आजकल बहुत से लोग पेट फूलने, थकान, स्किन की दिक्कत, बार-बार सिरदर्द या बिना वजह लो एनर्जी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। मेडिकल टेस्ट नॉर्मल आने के बाद भी परेशानी खत्म नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हम सही खाना खा रहे हैं? इसी सवाल का जवाब ढूंढने में एलिमिनेशन डाइट मदद करती है। दरअसल, 34 साल की अनन्या को लंबे समय से पेट फूलने, थकान और एडल्ट एक्ने की समस्या थी। स्किन केयर और दवाइयों के बावजूद कोई खास सुधार नहीं हो रहा था। सारे मेडिकल टेस्ट नॉर्मल थे, लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था। तब उन्होंने सोचा कि शायद समस्या खाने से जुड़ी है।

उन्हें तीन हफ्ते की एलिमिनेशन डाइट पर रखा गया। इसमें एक-एक करके डेयरी, ग्लूटेन, सोया, शुगर और कैफीन को डाइट से हटाया गया। फिर धीरे-धीरे इन चीजों को दोबारा शामिल किया गया और शरीर की प्रतिक्रिया देखी गई। सिर्फ 10 दिनों में अनन्या का पेट फूलना कम हो गया, एनर्जी बढ़ी और स्किन में भी सुधार दिखने लगा। जब उन्होंने दोबारा डेयरी ली, तो दो दिन बाद पेट सूज गया और स्किन पर ब्रेकआउट आ गए। ग्लूटेन से हल्की परेशानी हुई और शुगर लेने पर थकान और और ज्यादा मीठा खाने की क्रेविंग बढ़ गई। नतीजा ये नहीं था कि वो कभी ये चीजें नहीं खा सकतीं, बल्कि उन्होंने अपनी सीमा पहचान ली।

एलिमिनेशन डाइट क्या होती है?

एलिमिनेशन डाइट कोई फड डाइट या भूखा रहने का तरीका नहीं है। ये वजन घटाने की स्कीम भी नहीं है। असल में, यह एक शॉर्ट-टर्म और प्लान्ड तरीका है, जिससे यह समझा जाता है कि कौन सा खाना आपके शरीर को सूट नहीं कर रहा। इस डाइट में कुछ समय के लिए ऐसे फूड हटाए जाते हैं, जो आमतौर पर शरीर में सूजन, पाचन की समस्या या स्किन इश्यू बढ़ा सकते हैं। फिर उन्हें एक-एक करके वापस शामिल किया जाता है, ताकि शरीर की प्रतिक्रिया साफ समझ में आए।

एलिमिनेशन डाइट कैसे काम करती है?

पहला चरण: एलिमिनेशन (2–4 हफ्ते)

इस दौरान डेयरी, ग्लूटेन, सोया, अंडा, मूंगफली, शेलफिश, रिफाइंड शुगर, शराब, कैफीन और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाई जाती है। इसकी जगह सादा और नेचुरल खाना लिया जाता है, जैसे – सब्जियां, फल, चावल, मिलेट्स, दालें, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट और हर्बल टी।

दूसरा चरण: बॉडी को रीसेट करना

इस समय शरीर की सूजन कम होती है, पाचन सुधरता है और लक्षण शांत होने लगते हैं। यह एक तरह से नया “बेसलाइन” बनाता है, जिससे आगे तुलना आसान होती है।

तीसरा चरण: दोबारा शामिल करना

अब हटाए गए फूड को 3-4 दिन के गैप में एक-एक करके वापस लाया जाता है। इसी स्टेज से पता चलता है कि कौन सा फूड थकान, पेट दर्द, स्किन इश्यू या दूसरी समस्याएं बढ़ा रहा है।

किसे सावधानी रखनी चाहिए?

गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली मां, डायबिटिक, बहुत कम वजन वाले लोग या जिन्हें ईटिंग डिसऑर्डर का इतिहास हो, उन्हें यह डाइट डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की देखरेख में ही करनी चाहिए। बच्चों पर बिना मेडिकल सलाह के एलिमिनेशन डाइट नहीं अपनानी चाहिए। साथ ही, हटाए गए फूड की जगह सही और पौष्टिक विकल्प लेना जरूरी है, ताकि शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी न हो।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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