मानस मनोहर
कटहल टिक्का
दानी इलाकों में यह कटहल का मौसम है। कटहल फल भी है और सब्जी भी। कच्चे रूप में इसकी सब्जी बनती है तो पकने के बाद इसे फल के रूप में खाया जाता है। इसमें कई पौष्टिक तत्त्व पाए जाते हैं जैसे, विटामिन ए, सी, थाइमिन, पोटैशियम, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नियासिन और जिंक। इसमें खूब सारा फाइबर भी पाया जाता है। कटहल में कैलोरी नहीं होती, इसलिए यह दिल के रोगियों के लिए उपयोगी माना जाता है। कटहल में मौजूद पोटैशियम दिल की हर समस्या को दूर करता है, क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को कम कर देता है। यह अल्सर और पाचन संबंधी समस्या को भी दूर करता है। कब्ज की समस्या को दूर करने में भी यह बहुत फायदेमंद है। हालांकि मंदाग्नि रोगियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। कटहल की सब्जी और कोफ्ते तो सभी खाते हैं, पर इसका टिक्का बहुत लजीज बनता है। इसे बनाना भी बहुत आसान है। आमतौर पर लोग कटहल के टुकड़ों को उबाल कर मसल लेते हैं और उसमें टमाटर-प्याज-लहसुन और मसाले वगैरह डाल कर आलू टिक्के की तरह इसके टिक्के बना लेते हैं। पर कटहल को उसके मूल स्वरूप में खाने का आनंद ही अलग होता है। कटहल टिक्का बनाने के लिए छोटा और सख्त कटहल लें। कटहल अधिक बड़ा होगा तो उसमें रेशे मोटे होंगे और टिक्का स्वादिष्ट नहीं बनेगा। उसका छिलका उतार कर मोटे-मोटे चौकोर टुकड़ों में काट लें। उसके बीज की परवाह न करें। उन्हें भी साथ में लगा रहने दें। कटहल के बीज भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। उनके ऊपर एक कठोर परत जरूर होती है, पर वह खाते वक्त आसानी से निकल आती है।
कटहल के टुकड़ों को कुकर में एक गिलास पानी और एक चम्मच नमक डाल कर एक सीटी तक उबाल लें। कटहल का पानी निथार लें और टुकड़ों को ठंडा होने दें। अब एक प्लेट में मैदा लें और उसमें एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक चम्मच अमचूर और एक चम्मच नमक मिला लें। इस सूखे मैदे के मिश्रण में कटहल के टुकड़ों को ऐसे लपेटें कि उसकी परत चारों तरफ चढ़ जाए। फिर एक कड़ाही में तेल गरम करें और तेज आंच पर कटहल के टुकड़ों को तल लें। कटहल टिक्का तैयार हैं। इसके अलावा दूसरा तरीका यह है कि निथरे हुए दही में लाल मिर्च पाउडर, नमक, गरम मसाला, अदरक-लहसुन का पेस्ट और एक चम्मच मैदा मिला कर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और उसमें उबले हुए कटहल के टुकड़ों को लपेट कर करीब एक घंटे के लिए छोड़ दें। इन टुकड़ों को टुथपिक में पिरो कर एअर फ्रायर, ग्रिलर या ओवन में कुरकुरा सेंक लें। कटहल टिक्कों को प्याज, शिमला मिर्च और टमाटर के साथ परोसें और ऊपर से नींबू का रस और चाट मसाला डालें। पुदीने की हरी चटनी के साथ खाएं, लाजवाब कटहल टिक्का।
भरवां परवल
दानी इलाकों में यह परवल की पैदावार का भी मौसम है। परवल में लौह तत्त्व भरपूर मात्रा में होता है। फाइवर और मैग्नीशियम, आयोडीन जैसे तत्त्व भी इसमें पाए जाते हैं, इसलिए यह भी अनेक औषधीय गुणों से युक्त सब्जी है। परवल का उपयोग मुख्य रूप से सब्जी के तौर पर होता है, पर इसकी मिठाई भी बहुत स्वादिष्ट बनती है। परवल की सूखी और रसेदार दोनों रूपों में सब्जी लाजवाब बनती है, पर भरवां परवल का मजा ही अलग होता है।

हमारा मानना है कि हरी सब्जियों में जहां तक हो सके प्याज और टमाटर के उपयोग से बचना चाहिए। सब्जियों में मौसमी सब्जियों का ही मेल स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम माना जाता है। इसलिए भरवां परवल बनाने के लिए प्याज-लहसुन-टमाटर की जरूरत नहीं है। इसके लिए कुछ उबले हुए आलू और थोड़े-से पनीर की आवश्यकता होती है। भरवां परवल बनाने के लिए थोड़े बड़े आकार के परवल ले सकते हैं। इनके दोनों सिरों को थोड़ा-थोड़ा काट लें। उन्हें धोकर साफ कर लें और लंबाई में बीच से इस तरह चीरा लगाएं कि परवल का आधा हिस्सा कटे और दूसरे हिस्से तक चाकू की धार न पहुंचने पाए। अब चाकू की नोक से सावधानीपूर्वक परवल का सारा गूदा निकाल कर उसे खोखला बना लें। परवल के गूदे को खरल में कूट या मिक्सर में पीस लें, ताकि इसके बीज पिस जाएं। अब एक कड़ाही में एक चम्मच तेल गरम करें। उसमें जीरे का तड़का दें और उसी में परवल के गूदे को डाल कर भून लें। थोड़ा-सा गरम मसाला मिलाएं। फिर उबले हुए आलू और पनीर को मसल कर उसी में हल्का-सा भून लें। आंच बंद कर दें। इस मिश्रण में हरी मिर्च, अदरक और धनिया पत्ता डाल कर मिला दें। यों आलू और पनीर के बिना भी इसका मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके लिए सूखा धनिया, सौंफ, जीरा, अजवाइन और सरसों दाना को पीस कर उसके गूदे के साथ भून लिया जाता है। दोनों में से जो तरीका पसंद हो, वही अपनाएं। दोनों का स्वाद अलग होता है। मिश्रण ठंडा हो जाए तो चम्मच की मदद से परवल के भीतर दबा-दबा कर मिश्रण भर दें, जैसे भरवां करेले में मसाला भरते हैं।
अब चौड़े पेंदे की कड़ाही में दो-तीन चम्मच सरसों का तेल गरम करें और उसमें परवलों को इस तरह रखें कि भरा हुआ हिस्सा ऊपर रहे। आंच धीमी कर दें और कड़ाही में ढक्कन लगा कर दस से पंद्रह मिनट के लिए पकने दें। ढक्कन खोल कर परवलों को पलटें और दूसरी तरफ से भी पकाएं। परवल की परत सिंक कर सुनहरी हो जाए, तो समझिए वे पक कर तैयार हैं। इसकी खूबी यही है कि इसे कम से कम आंच पर देर तक पकाने से स्वाद अच्छा आता है। इसे दाल-चावल या फिर परांठे के साथ खाएं, लाजवाब स्वाद आएगा।

