Ravish Kumar NDTV: पिछले करीब दो महीने से चले आ रहे किसान आंदोलन के बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने चार सदस्यों की कमिटी का गठन किया है जो दोनों पक्षों से बातचीत कर अपनी अनुशंसा के साथ रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। कोर्ट ने कमिटी से 10 दिनों के भीतर पहली मीटिंग करने को कहा है और दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा है।

इस कमिटी के गठन के बाद सोशल मीडिया में कई तरह की बातें लिखी जाने लगीं। उन्हीं बातों के आधार पर रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिखते हुए अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट कमेटी भंग कर दे या फिर सदस्य इससे अलग हो जाएं। रवीश कुमार ने लिखा कि, ‘सुप्रीम कोर्ट के पास कमेटी के चारों सदस्य के नाम कहां से आए, आम जनता के पास यह जानने का कोई रास्ता नहीं लेकिन कमेटी के सदस्यों का नाम आते ही आम जनता ने तुरंत जान लिया कि कमेटी के चारों सदस्य कृषि कानूनों का समर्थन करते हैं। सरकार की लाइन पर ही बोलते रहे हैं।’

रवीश कुमार का कहना है कि, ‘सिर्फ ऐसे लोगों की बनी कमेटी कृषि कानूनों के बारे में क्या राय देगी अब किसी को संदेह नहीं है। जिस तरह से इनके नाम और पुराने बयान साझा किए जा रहे हैं उससे ये कमेटी वजूद में आने के साथ ही विवादित होती जा रही है। सवाल उठता है कि कोर्ट ने ऐसी कमेटी क्यों बनाई जो सिर्फ सरकार की राय का प्रतिनिधित्व करती हो, दूसरे मतों का नहीं?’

रवीश कुमार के मुताबिक, ‘कोर्ट को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए कि नाम आते ही मीडिया और सोशल मीडिया में जिस तरह से इनके नामों को लेकर चर्चा की आग फैली है उसकी आंच अदालत की साख़ तक भी पहुंचती है।अदालत एक संवेदनशील ईकाई होती है। अदालत से यह चूक ग़ैर इरादतन भी हो सकती है। तभी उससे उम्मीद की जाती है कि वह इस कमेटी को भंग कर दे और नए सदस्यों के ज़रिए संतुलन पैदा करे।’

रवीश कुमार ने आगे कहा कि, ‘अदालत यह कह सकती है जैसा कि कई मौकों पर इस बहस के दौरान कहा भी है कि हम सुप्रीम कोर्ट हैं और धरती की कोई ताकत़ कमेटी बनाने से नहीं रोक सकती है फिर भी अदालत को याद दिलाने की ज़रूरत नही है कि उसके गलियारें में ही यह बात सैंकड़ों मर्तबा कही जा चुकी है कि इंसाफ़ होना ही नहीं चाहिए बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।’

रवीश कुमार ने ये भी लिखा कि, ‘नैतिकता दुर्लभ चीज़ होती है। हर किसी में नहीं होती है। इसलिए अदालत से ही उम्मीद की जानी चाहिए कि वह अपनी बनाई कमेटी को भंग कर दे। नए सिरे से उसका गठन करे। तब भी कमेटी की भूमिका और नतीजे को लेकर सवाल उठते रहेंगे मगर वो सवाल दूसरे होंगे।’

रवीश कुमार का यह फेसबुक पोस्ट वायरल हो रहा है। इसपर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग रवीश कुमार की बातों से सहमति जताते हुए लिख रहे हैं कि इस तरह की कमिटी किसानों के मन में भ्रम पैदा कर रही है। वहीं कुछ यूजर्स रवीश कुमार को ट्रोल भी कर रहे हैं।

ट्रोल करने वाले य़ूजर्स लिख रहे हैं कि पहले रवीश कुमार को मोदी सरकार से दिक्कत थी लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट से भी होने लगी है। ऐसे लोग चुटकी लेते हुए लिख रहे हैं कि रवीश कुमार से पूछकर ही सुप्रीम कोर्ट को कमिटी बनानी चाहिए थी।