Jammu Kashmir Kishtwar Encounter: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में रविवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में एक जवान शहीद हो गया, जबकि सात अन्य घायल हो गए। सवाल है कि आखिर कश्मीर घाटी और देश के अन्य हिस्सों में आतंकवाद पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? आतंकियों पर लगाम कसने के सरकार के दावों के बीच इस तरह के नापाक मंसूबे कैसे फलीभूत हो पा रहे हैं, इस पर नए सिरे से मंथन की जरूरत है।

यह बात छिपी नहीं है कि भारत में आतंकवाद की जड़ें सीमा पार पाकिस्तान की जमीन में हैं। किश्तवाड़ जिले के सोननार क्षेत्र में जिन आतंकवादियों के साथ सुरक्षाबलों के जवानों की मुठभेड़ हुई, उनके विदेशी मूल के होने और पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की बात कही जा रही है।

सुरक्षाबलों ने इन आतंकियों की धर-पकड़ के लिए क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया था। घाटी में इस तरह के अभियान के दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबरें अक्सर आती रहती हैं। इससे एक बात तो स्पष्ट है कि कश्मीर में सुरक्षाबलों का सूचना तंत्र मजबूत है, लेकिन इस तरह की वारदात में किसी जवान का शहीद हो जाना दुखद और चिंताजनक है। ऐसे में सीमा पार से आतंकी घुसपैठ पर पूरी तरह रोक लगाना सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है।

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केंद्र सरकार की ओर से अक्सर यह दावा किया जाता है कि पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की बदौलत हाल के वर्षों में सीमा पर घुसपैठ की घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लग गया है। अगर यह सच है, तो फिर ज्यादातर वारदात में विदेशी आतंकियों का नाम सामने क्यों आता है? दावों और हकीकत के बीच के इस अंतर को समझने की जरूरत है। यह सवाल भी अहम है कि देश के भीतर सक्रिय आतंकियों के पास हथियार और गोला-बारूद कहां से आ रहा है और उनके वित्त पोषण का स्रोत क्या है!

आतंकी तंत्र के लिए हवाला के जरिए पैसे भेजने की बात जगजाहिर हो चुकी है, लेकिन अब इसमें क्रिप्टो करंसी का नाम भी जुड़ गया है। सुरक्षा एजंसियों ने दावा किया है कि जांच में ‘क्रिप्टो हवाला’ तंत्र का पता चला है, जो जम्मू-कश्मीर में विदेशी धन का अवैध प्रवाह कर रहा है। जाहिर है कि इस तरह के वित्त पोषण से न केवल आतंकियों के लिए हमले का सामान जुटाया जाता है, बल्कि अलगाववादी तत्त्वों को सक्रिय करने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। सुरक्षाबलों के लिए यह एक नई चुनौती है।

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आतंकवाद का बढ़ता खतरा अब वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग से यह खतरा और भी व्यापक एवं भयावह होता जा रहा है। आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत भी शामिल है। हालांकि, हाल के वर्षों में देश के भीतर आतंकी वारदात में संख्या की लिहाज से कमी आई है, लेकिन लक्षित हमलों को और ज्यादा भीषण बनाने के प्रयास बढ़े हैं।

वर्ष 2016 में पठानकोट हमला, 2017 में अमरनाथ यात्रियों पर हमला, वर्ष 2019 में पुलवामा हमला और पिछले वर्ष पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाने की घटना इसका उदाहरण है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सीमा पार से घुसपैठ रोकने के साथ आतंकियों के वित्तपोषण के तंत्र को तोड़ने के लिए व्यापक एवं प्रभावी रणनीति तैयार की जाए।

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