लोकसभा चुनाव शुरू होने वाले हैं और जल्द ही तारीखों की घोषणा होगी। महाराष्ट्र की राजनीति चर्चा में बनी हुई है और जब महाराष्ट्र की बात होती है तो नागपुर लोकसभा सीट जरूर चर्चा में आती है। नागपुर संघ का भी गढ़ माना जाता है।
RSS का गढ़ है नागपुर
नागपुर में ही आरएसएस का हेडक्वार्टर है। लेकिन हैरानी भरी बात यह है कि नागपुर भले ही संघ का गढ़ है लेकिन यहां पर अभी तक लोकसभा चुनाव में बीजेपी को केवल तीन बार जीत मिली है। पिछले दो लोकसभा चुनावों से भाजपा यहां पर जीत रही है। उसके पहले यहां पर कांग्रेस का राज हुआ करता था। 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर बनवारी लाल पुरोहित नागपुर से जीते थे। उसके बाद लगातार चार चुनाव में बीजेपी की हार हुई और कांग्रेस को जीत मिली।
2014 के चुनाव में बीजेपी ने नागपुर से अपने दिग्गज नेता नितिन गडकरी को मैदान में उतारा और उन्होंने 18 साल का सूखा खत्म किया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी नितिन गडकरी ने यहां से जीत हासिल की। नागपुर लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में नितिन गडकरी ने 2,16,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के नाना पटोले को हराया था। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में नितिन गडकरी ने करीब 2,50,000 के अंतर से जीत दर्ज की थी।
नागपुर का जातीय समीकरण
अगर हम नागपुर संसदीय सीट पर नजर डालें तो इसके अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमे से दो पर कांग्रेस और चार पर बीजेपी का कब्जा है। नागपुर लोकसभा सीट पर करीब 22 लाख मतदाता हैं और यह शहरी सीट है। इस सीट पर एससी और एसटी मतदाता निर्णायक स्थिति में है। नागपुर लोकसभा सीट पर करीब साढ़े 4 लाख एससी वोटर हैं जबकि एसटी वोटर भी 2 लाख के करीब हैं। मुसलमान भी यहां पर करीब 2 लाख हैं। नागपुर सीट पर करीब साढ़े तीन लाख वोटर मराठी हैं जबकि ब्राह्मण वोटर भी करीब 1 लाख है।
कौन होगा उम्मीदवार?
बीजेपी ने अभी तक अपनी उम्मीदवारों की लिस्ट तो जारी नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि 2024 में भी बीजेपी यहां से नितिन गडकरी को उम्मीदवार बनाएगी। इसका बड़ा कारण है कि उन्होंने इस लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी को बड़ी जीत दिलवाई और समीकरण भी उनके पक्ष में बैठते हैं। उनके परिवहन मंत्रालय के कामकाज की तारीफ उनके विरोधी भी करते रहे हैं। ऐसे माना जा रहा है कि नितिन गडकरी को भाजपा यहां से उतार कर जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश करेगी।
