पशु प्रोटीन का सेवन उतना बुरा नहीं है जितना माना जाता है, क्योंकि कनाडा के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि इससे कैंसर से मृत्यु का खतरा नहीं बढ़ता है, बल्कि यह थोड़ी सुरक्षा भी प्रदान कर सकता है। दरअसल, काफी समय से यह धारणा रही है कि एनिमल प्रोटीन यानी मांस, अंडे या मछली का सेवन कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ाता है, लेकिन कनाडाई शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी ने इस सोच को चुनौती दी है। अध्ययन में पाया गया कि एनिमल प्रोटीन से कैंसर से मरने का खतरा नहीं बढ़ता, बल्कि यह हल्की सुरक्षा भी दे सकता है। वहीं, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन को लेकर भी बहुत लाभकारी परिणाम सामने नहीं आए।
रिसर्च में क्या पाया गया?
यह अध्ययन 19 वर्ष से अधिक उम्र के 15,937 वयस्कों पर किया गया। रिसर्च में पाया गया कि पशु या प्लांट-बेस्ड प्रोटीन दोनों में से किसी का भी सामान्य सेवन मृत्यु के जोखिम को नहीं बढ़ाता। कैंसर से मृत्यु के जोखिम की बात करें, तो एनिमल प्रोटीन ने हल्का प्रोटेक्टिव असर दिखाया, जबकि प्लांट प्रोटीन का कोई खास असर नहीं दिखा। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह नतीजे पहले हुए एक अध्ययन से बिल्कुल अलग हैं, जिसमें 50 से 65 वर्ष की आयु के लोगों में पशु प्रोटीन से कैंसर का खतरा चार गुना बढ़ने की बात कही गई थी।
पिछले और अब की रिसर्च में क्या है अंतर
कनाडाई शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले अध्ययन में एक दिन के प्रोटीन सेवन के आधार पर जोखिम का आकलन किया गया था, जबकि इस बार के शोध में लंबे समय की खानपान आदतों को देखा गया। मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टुअर्ट फिलिप्स के मुताबिक, रिसर्च में गोल्ड स्टैंडर्ड मैथड्स का इस्तेमाल किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लंबे समय तक खानपान की आदतें मृत्यु जोखिम को किस तरह प्रभावित करती हैं।
क्या एनिमल प्रोटीन पूरी तरह सेफ
मैक्स हेल्थकेयर की क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट ऋतिका सामद्दार के अनुसार, जापान में लोग मांस को धीमी आंच पर स्ट्यू की तरह पकाते हैं, जो काफी सुरक्षित है, लेकिन अमेरिका में जिस तरह से इसे तला या बार्बेक्यू किया जाता है, वह ज्यादा खतरनाक है। डॉक्टर के मुताबिक, प्रोटीन से ज्यादा मायने रखता है कि उसे किस तरह पकाया जा रहा है। नॉर्मल करी या स्ट्यू (Stew) में पका हुआ मांस उतना हानिकारक नहीं होता जितना कि फ्राइड या बार्बेक्यूड मीट होता है। बहुत ज्यादा तापमान पर पकाने से नाइट्रोसामीन जैसे हानिकारक तत्व बनते हैं, जो कैंसर जनक माने जाते हैं। इसी तरह कुछ प्रिजर्वेटिव्स भी कैंसरजनक यौगिक बना सकते हैं।
प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का काम
सोयाबीन, दालें, बीन्स जैसे स्रोतों से पर्याप्त प्रोटीन प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन इस स्टडी ने बताया कि एनिमल से प्लांट प्रोटीन में शिफ्ट करने का कोई स्पष्ट लाभ नहीं दिखा। हालांकि, रेड मीट के अधिक सेवन नहीं करने पर ध्यान रखने की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ (WHO) की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने इसे कुछ कैंसरों के साथ जोड़कर देखा है। एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि रेड मीट का ज्यादा सेवन हार्ट रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है, जबकि फिश और पोल्ट्री ज्यादा सुरक्षित विकल्प हैं।
वहीं, पंजीकृत आहार विशेषज्ञ केली मैकग्रेन ने वेजिटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन से भरपूर फूड्स बताए हैं, जिनके सेवन से सेहत को कई फायदे मिल सकते हैं।
