भारत में साइबर धोखाधड़ी नहीं थम पा रही, तो आखिर इसकी वजह क्या है? वर्तमान समय में इस अपराध के इतने स्वरूप हैं कि पीड़ित व्यक्ति ठगों की साजिश को एकबारगी समझ नहीं पाता और वह जीवन भर की कमाई लुटा बैठता है। यही वजह है कि साइबर अपराधी हर वर्ष लोगों को करोड़ों की चपत लगा रहे हैं।

विश्व आर्थिक मंच ने दावोस बैठक से पहले अपनी ‘वार्षिक जोखिम रपट’ में भारत में बढ़ती इसी साइबर असुरक्षा को लेकर आगाह किया है। मंच ने गलत सूचनाओं और भ्रामक जानकारियों के प्रसार पर भी चिंता जताई है। वहीं भारत के मामले में एक अध्ययन ने शीर्ष पांच जोखिमों की पहचान की है, जिनमें साइबर असुरक्षा को विशेष रूप से शामिल किया है।

दरअसल, देश में इस असुरक्षा के लगातार बढ़ते जाने की एक बड़ी वजह यह है कि ठगों ने देश से लेकर विदेश तक अपना जाल बिछा लिया है। इस लिहाज से यह न सिर्फ तकनीकी समस्या है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी है।

चिंता की बात यह है कि हम साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए निगरानी तंत्र आज तक मजबूत नहीं कर पाए हैं। नागरिकों में भी डिजिटल साक्षरता का अभाव दिखता है। एक गंभीर समस्या डिजिटल रूप से बदले गए वीडियो और चित्रों की भी है जो आज नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। इसको लेकर भी विश्व आर्थिक मंच ने चिंता जताई है। ऐसे कई विवादित वीडियो सामने आ चुके हैं। अगर साइबर अपराधियों का हौसला बढ़ा है, तो यह व्यवस्था की खामी है।

हैरत की बात है कि अपराधियों के संजाल तक पहुंचने की तमाम कोशिशों के बावजूद देश में साइबर असुरक्षा लगातार बढ़ती चली गई है। आखिर क्या कारण है कि हम धोखेबाजों के असल ठिकानों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं? भारत में इस असुरक्षा का जोखिम इसलिए भी गहरा है, क्योंकि लोगों के पास सजगता और व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने जैसे सीमित विकल्प ही हैं। दोराय नहीं कि अब सरकार को सख्ती बरतनी होगी। साइबर अपराध के संजाल को तोड़ने का वक्त आ गया है।