भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी। पिछले महीने हुई दरों में बढ़ोतरी और 8 साल में उच्चतम महंगाई दर अधिकतम होने के कारण विशेषज्ञों को उम्‍मीद है कि आरबीआई एक बार फिर जून में अपने दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं हाल ही में हुए एक रायटर्स की पोल में भी विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक जून में होने वाले बैठक में दरों में बढ़ोतरी करेगा।

रॉयटर्स के पोल के अनुसार, एक चौथाई से अधिक 53 में से 14 अर्थशास्त्रियों ने आरबीआई से 35 आधार अंकों की वृद्धि को 4.75% करने की उम्मीद की है जबकि 20 ने 40-75 आधार अंकों को बढ़ाने की उम्‍मीद जताई है, जिसमें दस ने 50 आधार अंकों की वृद्धि का अनुमान लगाया।

कब- कब कितना बढ़ेगा दर
रिसर्च फर्म नोमुरा ने ने एक नोट में कहा है कि आरबीआई 5 बीपीएस और 2023 के तीसरी तिमाही में 200 फीसद की बढ़ोतरी कर सकता है। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 4 मई को अनिर्धारित बैठक में बेचमार्क उधार दरों में 40 बीपीएस की बढ़ोतरी की थी। साथ ही कैश रिजर्व रेशियो में 50 बीपीएस की बढ़ोतरी की थी। यह बढ़ोतरी 2020 के बाद से पहली बार की गई थी और अब एक बार फिर बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है।

क्‍या कहती है र‍िसर्च
नोमुरा की रिसर्च कहती है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जून में 35 बीपीएस, अगस्‍त में 50 बीपीए और अप्रैल 2023 में 25 बीपीएस बढ़ाने की उम्‍मीद है। यानी कि 5.75% दिसंबर में रेपो रेट और अप्रैल 2023 तक 6.25% रेपो रेट होने की संभावना है। इसके अलावा 2023 तक कैश रिजर्व रेशियो में भी 100 बीपीएस होने की संभावना है। हेडलाइन खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में वार्षिक आधार पर बढ़कर 7.8% हो गई, जो मई 2014 के बाद से सबसे अधिक है।

दरों में बढ़ोतरी का क्‍या होगा असर
अगर रिजर्व बैंक की ओर से जून में होने वाली बैठक में बढ़ोतरी की जाती है तो बैंक भी अपने दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि लोगों को होम लोन, पर्सनल लोन, ऑटो या फिर किसी तरह के लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी। साथ ही रेपो रेट बढ़ने से कई और सेक्‍टर भी प्रभावित हो सकते हैं। लोगों को अधिक महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। हालाकि रेपो रेट के बढ़ने से बैंक की एफडी दरों में भी सुधार हो सकता है।