ट्स इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाते हैं और ग्लूकोज़ अपटेक बढ़ा सकते हैं। मूली के एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। इसका सेवन कच्चा, पका कर या रोटी के साथ करने से ब्लड में शुगर का स्तर नॉर्मल रहता है।

लिवर और किडनी करती है डिटॉक्स

आयुर्वेद में मूली को बेहतरीन डिटॉक्सिफाइंग फूड माना गया है। मूली का सेवन करने से खून में मौजूद अशुद्धियां बाहर निकलती है। अक्सर डॉक्टर पीलिया की बीमारी में मूली खाने और उसका जूस पीने की सलाह देते हैं। ये खून से अतिरिक्त बिलीरुबिन को बाहर निकालने में मदद करती है। मूली एक नेचुरल डाइयूरेटिक है जो पेशाब की मात्रा बढ़ाकर किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करती है। इसमें भरपूर पानी मौजूद होता है जो बॉडी को हाइड्रेट करता है और किडनी को दुरुस्त तरीके से काम करने में मदद करता है।

बॉडी की हीट करती है कंट्रोल

आयुर्वेद में मूली को बॉडी हीट कंट्रोल करने वाली सब्जी माना जाता है। ये सब्जी ऊतकों को सूजन से होने वाले नुकसान से बचाती हैं। आयुर्वेद में मूली को श्वसन तंत्र के लिए फायदेमंद माना गया है। इसका तीखा स्वाद और उष्ण प्रभाव शरीर में जमा अतिरिक्त कफ को बाहर निकालने में मदद करता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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