बढ़ता प्रदूषण न सिर्फ सांसों पर भारी पड़ता है बल्कि आपके शरीर को भी भारी बना देता है। जी हां, जिस ज़हरीली हवा में आप और हम सांस ले रहे हैं वो हवा ही जहरीली हो चुकी है। हवा में मौजूद जहर आपको हमें मोटापा का शिकार बना रहा है। इतना ही नहीं जिसे हम शुद्ध और खुली हवा समझते हैं वो हवा हमारे पैंक्रियाज पर भी भारी पड़ रही है। इस दूषित हवा में सांस लेने से हम क्रॉनिक बीमारी डायबिटीज का भी शिकार हो रहे हैं। हम आपको डरा नहीं रहे हैं सिर्फ सच्चाई से रूह ब रूह करा रहे हैं। रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म ज़हरीले कण शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं, इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाते हैं और धीरे-धीरे टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ा देते हैं।

रिसर्च से समझें कि प्रदूषण कैसे डायबिटीज और वजन बढ़ने का कारण है?

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन (Washington University School of Medicine) और The Lancet Planetary Health की रिसर्च के मुताबिक जो 2018 में प्रकाशित हुई और 2023-24 के ताजा डेटा ने इसकी पुष्टि की है बताया कि वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण (PM 2.5) जब सांस के जरिए शरीर में जाते हैं, तो वे फेफड़ों से सीधे रक्तप्रवाह (Bloodstream) में पहुंच जाते हैं। ये कण शरीर में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं। ये सूजन इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।  प्रदूषण हमारे शरीर के ब्राउन फैट जो कैलोरी जलाता है को कम कर देता है, जिससे वजन तेजी से बढ़ने लगता है।

ब्राउन फैट और मेटाबॉलिज्म का कनेक्शन

हमारे शरीर में दो तरह का फैट होता है एक सफेद और दूसरा ब्राउन फैट। ब्राउन फैट शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न कर गर्मी पैदा करता है और मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखता है। लेकिन रिसर्च बताती है कि वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण ब्राउन फैट की गतिविधि को दबा देते हैं। इसका असर ये होता है कि शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता घट जाती है, मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है और व्यक्ति कम खाने के बावजूद धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है।

इन्फ्लेमेशन से डायबिटीज का कनेक्शन

जब PM 2.5 कण फेफड़ों के जरिए खून में पहुंचते हैं, तो शरीर का इम्यून सिस्टम इन्हें बाहरी हमलावर मानकर एक्टिव हो जाता है।  इससे पूरे शरीर में सूजन (Inflammation) पैदा होती है। यही सूजन इंसुलिन के रिसेप्टर्स को ब्लॉक कर देती है, जिससे खून में शुगर का स्तर बढ़ना शुरू हो जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक प्रदूषण शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ाता है। ये इन्सुलिन सिग्नलिंग को बिगाड़ता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाता है,जिससे metabolism खराब होता है। खराब मेटाबॉलिज्म इंसुलिन रेजिस्टेंस को तेज करता है जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल होता है।

किन लोगों के लिए खतरा है ये बढ़ता प्रदूषण

दिल्ली और उसके आसपास , खासकर गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है।  PM2.5 और PM10 का स्तर खतरनाक होता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन होती है। सर्दियों में वाहनों, निर्माण और पराली जलाने से स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा खतरा सड़क किनारे रहने वाले लोगों को, बच्चों और बुजुर्ग को है। बच्चों और बुजुर्गों का मेटाबॉलिज्म संवेदनशील होता है। प्रदूषित हवा से खतरा प्री डायबिटीज मरीजों को भी ज्यादा है।

वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय

अगर आप इन जहरीली गैसों से बचाव करना चाहते हैं तो आप आउटडोर वर्कआउट का समय बदलें। जब प्रदूषण (AQI) ज्यादा हो, तो बाहर दौड़ने के बजाय घर के अंदर योग या एक्सरसाइज करें। प्रदूषण से बचाव करने के लिए डाइट का ध्यान रखें। एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर डाइट लें। डाइट में विटामिन C से भरपूर फूड जैसे आंवला और संतरा खाएं। डाइट में विटामिन E से भरपूर फूड्स का भी सेवन करें। बादाम और सीड्स का सेवन असरदार साबित होगा। ये दोनों पोषक तत्व प्रदूषण से होने वाली सूजन से लड़ने में असरदार साबित होंगे।

एक्सपर्ट ने बताया बचाव का तरीका

ल्यूक कोटिन्हो भारत के एक प्रसिद्ध हेल्थ कोच और इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल मेडिसिन विशेषज्ञ हैं, जो ओवर ऑल हेल्थ जैसे पोषण, व्यायाम, नींद, भावनात्मक डिटॉक्स पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने कई बेस्टसेलर किताबें लिखी हैं जैसे ‘द ग्रेट इंडियन डाइट’ और ‘द ड्राई फास्टिंग मिरेकल। ये स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाते हैं और कई स्वास्थ्य पहलों से जुड़े हैं। हेल्थ कोच ल्यूक कोटिन्हो ने बताया हवा में घुले छोटे-छोटे जहरीले कण हमारे फेफड़ों में जाकर खून तक पहुंच जाते हैं और हमारी बॉडी के कई अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। सूक्ष्म जहरीले कण हमारे फेफड़ों में घुसकर, खून में मिलकर, हमारे शरीर के उन अंगों को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं जिनकी बदौलत हम जिंदा हैं। ये प्रदूषित हवा सिर्फ फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि दिल, दिमाग, फर्टिलिटी और इम्यूनिटी को भी प्रभावित करती है।

एक्सपर्ट ने बताया अगर आप इस परेशानी से निजात पाना चाहते हैं तो आप घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें। सुबह-शाम बाहर व्यायाम करने से बचें। घर की हवा साफ रखने के उपाय अपनाएं। डाइट में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-C बढ़ाएं। गर्म पानी और हर्बल ड्रिंक का सेवन करें। गर्म पानी की भाप लें। धूम्रपान, शराब और तली हुई चीजों से परहेज करें।

निष्कर्ष

वायु प्रदूषण अब सिर्फ सांस की बीमारी नहीं, बल्कि मोटापा और डायबिटीज जैसी क्रॉनिक बीमारियों का एक साइलेंट ट्रिगर बन चुका है। रिसर्च साफ बताती है कि प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण शरीर के मेटाबॉलिज्म को कमजोर करते हैं, ब्राउन फैट की सक्रियता घटाते हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाते हैं। ऐसे में सिर्फ दवा नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल में बदलाव, सही डाइट और प्रदूषण से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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