लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतार दिया है। प्रियंका की राजनीति में एंट्री को लेकर काफी समय से कयास लगाए जा रहे थे। कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश में मजबूत बनाने के इरादे से प्रियंका को पूर्वी यूपी की कमान सौंपी गई है। 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य के इस हिस्से में प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए चुनावी लाड़ाई आसान नहीं होगी। पूर्वांचल में प्रियंका गांधी का मुकाबला पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्य नाथ से भी होगा क्योंकि पूर्वी यूपी में वाराणसी और गोरखपुर की लोकसभा सीटें भी आती है। इसके अलावा इस हिस्से की डुमरियागंज, बस्ती, मिर्जापुर, चंदौली, लालगंज जैसी सीटों पर अभी बीजेपी का दबदबा है।
कमजोर संगठन बड़ी चुनौती
अगर इस हिस्से में कांग्रेस पार्टी की बात करें तो यहां संगठन बहुत कमजोर है। जिन सीटों का जिक्र हुआ है वहां पार्टी स्तर पर कांग्रेस के पास न कैडर है ना ही जिला स्तर पर मजबूत नेता। यहां पार्टी को खड़ा करना पहली बड़ी चुनौती होगी फिर बारी आएगी बूथ तक मतदाताओं को लाने की। बता दें कि पूर्वी यूपी में गाजीपुर, डुमरियागंज, प्रतापगढ़, बस्ती, बलरामपुर, फैजाबाद, बहराइच, पडरौना, गोंडा, बांसगांव, इलाहाबाद, चंदौली, जौनपुर, सलेमपुर, आजमगढ़ समेत करीब दो दर्जन से भी अधिक लोकसभा सीटें आती है। इन सीटों में डुमरियागंज और पडरौना में कांग्रेस ने 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज का थी।
क्यों खास है पूर्वांचल? समझें राजनीतिक गणित
बता दें कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 21 जिले आते हैं। जिनमें लोकसभा की 26 और विधानसभा की 130 सीटें आती हैं। यह क्षेत्र भोजपुरी भाषी बेल्ट माना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने पूर्वी यूपी की 26 सीटों में से 23 पर जीत दर्ज की थी। सपा को महज एक सीट पर जीत हासिल हुई थी जबकि कांग्रेस और बसपा का खाता भी नहीं खुल सका था। गौरतलब है कि पूर्वी यूपी में गोरखपुर, जौनपुर, चंदौली, वाराणसी, इलाहाबाद, फूलपुर जैसी कई महत्वपूर्ण सीटें हैं। इनमें से पीएम मोदी की वाराणसी और सीएम योगी की गोरखपुर सीट के साथ फूलपुर सीट भी आती है। बता दें कि फूलपुर से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था।
राजनीतिक नजरिये से देखें तो पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी एक विशेष अहमियत रखता है। यहां से देश को अब तक पांच प्रधानमंत्री मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पूर्वी यूपी के वाराणसी से सांसद हैं। गाजीपुर, डुमरियागंज, प्रतापगढ़, बस्ती, बलरामपुर, फैजाबाद, बहराइच, पडरौना, गोंडा, बांसगांव, इलाहाबाद, चंदौली, जौनपुर, सलेमपुर, आजमगढ़ समेत करीब दो दर्जन से भी अधिक लोकसभा सीटें पूर्वी यूपी मेें आती है।
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक था। उसके बाद विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को कुछ खास फायदा नहीं हुआ। बताया जा रहा इसी के मद्देनजर पार्टी के प्रदर्शन को सुधारने के इरादे से कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी की कमान सौपनें के पीछे हाशिए पर पड़ी कांग्रेस को फिर से मजबूत करना है।

