पिछले कुछ सालों से भारत में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई बड़े शहरों में प्रदूषण से हो रहे नुकसान के लिए डॉक्टर्स और वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रह चुकीं गीता गोपानाथ (Gita Gopinath) ने भी भारत में खतरनाक स्तर पर हो रहे प्रदूषण पर बड़ी चेतावनी दी है।
गीता गोपीनाथ का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर टैरिफ (शुल्क) की तुलना में प्रदूषण का ज्यादा खतरा है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण चुपचाप भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक के रूप में उभर रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा, ‘भारत में प्रदूषण एक चुनौती है और अर्थव्यवस्था पर इसका असर अभी तक लगाए गए टैरिफ की तुलना में कहीं ज्यादा है।’
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गोपीनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण किस तरह उत्पादकता, हेल्थकेयर कॉस्ट और ओवरऑल आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। उनका कहना है कि यह इसका असर नहीं दिख रहा लेकिन विकास पर इसका असर गंभीर है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ने कहा, “प्रदूषण की वास्तविक लागतें केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं…वे आर्थिक विकास, उत्पादकता और नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ गहराई से जुड़ी हुई हैं।”
प्रदूषण भारत के लिए एक चुनौती
गोपीनाथ ने कहा कि चर्चाओं में अक्सर सिर्फ टैरिफ की बातें होती हैं लेकिन पर्यावरण से जुड़े फैक्टर्स पर बात करना ज्यादा जरूरी है। क्योंकि उनके आर्थिक प्रभाव लंबे वक्त तक और व्यापक रूप से पड़ते हैं। प्रदूषण को भारत की आर्थिक भविष्य की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, “भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था के विस्तार और बुनियादी ढांचे में सुधार के क्षेत्र में प्रगति की है लेकिन प्रदूषण अब भी एक लगातार बनी रहने वाली चुनौती है- खासकर बड़े शहरी केंद्रों में।”
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उन्होंने आगे कहा, “अंतरराष्ट्रीय निवेशक के दृष्टिकोण से देखें तो अगर आप भारत में अपना कारोबार स्थापित करने और यहां रहने के बारे में सोच रहे हैं तो पर्यावरण बेहद मायने रखता है।”
आईएमफ की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री के मुताबिक, 2022 में की गई वर्ल्ड बैंक स्टडी से पता चलता है कि भारत में हर साल पॉल्यूशन से करीब 17 लाख लोगों की मौतें होती हैं। देश में होने वाली कुल मौतों का यह करीब 18 फीसदी है।
गोपीनाथ ने प्रदूषण से निपटने के लिए तत्काल और युद्धस्तर जैसे प्रयासों की जरूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “प्रदूषण से निपटना सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता बनना चाहिए। इसे भारत को एक मिशन की तरह लिया जाना चाहिए।”
इस बीच, बुधवार (21 जनवरी 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान की सरकारों को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा प्रस्तावित लॉन्ग-टर्म उपायों को लागू करने हेतु ठोस कॉन्क्रीट एक्शन पेश करने का निर्देश दिया।
