Budget 2026 Tax Calculator: सरकार ने बजट 2025 में मीडिल क्लास टैक्स पेयर्स के लिए पर्सनल इनकम टैक्स फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव किया। सरकार डिडक्शन वाली सिस्टम से हटकर एक आसान स्ट्रक्चर पर आ गई, जिसका फोकस ज्यादा टेक-होम सैलरी (खास तौर पर नई टैक्स व्यवस्था के तहत) पर था।

सबसे बड़ी राहत बजट 2025 में मिली, जब नई व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये ( (स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 12.75 लाख रुपये) तक की इनकम को प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री कर दिया गया।

रिवाइज्ड स्लैब और ज्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ, इसने सभी इनकम लेवल के सैलरी पाने वाले लोगों के लिए टैक्स का बोझ काफी कम कर दिया। जिसमें सालाना 20 लाख रुपये कमाने वाले भी शामिल हैं।

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बजट 2025 ने सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए कैसे बदला टैक्स के खेल?

BTG Advaya के टैक्स हेड अमित बैद ने जनसत्ता की सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस से कहा, “बजट 2024 और 2025 ने भारत की पर्सनल टैक्स व्यवस्था में एक टर्निंग पॉइंट साबित हुए। मध्यम वर्ग को आखिरकार लगा कि उनकी बात सुनी गई है। बजट 2024 ने टैक्स स्लैब को आसान बनाकर और छूट से होने वाली जटिलता को कम करके इसकी नींव रखी। बजट 2025 ने इस गति को आगे बढ़ाया और स्लैब को और चौड़ा किया और रिबेट की सीमा बढ़ाई, जिससे सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स को हर महीने ठोस राहत मिली।”

उन्होंने आगे कहा कि सबसे बड़ा बदलाव सीधे मासिक सैलरी में दिखा: “वर्षों में पहली बार, टैक्स बचत पे स्लिप में दिखी। सभी व्यक्तियों के लिए 12 लाख रुपये तक की इनकम और सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 12.75 लाख रुपये की इनकम को प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री कर दिया गया है।”

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20 लाख रुपये कमाने वाला असल में कितनी बचत करता है?

हमे इसे समझने के लिए यह देखना होगा कि पुरानी और नई टैक्स व्यवस्थाएं डिडक्शन को कैसे अलग तरह से देखती हैं।

पुरानी टैक्स व्यवस्था

जनसत्ता की सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत, 20 लाख रुपये कमाने वाला सैलरी पाने वाला टैक्सपेयर आमतौर पर कई छूट और डिडक्शन (जैसे HRA, LTA, सेक्शन 80C इन्वेस्टमेंट, NPS योगदान, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, और प्रोफेशनल टैक्स) क्लेम करता है। ये टैक्सेबल इनकम को काफी कम कर देते हैं, लेकिन टैक्स स्लैब और दरें तुलनात्मक रूप से ज्यादा रहती हैं।

नई टैक्स व्यवस्था

नई टैक्स व्यवस्था के तहत, इनमें से ज्यादातर छूट छोड़ दी जाती हैं। हालांकि, इसकी भरपाई इन चीजों ( ज़्यादा बेसिक छूट सीमा, कम स्लैब दरें, 75,000 रुपये का ज़्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन) से की जाती है। संशोधित स्लैब जिसमें 30% की दर सिर्फ़ 24 लाख रुपये से ज़्यादा पर लागू होगी।

पुराना सिस्टम बनाम नया सिस्टम – 20 लाख रुपये कमाने वाले सैलरी पाने वाले व्यक्ति के लिए टैक्स की तुलना (FY 2025–26)

विवरणपुरानी कर व्यवस्थानई कर व्यवस्था
सकल वेतन20,00,000 रुपये20,00,000 रुपये
छूट
एचआरए छूट1,00,000 रुपयेलागू नहीं
एलटीए छूट20,000 रुपयेलागू नहीं
बच्चों की शिक्षा एवं छात्रावास भत्ता9,600 रुपयेलागू नहीं
मानक कटौती50,000 रुपये75,000 रुपये
वृत्ति कर2,400 रुपयेलागू नहीं
वेतन से होने वाली आय18,18,000 रुपये19,25,000 रुपये
कटौतियाँ (अध्याय VI-A)
धारा 80सी1,50,000 रुपयेलागू नहीं
धारा 80CCD(1B) – एनपीएस50,000 रुपयेलागू नहीं
धारा 80डी – स्वास्थ्य बीमा25,000 रुपयेलागू नहीं
शुद्ध कर योग्य आय15,93,000 रुपये19,25,000 रुपये
कुल देय कर (4% उपकर सहित)3,02,016 रुपये1,92,400 रुपये
नई व्यवस्था के तहत कर बचत₹1,09,616 रुपये

जैसा कि तुलना तालिका (ऊपर) में देखा गया है, सभी कटौतियों को छोड़ने के बाद भी, 20 लाख रुपये कमाने वाला सैलरी पाने वाला व्यक्ति नए सिस्टम के तहत काफी कम टैक्स देता है।

नतीजा 20 लाख रुपये की सालाना इनकम वाला टैक्सपेयर FY 2025–26 में नए टैक्स सिस्टम को चुनकर टैक्स में 1,09,616 रुपये बचाता है।

ज्यादा इनकम पर क्यों बेहतर काम करता है नया सिस्टम?

जनसत्ता की सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, इन बचत का मुख्य कारण रीस्ट्रक्चर्ड स्लैब हैं। पहले, सबसे ज्यादा टैक्स दर बहुत कम इनकम लेवल पर लागू होती थी। बजट 2025 ने इस सीमा को 24 लाख रुपये तक बढ़ा दिया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि मध्यम और उच्च-मध्यम इनकम वाले लोगों को अपनी इनकम के बड़े हिस्से पर कम दरों का ज़्यादा फायदा मिले।

अमित बैद के अनुसार, “20 लाख रुपये कमाने वाले सैलरी पाने वाले व्यक्ति को अपनी कटौतियों के आधार पर लगभग 1.1 लाख रुपये या उससे ज़्यादा की बचत होती है। इसका मतलब एक मनोवैज्ञानिक बढ़ावा था ज्यादा टेक-होम सैलरी ने बढ़ती EMI, स्कूल फीस और रोजमर्रा के खर्चों के मुकाबले कुछ राहत दी।”

बजट 2025 में खास तौर पर क्या बदला?

सुदित के पारेख एंड कंपनी LLP में पार्टनर अनीता बस्रूर ने बताया:

  • – नए सिस्टम के तहत टैक्स-फ़्री इनकम की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई।
  • – सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड कटौती मिली।
  • – बेसिक छूट की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई।
  • – सबसे ज्यादा 30% टैक्स दर अब सिर्फ 24 लाख रुपये से ज़्यादा पर लागू होती है, जबकि पहले यह 15 लाख रुपये थी।