डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसे अगर कंट्रोल नहीं किया जाए तो कई बीमारियों जैसे दिल के रोगों, किडनी और लंग्स को नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटीज के जोखिम में सबसे आम इन्हीं बीमारियों को माना जाता है। लेकिन आप जानते हैं कि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज की वजह से एक और बीमारी का खतरा बढ़ता है वो है बेल्स पाल्सी। मायो क्लिनिक के मुताबिक बेल्स पाल्सी एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी आ जाती है।

हालांकि ये कमजोरी कुछ समय के लिए होती है और कुछ हफ्तों में इलाज कराने पर ठीक भी हो जाती है। इस कमजोरी के कारण चेहरे का आधा हिस्सा लटकता हुआ दिखाई देता है। इस बीमारी में चेहरे के आधे हिस्से पर पैरालाइज हो जाता है। इस बीमारी में मुस्कान एक तरफा होती है और जिस हिस्से पर पैरालाइज आता है उस हिस्से की आंख बंद होना मुश्किल होता है।

बेल्स पाल्सी किसी को भी प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह 15 से 60 साल की उम्र के लोगों में सबसे आम है। बेल्स पाल्सी का किस वजह से होता है इसका स्टीक कारण पता नहीं है लेकिन इसके लिए कुछ जोखिम कारक है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी के जोखिम कारक क्या है?  इसके लक्षण और उपचार कैसे करें।

बेल्स पाल्सी के लक्षण क्या हैं?

  • बेल्स पाल्सी के लक्षणों में चेहरे के एक तरफ अचानक कमजोरी होना
  • चेहरे का एक तरफ लटक जाना।
  • आंख बंद करना या मुस्कुराने में मुश्किल होना
  • बेल्स पाल्सी के अतिरिक्त लक्षणों में लार आना, जबड़े के आसपास या कान के पीछे दर्द, एक कान में ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि,
  • सिरदर्द और आंख से आंसू आना।
  • बेल्स पाल्सी के कारण जीभ में स्वाद की अहसास कम होना। इस बीमारी में लक्षणों की शुरुआत आमतौर पर तेजी से होती है, और  48 घंटों के अंदर अपने चरम पर पहुंच जाती है।

बेल्स पाल्सी का जोखिम

  • डायबिटीज और प्रीडायबिटीज की वजह से इस बीमारी का जोखिम बढ़ता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ाता है।
  • श्वसन संक्रमण जैसे सर्दी जुकाम में भी बढ़ सकता है इस बीमारी का खतरा
  • महिलाओं में बेल्स पाल्सी का खतरा प्रेग्नेंसी में होता है। जो महिलाएं तीन महीने प्रेग्नेंट होती है या बच्चे को जन्म देने के बाद पहले हफ्ते में ये परेशानी हो सकती है।

बेल्स पाल्सी का कारण

  • मुंह में छाले होना और जेनाइटल दाद, जिसे हर्पीस सिम्प्लेक्स के नाम से भी जाना जाता है।
  • चिकनपॉक्स और दाद, जिसे हर्पीस ज़ोस्टर (herpes zoster) भी कहा जाता है।
  • संक्रामक मोनोन्यूक्लिओसिस, एपस्टीन-बार वायरस के कारण होता है।
  • साइटोमेगालोवायरस संक्रमण
  • एडिनोवायरस के कारण होने वाली श्वसन संबंधी बीमारियां।
  • मम्स वायरस के कारण
  • फ़्लू, जिसे इन्फ्लूएंजा बी भी कहा जाता है।
  • हाथ-पैर और मुंह की बीमारी के कारण भी ये परेशानी हो सकती है।

बेल्स पाल्सी का इलाज कैसे करें?

  • बेल्स पाल्सी के उपचार में सूजन को कम करने के लिए स्टेरॉयड जैसी दवाएं और एंटीवायरल दवाओं से मरीज का इलाज किया जाता है। फेशियल नर्व को उत्तेजित करते समय फिजियोथेरेपी भी फायदेमंद हो सकती है। कुछ मामलों में एक्यूपंक्चर या विटामिन थेरेपी जैसी वैकल्पिक चिकित्सा से उपचार किया जााता है।
  • आंखों को सूजन से बचाने के लिए आंखों पर चश्मा लगाएं और आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें।
  • बेल्स पाल्सी से बचाव करने के लिए आप अपने लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव करें।
  • डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें।
  • तनाव से दूर रहें। रेगुलर एक्सरसाइज करें। बॉडी को एक्टिव रखें।