आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपने शरीर का तो थोड़ा-बहुत ख्याल रख लेते हैं, लेकिन दिमाग की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। नींद कम करना, नाश्ता छोड़ देना और घंटों बैठे रहना आज आम आदत बन चुकी है। लेकिन AIIMS दिल्ली की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत और मुंबई के वॉकहार्ट हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत मखीजा का कहना है कि ये छोटी-छोटी लगने वाली गलतियां आगे चलकर डिमेंशिया, पार्किंसन और दूसरी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों ने दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए तीन जरूरी बातों पर खास जोर दिया है।

नींद

अक्सर लोग काम, मोबाइल या टीवी के चक्कर में नींद को सबसे पहले कुर्बान कर देते हैं। डॉ. प्रियंका सेहरावत के मुताबिक अगर आप डिमेंशिया और पार्किंसन जैसी बीमारियों से बचना चाहते हैं तो नींद से समझौता करना बंद कर दीजिए। एक स्वस्थ इंसान के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है। डॉ. प्रशांत मखीजा बताते हैं कि नींद सिर्फ शरीर को आराम देने के लिए नहीं होती, बल्कि इसी दौरान दिमाग खुद की मरम्मत करता है। अच्छी नींद में दिमाग से जहरीले तत्व बाहर निकलते हैं, याददाश्त मजबूत होती है और दिमागी कोशिकाएं दोबारा ताकत पाती हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार 7 घंटे से कम सोता है तो इससे दिमाग में सूजन बढ़ सकती है और धीरे-धीरे दिमागी कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप चलाना नींद का सबसे बड़ा दुश्मन है। सोने से कम से कम दो घंटे पहले डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। जल्दी सोना और एक तय समय पर उठना दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद होता है। देर रात तक जागना और फिर कम नींद लेना नर्वस सिस्टम पर दबाव डालता है।

नाश्ता

आजकल कई लोग वजन घटाने या समय की कमी के कारण नाश्ता छोड़ देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि खाली पेट दिन की शुरुआत करना दिमाग के लिए नुकसानदेह हो सकता है। डॉ. मखीजा के अनुसार नाश्ता छोड़ने से सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है, खासकर बच्चों में। सुबह के समय दिमाग को ऊर्जा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। नाश्ता छोड़ने से ब्लड शुगर का स्तर गिर जाता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी होती है। इतना ही नहीं, इससे इम्युनिटी भी कमजोर पड़ती है और शरीर संक्रमण का शिकार जल्दी बनता है।

डॉक्टर कहते हैं कि बच्चों को बिना नाश्ता किए स्कूल नहीं भेजना चाहिए। वहीं, काम पर जाने वाले बड़ों को भी कुछ न कुछ जरूर खाना चाहिए। बहुत भारी न सही, लेकिन हल्का और पौष्टिक नाश्ता जैसे फल, दूध, अंकुरित अनाज या दलिया भी दिमाग को पूरे दिन सक्रिय रखने में मदद करता है।

बैठी रहने की आदत से बढ़ता खतरा

आज का कामकाज ऐसा हो गया है कि लोग घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं। घर के छोटे-मोटे काम को ही लोग अपनी फिजिकल एक्टिविटी मान लेते हैं। लेकिन डॉ. मखीजा के मुताबिक सिर्फ घरेलू काम काफी नहीं हैं। अगर शरीर नहीं हिलेगा तो दिमाग तक खून का प्रवाह भी धीमा हो जाएगा। शारीरिक गतिविधि की कमी से नर्व कनेक्शन कमजोर पड़ते हैं और दिमाग की कार्यक्षमता घटने लगती है। इसका असर याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और एकाग्रता पर पड़ता है। इसलिए रोजाना कम से कम 30 मिनट की तेज चाल से चलना बहुत जरूरी है।

सुबह या शाम की ब्रिस्क वॉक दिल की धड़कन को बढ़ाती है, जिससे दिमाग तक ज्यादा ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं। इससे सोचने की शक्ति तेज होती है और लंबे समय तक दिमाग स्वस्थ रहता है।

इन बातों का रखें ध्यान

डॉ. मखीजा का कहना है कि दिमाग की सेहत के लिए कोई बहुत मुश्किल नियम अपनाने की जरूरत नहीं है। बस रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतें शामिल कर लें। समय पर सोना, भरपूर नींद लेना, सुबह नाश्ता करना और रोज थोड़ा-बहुत व्यायाम करना दिमाग को उम्र भर स्वस्थ रख सकता है।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों की मानें तो आज सही आदतें अपनाने से भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि बढ़ती उम्र में भी आपकी याददाश्त और सोचने की क्षमता बनी रहे, तो आज से ही नींद, नाश्ता और एक्टिव लाइफस्टाइल को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लीजिए।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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