बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे लक्षित हमलों के बीच अब पाकिस्तान में एक हिंदू किसान की गोली मार कर हत्या कर देने की घटना ने दुनिया भर में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले कनाडा और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी भारतीय मूल के लोगों विशेषकर हिंदुओं के साथ भेदभाव और नस्ली हमलों की खबरें आती रही हैं।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जिस हिंदू व्यक्ति की हत्या की गई, वह आर्थिक रूप से कमजोर था। इस घटना से वहां हिंदू समुदाय के लोगों में आक्रोश है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के लोगों को जबरन धर्मांतरण और भूमि संबंधी विवादों का अक्सर सामना करना पड़ता है। उन्हें अपनी सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जिसकी कीमत कई बार जान देकर चुकानी पड़ती है।

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पड़ोसी देशों में जिस तरह से अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, वह न केवल सांप्रदायिक उन्माद फैलाने का प्रयास है, बल्कि नागरिकों के जीने के अधिकार का भी उल्लंघन है। मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यक नागरिकों खासकर हिंदुओं की सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों के लिए आवाज उठाना अब जरूरी हो गया है। इस तरह की घटनाओं की निंदा करने और सिर्फ चिंता जताने भर से बात नहीं बनेगी।

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भारत को संबंधित देशों में अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने से लेकर द्विपक्षीय वार्ताओं में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना होगा। यह सच है कि भारत शांतिप्रिय देश है और वह सदियों से दुनिया को समरसता और मैत्री का संदेश देता आया है।मगर अब वक्त यह याद दिलाने का है कि दुनिया के किसी भी कोने में अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा और मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

तमाम देशों की यह जिम्मेदारी है कि वहां के अल्पसंख्यक नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। धर्म और नस्ल के आधार पर नफरत फैलाने और हिंसा को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि मानवाधिकारों की रक्षा की जा सके।

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