उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य का चेहरा बदलने के मकसद से जिस तरह के फैसले लेते दिख रहे हैं, उसमें स्वाभाविक ही लोगों की उम्मीद जगी है कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी बहुत कुछ बदलेगा। लेकिन एक ओर जहां शासकीय कामकाज में सुधार के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, वहीं उसके सामने कुछ ऐसी उलझनें भी खड़ी हो रही हैं, जिनसे तुरंत पार नहीं पाया गया तो सरकार की छवि को नुकसान पहुंचेगा। बीते शनिवार की रात आगरा में फतेहपुर सीकरी और सदर थाने के आसपास जिस तरह का हिंसक माहौल बनाया गया, उससे यही लगता है कि भाजपा की सरकार बनने के बाद कुछ लोग उसे अपने लिए संरक्षण मान रहे हैं और मनमाने तरीके से विवाद और हंगामा फैला रहे हैं। दरअसल, इस घटना में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों के नाम आ रहे हैं और उन्हें आमतौर पर भाजपा के करीब माना जाता है।
गौरतलब है कि आगरा में तेहरा जौताना के पास गुरुवार की रात अल्पसंख्यक समुदाय के दो सब्जी व्यापारियों पर जानलेवा हमला करने के आरोप में विहिप और बजरंग दल के नौ कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। इसी पर कुछ हिंदू संगठनों ने हंगामा शुरू कर दिया और मुकदमा खारिज करने की मांग करने लगे।
हालत यह हो गई कि वरिष्ठ अधिकारियों के पहुंचने और समझाने-बुझाने के बावजूद उपद्रवियों ने थाने में गिरफ्तार अपने साथियों को छुड़ाने के लिए बवाल शुरू कर दिया, दारोगा की पिस्तौल छीन ली और आरोपियों को जबरन हवालात से निकालने की कोशिश की। यही नहीं, विहिप के एक कार्यकर्ता ने सीओ को थप्पड़ जड़ दिया और कुछ लोग एक चौकी प्रभारी को घेर कर मारने-पीटने लगे, उनकी मोटरसाइकिल और केस डायरी को आग के हवाले कर दिया। अच्छा यह है कि पुलिस और प्रशासन ने इस मसले पर सख्त रवैया अख्तियार करते हुए तीस नामजद लोगों के अलावा दो सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। अगर किसी आरोप में अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद इन संगठनों को कोई शिकायत थी तो उन्हें छुड़ाने के लिए कानून का रास्ता चुनने के बजाय वे इस तरह हिंसा पर आमादा क्यों हो गए?
सवाल है कि भाजपा सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति दुरुस्त करने का दावा कर रही है, कई तरह की घोषणाएं की जा रही हैं, उसमें इन संगठनों और लोगों का यह बेलगाम रवैया क्या असर डालेगा? हाल ही में सहारनपुर में आंबेडकर जयंती की शोभा-यात्रा के नाम पर निकाले गए जुलूस के दौरान भी सांप्रदायिक टकराव और उसके बाद कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं की शह पर वहां के एसएसपी के घर पर तोड़फोड़ और हिंसा की घटना सामने आई। फिर मेरठ में कश्मीरी विद्यार्थियों को वापस जाने की धमकी देने वाले पोस्टर लगाए गए। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के पहले तक भाजपा और उसके तमाम सहयोगी संगठनों का सबसे प्रमुख मुद््दा सपा के समर्थकों की मनमानी और राज्य में कानून-व्यवस्था के बदतर हालात ही थे। लेकिन चुनाव के बाद भारी बहुमत से भाजपा की सरकार बनने के बाद अगर कुछ संगठन हिंदुत्व की झंडाबरदारी के दावे के साथ इस तरह बेकाबू होते दिखेंगे, तो उससे किस तरह कानून-व्यवस्था सुधरेगी?

