अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस बाइपार्टिसन प्रतिबंध विधेयक का समर्थन किया है जिसके तहत रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर अमेरिका कड़े व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है। इनमें भारत भी शामिल है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि बुधवार को ट्रंप से मुलाकात के बाद इस विधेयक को मंजूरी (ग्रीनलाइट) मिल गई है और इसे अगले सप्ताह ही कांग्रेस में पेश किया जा सकता है।
यह विधेयक S.1241 -‘Sanctioning Russia Act of 2025’ है। इसे सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया है। इसका मकसद ना केवल रूस को बल्कि उन देशों को भी निशाना बनाना है जो स्पॉन्सर्स के अनुसार रियायती रूसी तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदकर मॉस्को की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।
ग्राहम ने कहा कि ट्रंप से बुधवार को मुलाकात के बाद इस बिल को ‘ग्रीनलाइट’ मिल गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून अमेरिका को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीद रहे हैं। इनमें भारत, चीन और ब्राज़ील शामिल हैं। उनके अनुसार, इससे यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन द्वारा चलाई जा रही जंग को समर्थन मिल रहा है।
रूस प्रतिबंध विधेयक क्या है?
इस प्रतिबंध विधेयक पर सीनेटर लिंडसे ग्राहम पिछले कई महीनों से रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टी के साथ काम कर रहे हैं। इस बिल में रूस से ऊर्जा और अन्य सामान खरीदने वाले देशों पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इस बिल में चीन, भारत और ब्राज़ील का संभावित लक्ष्य के रूप में इसलिए जिक्र किया गया है क्योंकि ये देश अभी भी रूसी तेल की खरीद जारी रखे हुए हैं।
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विधेयक की धारा 17 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अनिवार्य किया गया है कि वह किसी भी ऐसे देश से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामान और सेवाओं पर कम से कम 500 प्रतिशत का टैरिफ (शुल्क) लगाए जो जानबूझकर रूस से प्राप्त तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम, पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदता है।
विधेयक के अनुसार, “राष्ट्रपति, कानून के किसी भी अन्य प्रावधान के बावजूद, उपधारा (b) में बताए गए किसी भी देश से संयुक्त राज्य अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामान या सेवाओं पर शुल्क की दर को कम से कम 500 प्रतिशत एड वेलोरम (मूल्य आधारित कर) के बराबर तक बढ़ाएंगे।”
ग्राहम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस विधेयक पर जल्द ही “मज़बूत द्विदलीय समर्थन” के साथ मतदान होगा। अब तक सीनेट और हाउस के नेताओं ने इस पर वोटिंग टाल रखी थी। इसका एक कारण यह था कि ट्रंप भारत से आयात होने वाले सामान पर टैरिफ लगाने को व्यापक प्रतिबंधों से ज़्यादा प्राथमिकता दे रहे थे।
नवंबर में एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया था कि अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो ट्रंप इस पर हस्ताक्षर करेंगे। लेकिन वह इसमें ऐसी भाषा चाहते हैं जिससे प्रतिबंधों के लागू करने पर उनका नियंत्रण बना रहे।
ग्राहम ने X (ट्विटर) पर लिखा, “यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को ‘ईंधन’ दे रहे हैं। यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को चीन, भारत और ब्राज़ील जैसे देशों के खिलाफ ज़बरदस्त दबाव बनाने की ताकत देगा ताकि उन्हें सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए प्रेरित किया जा सके। जो यूक्रेन के खिलाफ पुतिन के खूनखराबे को फंड कर रहा है। मुझे जल्द ही, संभवतः अगले ही सप्ताह मज़बूत द्विदलीय वोट की उम्मीद है।”
यूक्रेन में शांति को लेकर जारी है बातचीत
यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन में लगभग चार साल से जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। नवंबर के बाद से शांति वार्ताओं में तेजी आई है। मंगलवार को अमेरिका ने यूक्रेन के सहयोगी देशों के गठबंधन में शामिल होकर सुरक्षा गारंटियों का वादा किया। जिसमें यह प्रतिबद्धता भी शामिल है कि अगर रूस फिर से हमला करता है तो यूक्रेन की रक्षा की जाएगी।
ग्राहम ने X पर लिखा, “यह सही समय पर लिया गया कदम है क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है। जबकि पुतिन केवल बातें कर रहे हैं और निर्दोष लोगों की हत्या जारी है।”
अब तक मॉस्को ने किसी भी तरह के समझौते की इच्छा नहीं दिखाई है। यूक्रेन ने एक अमेरिकी प्रस्ताव में बदलाव की मांग की है जिसमें शुरुआत में रूस की मुख्य मांगें शामिल थीं। लेकिन रूस ने सार्वजनिक रूप से कीव के सहयोगियों द्वारा प्रस्तावित सुरक्षा गारंटियों के साथ किसी शांति समझौते को स्वीकार करने के संकेत नहीं दिए हैं।
ट्रंप ने दी भारत पर टैरिफ बढ़ाए जाने की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ‘उनका रिश्ता बेहद अच्छा है।’ लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस समय मोदी उनसे खुश नहीं है। ट्रंप ने कहा था कि इसकी वजह यह है कि रूस से तेल खरीदने के बाद भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ चुकाने पड़ रहे हैं जिससे भारत असंतुष्ट है।
अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ लगाए हैं। इन टैरिफ का एक हिस्सा भारत द्वारा रूस से तेल की लगातार खरीद से जुड़ा है जिसे वॉशिंगटन बंद करवाना चाहता है।
इन बयानों से एक दिन पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर नई दिल्ली रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान नहीं करती तो अमेरिका भारत पर और अधिक टैरिफ लगा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें “खुश करने की कोशिश की” लेकिन अगर वह अमेरिका की अपेक्षाओं के मुताबिक आगे भी कदम नहीं उठाता,तो टैरिफ और बढ़ सकते हैं।
वहीं भारत का कहना है कि रूस से तेल खरीदने का फैसला राष्ट्रीय हित के आधार पर लिया गया है। भारत का मकसद ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपने नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें किफायती बनाए रखना है। भले ही रूस से तेल आयात में कुछ कमी आई हो लेकिन नई दिल्ली ने साफ किया है कि वह अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए सभी साझेदारों के साथ काम करना जारी रखेगा।
