अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे के अंदर घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की गई है। बुधवार (24 मार्च, 2020) को हुए इस हमले में 4 लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि जिस इलाके में यह हमला किया गया है वो सिख अल्पसंख्यक इलाका है। अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री ने जानकारी दी है कि सिखों के पूजा स्थल के पास पुलिस मौजूद थी लेकिन वहां फायरिंग हुई है।

यहां के सांसद नरेंन्द्र सिंह खालसा ने कहा है कि जब यह फायरिंग हुई उस वक्त वो वहां मौजूद थे और उन्होंने किसी तरह वहां से भाग कर अपनी जान बचाई है। उन्होंने जानकारी दी कि इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो चुकी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि अभी वहां 150 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं।

अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी शख्स या संगठन ने नहीं ली है। अफगानिस्तान के संसद में एक अन्य सिख सांसद अनारकली कौल होनारयार ने कहा है कि ‘उस वक्त गुरुद्वारे में करीब 150 लोग मौजूद थे। कई परिवार गुरुद्वारे में रहते हैं और हमले से पहले सभी प्रार्थना के लिए जमा हुए थे। उन्होंने कहा कि ‘मुझे शक है कि गुरुद्वारे के अंदर कुछ लोग छिपे हुए हैं और उनके फोन बंद हैं।’

हालांकि आपको बता दें कि आईएस से जुड़े कुछ हमलावरों ने काबुल में इसी महीने की शुरुआत में शिया मुसलमानों पर हमला कर दिया था। इस हमले में 32 लोगों की जान चली गई थी। मुस्लिम बाहुल देशों में सिखों पर हमले की खबरें अक्सर आती रहती हैं।

साल 1990 में जब यहां तालिबान का शासन था तब उसने सिखों को पीले रंग की पगड़ी पहनने की सख्त हिदायत दी थी ताकि उनकी पहचान हो सके। अपनी सुरक्षा को देखते हुए हाल के बरसों में बड़ी संख्या में सिखों और हिंदुओं ने भारत सरकार से गुहार लगाई थी कि वो उन्हें यहां आने दें।

इसी साल पाकिस्तान से भी एक ऐसी ही खबर आई थी। यहां ननकाना साहिब में जुटे सिख श्रद्धालुओं पर जमकर पथराव किया गया था। गुरुद्वारे पर हुए पथराव के बाद यहां काफी हंगामा भी हुआ था। बता दें कि इस घटना के बाद पुलिस ने मौके से कई पत्थरबाजों को गिरफ्तार भी किया था और पत्थरबाजी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

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