भारत में डॉक्टरों की उपलब्धता की स्थिति वियतनाम और अल्जीरिया जैसे देशों से भी बदतर है। देश में इस समय…
भारत में डॉक्टरों की उपलब्धता की स्थिति वियतनाम और अल्जीरिया जैसे देशों से भी बदतर है। देश में इस समय…
‘हमें लाभ हो’ के भाव को त्यागकर धीरे-धीरे हम सोचने लगते हैं कि ‘सिर्फ हमें ही लाभ हो’। जब हम…
सवाल यह है कि हम ईमानदारी से बेईमानी की तरफ कैसे खिंचे चले आते हैं? समाज बेईमानी को एक बड़ी…
एक ईमानदार व्यक्ति को आप बेईमानी करने के लिए कहेंगे तो वह कतई नहीं करेगा। इसी तरह एक बेईमान व्यक्ति…
हम किसी भी सपने को गंभीरता से नहीं लेते हैं। सपने देखते समय हमारी भावनाएं हमारे ऊपर हावी होती हैं…
गैर-दलितों को यह बात समझने की जरूरत है कि उनके दुख-सुख के सच्चे साथी दलित ही हैं। राजनेता अपने स्वार्थों…
पुलिस का काम कानून और व्यवस्था के तंत्र को सुधारना है न कि उसे बिगाड़ना। लेकिन पुलिस के संदिग्ध क्रियाकलापों…
पिछले अनेक वर्षों में जिस तरह से क्योटो प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा़ई गई हैं, उसने भी हालात को और भयावह…
जब भी गांव की बात चलती है, तो एक सुकून भरे, शांत, सहज, सादगीपूर्ण वातावरण का आभास मन में उभर…
अंधाधुंध प्राकृतिक दोहन के फलस्वरूप बीते चालीस सालों में पशु-पक्षियों की संख्या घट कर एक तिहाई रह गई। पेड़-पौधों की…
समस्या यह है कि जल संग्रहण के प्रति आम लोग जागरूक नहीं हैं। लेकिन कुछ जगहों पर स्थानीय लोगों ने…
छोटे-छोटे शहरों में भी शॉपिंग कॉम्पलैक्स का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। वहां महंगे-महंगे उत्पादों के शोरूम खुल रहे…