air pollution

दिल्ली के मौसम का हाल: शहर में सांस लेना भी हुआ सेहत के लिए खतरनाक

एक्यूआइ अगर 500 से ज्यादा हो जाए तो इसे सबसे गंभीर स्तर और सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बेहद ही खराब स्थिति है और इस स्थिति में लोगों में सांस संबंधित परेशानियां होती हैं।

राजनीति: जानलेवा बनता सूक्ष्म प्लास्टिक

लाल व श्वेत रक्त कोशिकाओं के संपर्क में आने के बाद माइक्रो व नैनो प्लास्टिक एक विशेष प्रकार की रासायनिक प्रक्रिया उत्पन्न करते हैं, जिससे रक्त कोशिकाएं मर जाती हैं और इनके मरने के बाद यह जहर धीरे-धीरे शरीर में अन्य कोशिकाओं को
भी मारता जाता है।

चौपाल: मुश्किल सफर

मानव समाज को अपनी विकास यात्रा के दौरान विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये समस्याएं प्राकृतिक भी हो सकती हैं और कृत्रिम भी।

राजनीति: अर्थव्यवस्था बनाम प्रदूषण

पर्यावरण को हो रहे नुकसान के कारण ही जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे वर्षाचक्र गड़बड़ा रहा है। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी के सिर पर पीने का पानी और पर्याप्त कृषि उपज का संकट मंडराने लगा है। अगर इसी तरह पर्यावरण तबाह होता रहा तो आगे चल कर एक आर्थिक दुर्घटना को टालना मुश्किल नजर आ रहा है।

राजनीति: जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव

एकल उपयोग वाले यानी सिंगल यूज प्लास्टिक के कारण भी जमीन बंजर हो जाती है। यह कचरे के साथ मिल कर मीथेन गैस बनाता है। यही पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा है। मीथेन गैस कार्बन डाइआक्साइड की तुलना में तीस गुना अधिक खतरनाक है। जलवायु परिवर्तन के लिए भी यही गैस खासतौर से जिम्मेदार मानी जाती है।

संपादकीय: प्रदूषण के उद्योग

दिल्ली सहित समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर का सवाल है, यहां किसी न किसी वजह से पूरे साल प्रदूषण की स्थिति सुर्खियों में रहती है। लेकिन कभी समस्या की जड़ पर बात करने और उसे दूर करने के लिए ठोस पहल नहीं होती है।

वायु प्रदूषण से गई 17 लाख भारतीयों की जान, जीडीपी को हुआ 1.4 फीसदी का नुकसान; स्टडी में हुआ खुलासा

“द इंडिया स्टेट लेवल डिजीज बर्डन इनिशिएटिव” नाम की ताजी लैंसेट रिपोर्ट में भीतरी (इनडोर) और बाहरी (आउटडोर) स्रोतों से होने वाले वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों का आकलन किया गया है।

दिन ब दिन बढ़ रहा है राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण कारक कण पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा भी अधिक दर्ज की गई।

दिल्ली-NCR: बारिश से प्रदूषण सुधरा, फिर भी हवा ‘बहुत खराब’

जिन शहरों की हवा अभी भी खतरनाक बनी हुई है उनका समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 400 के पार बना हुआ है। गाजियाबाद का एक्यूआइ 415, ग्रेटर नोएडा 404, कानपुर 404, बुलंदशहर 402, बागपत 402 दर्ज किया गया है।

चौपाल: जलवायु के लिए

पिछले चार वर्षों में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को लेकर भारत ने गंभीरता का परिचय दिया है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। साथ ही पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर रहा है।

बढ़ रही मुसीबत: हवा की रफ्तार कम होने से बढ़ा प्रदूषण, महीन धूल कण में पराली की हिस्सेदारी सात फीसद हुई

दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, आगरा सहित 19 शहरों की हवा फिर बहुत खराब स्तर तक प्रदूषित हो गई है। इन सभी जगहों पर एक्यूआइ 300 से 400 के बीच है

हवा का हाल: वायु गुणवत्ता गाजियाबाद में गंभीर, नोएडा, गुड़गांव व फरीदाबाद में बहुत खराब

सूचकांक के अनुसार शून्य से 50 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।

प्रदूषण: दिल्ली एनसीआर की हवा में सुधार बरकरार

दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा, गुरुग्राम सहित कई शहरों की हवा ‘बहुत खराब’ से सुधरकर ‘मध्यम’ दर्जे की हो गई है

संपादकीय: प्रदूषण की आग

दिल्ली में गाजीपुर, ओखला और भलस्वा सहित कुछ जगहों पर शहर का अवशिष्ट डालने की जगहें निर्धारित की गई है। किसी भी कचरे के ढेर से प्रदूषण होना आम बात है। सवाल है कि अगर सरकार ने अवशिष्ट डालने की जगहें निर्धारित की हैं, तो उसके प्रदूषित होने या आग लगने जैसी स्थितियों का सामना करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं! निश्चित रूप से दस्तावेजों में इससे संबंधित नियम-कायदे तय किए गए होंगे।

दुनिया मेरे आगे : छिनती हरियाली, सिमटता जीवन

बहरहाल, विकास अपने रास्ते मेरे गांव भी पहुंचा था, जिसकी वजह से अब यह शहर बन कर जिला बन गया है। इसे राज्य का औद्योगिक तीर्थ कहा जाने लगा है। देश का विद्युत हब बनने की ओर अग्रसर है। जिधर दृष्टि जाती है, ऊंची-ऊंची विशालकाय चिमनियां धुआं उगलती दिखती हैं। सब ओर औद्योगिक माहौल। सड़कों पर निकलने पर शरीद धूल-धक्कड़ और चेहरा कालिमा से पुत जाता है। मैं अपने ऐसे ही शहर में अब रच-बस गया हूं।

चौपाल: प्रदूषण पर्व

कुछ समय पहले यह खबर चर्चा में थी कि इस बार रिकॉर्ड तोड़ दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री हुई। अब ये वाहन कोई घर में सजा कर रखने के तो हैं नहीं, सड़कों पर दौड़ेंगे, प्रदूषण बढ़ाएंगे। फिर प्रदूषण बढ़ेगा तो हम पराली का रोना-धोना शुरू कर देंगे, जो पराली निर्धारित समय पर केवल महीने या पंद्रह दिन ही धुआं फैलाती है। ये वाहन तो रोज ही अपना धुआं उगल कर प्रदूषण बढ़ाएंगे।

चौपाल: जैव-विविधता की जगह

भारतीय उपमहाद्वीप में भी कुल सैंतीस आर्द्र भूमि इसी सभागम द्वारा ही स्थापित की गई है। 1972 में एमआइटी, अमेरिका द्वारा प्रकाशित ‘द लिमिट्स टू ग्रोथ’ में घातांकीय रूप से वृद्धि कर रही अर्थव्यवस्था एवं जनसंख्या को संसाधनों की सीमित उपलब्धता से जोड़ने का प्रयास किया गया था। यह वही वर्ष है जब पर्यावरण को लेकर पहली बार स्वीडन के स्टॉकहोम में पृथ्वी शिखर-सम्मेलन का आयोजन किया गया था।

प्रदूषण से लेकर कोरोना तक, लापरवाही के लिए कौन है जिम्मेदार?

Fire Crackers Ban: पटाखे हों या अन्य पाबंदियां, इन पर अमल जनता को ही सुनिश्चित करना होगा। ऐसा न होने पर पूरे समाज को बड़े कष्ट व संकटों के लिए तैयार रहना होगा

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