देखा जाए तो कश्मीर का मसला तालिबान के एजेंडे में पहले कभी नहीं रहा। कश्मीर को लेकर तालिबान की ओर…
देखा गया है कि त्योहारों के बाद संक्रमण की दर कुछ बढ़ी हुई दर्ज होती है। इसलिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय…
का दौर कब खत्म होगा, यह कहा नहीं जा सकता। अफगान लोगों के हित सुनिश्चित करने के नाम पर वहां…
युवा पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक रचनात्मक है। तकनीक ने भी इस मामले में उसे बेहतर और अधिक…
सरकार का दावा है कि टीकों की कोई कमी नहीं है। पर यह सवाल अपनी जगह बना हुआ है कि…
ढाई दशक पहले जब तालिबान ने सत्ता पर कब्जा किया था तब भी उसे पाकिस्तान ने समर्थन दिया था। आज…
दंगों का सैलाब गुजर गया, अब सम्मान पत्र बांटने वाले या अपना अभिनंदन खुद ही करवा लेने वाले सामने आ…
मौजूदा डिजिटल अर्थव्यवस्था में शहरी-ग्रामीण, शिक्षित-गैर शिक्षित और लैंगिक असमानता के संकट को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।…
‘हताशा की लपटें’ (संपादकीय, 18 अगस्त) पढ़ा। ऐसा लगता है कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में कानून संबंधी आदर्श बातें व्यवहार में…
प्रधानमंत्री के संबोधन में सबसे अधिक बल साझेदारी पर रहा। वे बार-बार उल्लेख करते रहे हैं कि हमारे देश में…
अमेरिका भले दावे करता रहा हो कि उसने लाखों अफगान सैनिकों को प्रशिक्षण दे दिया है और तालिबान से निपटने…
आखिर बहरेपन के क्या लक्षण हैँ, हमें इस पर विचार करना चाहिए। कैसे पता लगाया जाए कि हमें कम सुनाई…