Vikas Dubey Encounter: कानपुर के कुख्यात विकास दुबे की मौत के बाद अब यह सवाल उठ रहे हैं कि इस गैंगस्टर को आखिर किसने पकड़वाया? दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस गैंगस्टर पर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। लिहाजा अब इस बात पर माथापच्ची हो रही है कि विकास दुबे को पकड़वाने पर मिलने वाली इनाम की राशि किसे दिया जाएगा?
इससे पहले 9 जुलाई को विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर से पकड़ा गया था। बताया गया था कि महाकाल का दर्शन कर बाहर निकलने के बाद विकास दुबे को पहचान लिया गया था। इसके बाद उज्जैन पुलिस ने विकास दुबे को हिरासत में ले लिया था। बाद में उज्जैन पुलिस ने विकास दुबे को कानपुर पुलिस के हवाले कर दिया था।
शुरू में यह बात सामने आई थी कि मंदिर के गेट के बाहर मौजूद निजी सुरक्षा गार्ड ने सबसे पहले विकास दुबे को पहचाना था। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जाता है कि यहां पूजा कर रहे एक शख्स ने विकास दुबे की पहचान की थी और उसी की सूचना में निजी सुरक्षा गार्ड ने उसे पकड़ा था।
9 जुलाई को पकड़े जाने के बाद यूपी पुलिस की टीम विकास दुबे को कानपुर ला रही थी और रास्ते में उसका एनकाउंटर हो गया था। विकास दुबे के मारे जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि विकास दुबे के सिर पर 5 लाख रुपए की जो इनाम राशि रखी गई थी वो किसे दी जाए?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए यूपी पुलिस ने उज्जैन पुलिस को खत लिखा है। उज्जैन के पुलिस अधीक्षक सपी मनोज कुमार सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि कानपुर एसएसपी का हमें पत्र मिला है। उस पत्र में उन्होंने विकास दुबे पर घोषित इनाम का जिक्र किया है, साथ ही वह जानना चाहते हैं कि इनाम की राशि किसे दिया जाए। साथ ही विकास दुबे को हिरासत में लेने में किस पुलिसकर्मी की भूमिका थी।
पुलिस के मुताबिक 5 लाख रुपये की इनाम राशि किसे मिले इस लेकर एक कमिटी गठित की गई है। कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि इनाम किसे दिया जाए? इस कमिटी में एएसपी रैंक के 3 अधिकारियों को शामिल किया गया है। कमिटी जल्दी ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसमें विकास दुबे को पहली बार किसने देखा, उसे पकड़ा किस ने और यूपी एसटीएफ को सौंपे जाने तक का पूरा ब्यौरा होगा।
इस टीम में एएसपी रूपेश द्विवेदी, अमरेंद्र सिंह और आकाश भूरिया को शामिल किया गया है। यह कमिटी अपनी रिपोर्ट में सभी लोगों की भूमिका के बारे में व्याख्या करेगी। उसके बाद पूरी जानकारी यूपी पुलिस को सौंप दी जाएगी।
