Greater Noida Yuvraj Mehta: हादसे किसी चूक का नतीजा हो सकते हैं, लेकिन यह संभव है कि इसकी पृष्ठभूमि में ऐसी व्यवस्थागत लापरवाहियां हों, जिनकी आमतौर पर अनदेखी कर दी जाती है। उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में शनिवार तड़के घने कोहरे के कारण एक कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई। इस हादसे में सत्ताईस वर्षीय युवक की जान चली गई।
इसे रोजाना होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की तरह देखा जा सकता है, लेकिन हादसे के बाद युवक की मौत से पहले जैसी स्थिति सामने आई, उससे साफ है कि आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने के लिए गठित तंत्र किस दुर्दशा और लापरवाही का शिकार है।
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इससे ज्यादा अफसोसनाक और क्या हो सकता है कि पानी से भरे गड्ढे में अपनी कार के साथ फंसा एक युवक करीब डेढ़ घंटे तक मोबाइल की रोशनी के साथ जान बचा लेने की गुहार लगाता रहा और मौके पर मौजूद राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल तथा दमकल विभाग का दल वहीं खड़ा अपनी लाचारगी का रोना रोता रहे। खबरों के मुताबिक, बचाव दल के पास तैराक और पर्याप्त वैकल्पिक संसाधन नहीं थे।
जाहिर है, युवक की मौत की मुख्य वजह हादसे के बजाय संबंधित महकमों की घोर लापरवाही, बचाव दल की अक्षमता और अपर्याप्त संसाधन थी। यह कल्पना भी तकलीफदेह है कि किसी आपदा या आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के साथ ज्यादा से ज्यादा इंसानी जान को बचाने के लिए गठित दलों की मौजूदगी के बावजूद एक युवक की जान नहीं बचाई जा सकी।
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घटना के बाद ऐसे आरोप भी सामने आए कि कुछ दिन पहले वहां एक ट्रक भी हादसे का शिकार हुआ था। वहां इसी तरह की दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई थी और स्थानीय लोगों ने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने की मांग भी की थी। मगर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी और विभाग को इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई कि वहां मजबूत घेरा और जोखिम के मद्देनजर संकेतक लगवा दिया जाए।
अब सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटाने और घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित करने का आदेश दिया है। किसी मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकारी तंत्र की नींद जरूर खुलती है, लेकिन तब तक किसी निर्दोष की जान जा चुकी होती है।
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