उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में शुक्रवार को अदालत के फैसले से यह साफ है कि अगर जांच की दिशा सही हो और आरोपियों के प्रति कोई रियायत नहीं बरती जाए, तो इंसाफ मिलना संभव है। दरअसल, एक रिजार्ट में काम करके अपने परिवार का सहारा बनी अंकिता की हत्या के बाद जांच का सिरा जिस दिशा में जा रहा था, उसमें तब यह लगा था कि आरोपी बच निकलेंगे। करीब तीन साल पहले अंकिता की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

इस हत्याकांड का गंभीर पहलू यह भी था कि एक आरोपी रसूखदार नेता का बेटा था। शायद इसीलिए मामले को दबाने की भी कोशिश की गई। लेकिन अदालत के सजग रुख और जांच की दिशा की वजह से तीन आरोपियों को दोषी साबित किया जा सका और उन्हें कोटद्वार की अदालत ने उम्रकैद की सजा दी।

अंकिता के परिवार को इंसाफ मिला

इससे पहले इस मामले में विशेष जांच दल यानी एसआइटी भी बनाई गई थी। हालांकि तब उस पर भी सवाल उठे थे और लोगों ने सीबीआइ जांच की मांग की थी। अब अदालत के फैसले के बाद अगर इसे अंकिता के परिवार को इंसाफ मिलने और सच की जीत के तौर पर देखा जा रहा है, तो यह स्वाभाविक ही है।

Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा, क्या है यह पूरा मामला?

यह फैसला उन परिवारों के लिए एक उम्मीद और राहत है, जिनकी बेटियां घरों से दूर पढ़ने या नौकरी करने निकलती हैं और अपने सपने साकार करना चाहती हैं। यह दुखद है कि आज जिस विकसित और आधुनिक समाज की बात होती है, वहां आज भी स्त्रियों को कई तरह की चुनौतियों से गुजरना पड़ता है। हमारे समाज में बेटियों के लिए जोखिम का दायरा इतना बड़ा है कि कब धोखा देकर, बहला-फुसला कर या दबाव डाल कर या फिर धमका कर उनको शिकार बनाया जाएगा, इसका उन्हें अनुमान तक नहीं होता।

एक रिजार्ट में काम करने वाली अंकिता की हत्या इसका स्पष्ट उदाहरण है। अपना भविष्य संवारने और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए संघर्ष कर रही युवतियों पर पर घात लगाए पुरुषों के लिए कोटद्वार की अदालत का फैसला स्वागतयोग्य है और एक चेतावनी है कि कानून सबके लिए बराबर है।