Vikas Dubey Encounter: विकास दुबे के मारे जाने के बाद क्या ‘Gangs Of Chaubepur’ का खात्मा हो गया? विकास दुबे का यह गैंग इतना कुख्यात था कि बड़े-बड़े इस गैंग से खौफ खाते थे। कैसे थे ‘Gangs Of Chaubepur’ के सदस्य और इनके काम करने का तरीका बॉलीवुड की फिल्म gangs of wasseypur की कहानी से कितना मिलता-जुलता था?।

अवैध खनन का था कारोबार: विकास दुबे प्लॉटिंग, खनन, अवैध वसूली का नेटवर्क चला रहा था। कहा जाता है कि उसे लंबे समय से राजनीतिक और पुलिस अफसरों की शह मिली हुई थी। कानपुर जिले के चौबेपुर, बिठूर, बिल्हौर और शिवली में पिछले कुछ सालों से बड़े पैमाने पर खनन हुआ था। कहा जाता है कि यह खनन जिले के दो सत्ताधारी विधायकों के संरक्षण में होता रहा और विकास अवैध खनन के इस पूरे धंधे का सुपरविजन करता रहा।

गैंग में 11 सदस्य हैं: विकास दुबे ने ‘Gangs Of Chaubepur’ बनाया था। मोस्टवांटेड विकास दुबे के नाम पर पुलिस रिकार्ड में डी-124 गैंग भी दर्ज है। इस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके गिरोह में वो 11 शातिर बदमाश शामिल हैं जो उसके इशारे पर जान लेने से नहीं हिचकते भले ही सामने वाला खाकीधारी हो या खादीधारी। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 30 जून 2018 को तत्कालीन एसएसपी अखिलेश कुमार के आदेश पर विकास का गैंग पंजीकृत किया गया था। विकास के अलावा इस गैंग में 11 अन्य सदस्य हैं।

ये है गैंग के सदस्यों की सूची:  कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गैंग के 11 कुख्यात सदस्यों के नाम इस तरह हैं- रामनरेश नागर मनोज, चंद्रजीत, काशीराम, इंद्रजीत, संतोष कुमार यादव, रणवीर सिंह उर्फ बउअन निवासी तकीपुर, लालाराम, अजीत कुमार, सत्यम उर्फ लुट्टन, नाहर सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिंह।

30-40 साल के युवक हैं गैंग के सदस्य: खास बात यह है कि गिरोह के सभी सदस्यों की उम्र 30 से 40 वर्ष के आसपास है। अधिकांश बदमाश पड़ोस के गांव तकीपुर और काशीराम निवादा निवासी हैं। पुलिस के मुताबिक विकास की एक आवाज पर पूरा गिरोह महज पांच से सात मिनट में इकट्ठा हो जाता था और उसके एक इशारे पर किसी का भी काम तमाम हो जाता था।

बता दें कि विकास पर पहला मुकदमा वर्ष 1994 में बिल्हौर थाने में हत्यायुक्त डकैती का दर्ज हुआ था। इसमें कन्नौज के मानीमऊ के तेजापुरवा गांव निवासी किसान सरमन की हत्या हुई थी। जमीन के विवाद में हुई हत्या में विकास मुख्य आरोपित था। इसमें भी गवाह मुकर गए थे।