उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी ‘आप’ ने दिल्ली से बाहर चुनाव लड़ने की अनेक बार कोशिशें की हैं, लेकिन पंजाब के अलावा उसे कहीं भी सफलता नहीं मिली। दिल्ली मॉडल कितना सफल रहा और दूसरी जगहों पर ये कितना सफल रहेगा, यह भी एक बहस का मुद्दा है, क्योंकि एक शहर, वह भी केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पुलिस, जमीन और सरकारी कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े अधिकार सरकार के पास नहीं हैं, वहां का मॉडल एक बड़े पूर्ण राज्य में कैसे चलेगा, यह देखना होगा।
अब तक ‘आप’ को मिली हार के पीछे कई कारण हैं। जैसे नई तरह की राजनीति की बात करने वाली पार्टी का आखिरकार अन्य दलों की तरह ही निकलना। ‘आप’ के पास केजरीवाल के अलावा दूसरा कोई चेहरा नहीं है और यह उनके करिश्मे पर आधारित पार्टी है। अगर वोट बैंक की बात करें तो उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी सपा, बसपा और कांग्रेस वाले साझे वोट बैंक को ही निशाने पर रखेगी, क्योंकि भाजपा का वोट बैंक तो ये दिल्ली में भी नहीं तोड़ पाई थी।
ऐसे में यह भी हो सकता है कि आप ‘वोटकटवा’ बन कर भाजपा को ही फायदा पहुंचाए। बहरहाल, 2020 तो अभी दूर है, मगर उससे पहले ‘आप’ उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों में भी शिरकत करने की बात कह रही है, जिसमें उसकी जमीनी ताकत का सही मूल्यांकन हो जाएगा।
’बृजेश माथुर, बृज विहार, गाजियाबाद, उप्र
कोहरे की चादर
कोहरा को हम अत्यधिक ठंड का संकेत भी समझते हैं। पिछले कई वर्षों में कोहरे में मिश्रित गैसों और धूलकणों की मात्रा में वृद्धि दर्ज की गई है जो सांसों के लिए घातक है। अत्यधिक प्रदूषण के कारण धरातल पर ही ओजोन परत जैसी एक परत सर्दियों में जम जाती है जो हमारी श्वसन प्रणाली के लिए हानिकारक सिद्ध हो रही है। प्रदूषण से न तो गांव अछूते हैं, न कोई विकासशील शहर। यानी सर्दियों में कोहरा होना भी आने वाले वर्षों में और घातक सिद्ध होगा।
’अनुराग माथुर, अमझेरा, धार, मप्र

