हाल में बिहार में बीएसएससी की परीक्षा का पर्चा कई जगहों पर पहले ही पहुंच गया, जिसके चलते उस परीक्षा को रद्द करना पड़ा। प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न-पत्रों का लीक होना अब एक सामान्य बात होती जा रही है। रविवार को सेना भर्ती की परीक्षा का पर्चा लीक होने से एक बार फिर यही साबित हुआ है कि कुछ लोगों की मिलीभगत के चलते ऐसी परीक्षाओं के आयोजन सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि रविवार को सेना में भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित थी। लेकिन इसके प्रश्न-पत्र परीक्षा के पहले ही कई जगहों पर प्रतियोगियों के पास पहुंच गए। गनीमत यह रही कि वक्त रहते इसकी सूचना पुलिस तक पहुंच गई। इसके बाद ठाणे पुलिस और अपराध शाखा की कार्रवाई में महाराष्ट्र के कई शहरों में छापेमारी के बाद करीब डेढ़ दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया और साढ़े तीन सौ अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया। जिन लोगों को पकड़ा गया, उसमें एक पूर्व-सैनिक और एक अर्धसैनिक बल का जवान शामिल है।
जब सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की तो एक लॉज में कई अभ्यर्थी लीक प्रश्न-पत्र का हल बनाते पकड़े गए। अभ्यर्थियों को परीक्षा का पर्चा उनके कोचिंग सेंटरों के संचालकों ने दिया था। खुद अपराध शाखा ने इसमें सेना के कुछ लोगों के शामिल होने की आशंका जताई है। शुरुआती जांच में ही ये तथ्य सामने आए कि प्रश्न-पत्र पहले मुहैया कराने के बदले अभ्यर्थियों से कुल करीब दस करोड़ रुपए वसूले गए। अलग-अलग अभ्यर्थियों से एक लाख से चार लाख रुपए तक लेकर उन्हें पर्चा दे दिया गया। जाहिर है, करोड़ों रुपए के इस खेल में कोचिंग सेंटर चलाने वालों के तार सेना की भर्ती परीक्षा के आयोजन के भीतरी तंत्र में शामिल संचालकों से जुड़े होंगे। अमूमन सभी शहरों में अलग-अलग सरकारी महकमों में नौकरी दिलाने के दावे वाले कोचिंग संस्थानों का एक जाल-सा खड़ा हो चुका है। इनमें परीक्षाओं की तैयारी से ज्यादा जोर शायद परीक्षा परिणामों में अपने संस्थान के अभ्यर्थियों के नाम शामिल कराने पर दिया जाता है। इसी सिरे से इनके संचालक भर्ती परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े तंत्र में अपनी पैठ बना कर प्रश्न-पत्र हासिल कर एक ओर अकूत धन कमाते हैं और दूसरी ओर नतीजों में अपने संस्थान के अभ्यर्थियों का होना सुनिश्चित कराते हैं, ताकि इसका लाभ उनके व्यवसाय को मिले।
हैरानी की बात यह है कि कुछ-कुछ समय के बाद प्रश्न-पत्रों के लीक होने के मामलों का खुलासा होता रहता है और हर बार यह कहा जाता है कि समूचे तंत्र को दुरुस्त किया जाएगा। लेकिन हकीकत सब जानते हैं। आज हालत यह है मेडिकल या इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं के पर्चे भी समय से पहले ही लोगों तक पहुंच जाने के माविरोध का तरीका
किसी मसले पर लोगों में मतभेद हो सकता है, पर जिस तरह दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज की घटना पर कुछ लोग अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं, उसे किसी भी रूप में लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता। छात्र संगठनों के वाम और दक्षिण धड़े के बीच हिंसक झड़प के बाद देश भर के विद्यार्थियों में रोष है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों ने अपना विरोध जाहिर करने के लिए जिस तरह हिंसा का रास्ता अपनाया उसकी चौतरफा निंदा हो रही है। इसी क्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने फेसबुक पर परिषद की निंदा की, जिसे लेकर निहायत अश्लील और धमकी भरे संदेश आने लगे। फिर उस छात्रा ने प्रतिक्रिया में कहा कि उसे अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए प्रमाण की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके पिता देश की रक्षा करते हुए मारे गए। इस पर भाजपा के कुछ नेताओं, क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा ने उसका मखौल उड़ाते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि वह छात्रा किन्हीं और के इशारों पर विरोध कर रही है।
