प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में बांग्लादेश की यात्रा पर थे। इस दौरान पीएम ने बताया कि उन्होंने भी बांग्लादेश की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश की आजादी के समर्थन में तब मैंने गिरफ्तारी भी दी थी और जेल जाने का अवसर भी आया था। पीएम मोदी के इस बयान पर सोशल मीडिया में खूब बहस छिड़ी थी। तमाम यूजर्स ने पीएम मोदी के इस दावे को झूठ बताते हुए उन्हें जमकर ट्रोल किया।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दावे पर निशाना साधा। रवीश कुमार ने लिखा कि नरेंद्र मोदी इसी तरह से आधा सच आधा झूठ बोलकर लोगों को उलझाते रहते हैं। रवीश कुमार ने अपने फेसबुक अकाउंट से प्रधानमंत्री के पिछले कुछ विवादित और ‘गलत’ बयानों को सामने रखते हुए उनकी निंदा की है।

रवीश कुमार ने लिखा- ‘प्रधानमंत्री इतिहास को लेकर झूठ बोलते रहे हैं। ग़लत भी बोलते रहे हैं। आधा सच और आधा झूठ बोल कर उलझाते भी रहे हैं। अगर झूठ और ग़लत बोलने में उनकी सरकार को भी शामिल कर लें तो ऐसी कई रिपोर्ट आपको मिल जाएँगी जिसमें उनकी ग़लतबयानियों का पर्दाफाश किया गया है। इस रिकॉर्ड की पृष्ठभूमि में बांग्लादेश की आज़ादी के लिए सत्याग्रह और जेल जाने की बात को सोशल मीडिया पर मज़ाक़ उड़ जाना स्वाभाविक था।

प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के बीदर में बोल दिया कि जब भगत सिंह जेल में थे तब उनसे मिलने कांग्रेस का कोई नेता नहीं गया। तुरंत ही तथ्यों से इसे ग़लत साबित किया गया और आज तक प्रधानमंत्री ने उस पर कोई सफाई नहीं दी। गुजरात चुनाव के दौरान मोदी ने कह दिया कि मणिशंकर अय्यर के घर एक बैठक हुई थी जिसमें मनमोहन सिंह, हामिद अंसारी मौजूद थे। इस बैठक में पाकिस्तान के उच्चायुक्त और पूर्व विदेश मंत्री आए थे। मोदी ने बेहद चालाकी से इसे गुजरात चुनाव से जोड़ा और कहा कि पाकिस्तान कांग्रेस की मदद कर रहा है और अहमद पटेल को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है। इस बैठक में पूर्व सेनाध्यक्ष दीपक कपूर भी थे, मोदी ने इसकी भी परवाह नहीं की कि भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख दीपक कपूर पाकिस्तान के साथ मिल कर किसी साजिश में शामिल नहीं हो सकते। दीपक कपूर ने कहा था कि उस मुलाकात में गुजरात चुनाव पर कोई बात नहीं हुई। ख़ैर इस झूठ पर प्रधानमंत्री ने राज्य सभा में माफ़ी मांगी थी।

तक्षशिला बिहार में है। यह गलतबयानी थी। वाजपेयी मेट्रो में सवारी करने वाले पहले भारतीय थे। यह भी ग़लत तथ्य साबित हुआ। कर्नाटक की रैली में मोदी बोल गए कि उन्होंने खातों में सीधे पैसे भेजने की सेवा शुरू की जबकि इसकी शुरुआत 2013 में हो चुकी थी। यूपी के चुनाव प्रचार में मोदी ने कह दिया कि रमज़ान में बिजली तो आती थी दीवाली में भी आनी चाहिए थी। बाद में तथ्यों से पता चला कि यह ग़लत है। कानपुर में रेल दुर्घटना हुई थी तो आई एस आई से जोड़ दिया जिसे यूपी के पुलिस प्रमुख ने खारिज किया था। इसकी रिपोर्ट आ गई है आप खुद सर्च करें। ऐसे अनेक उदाहरण आपको ऑल्ट न्यूज़ से लेकर तमाम मीडिया रिपोर्ट में मिलेंगे। यहां तक कि पंद्रह अगस्त के भाषणों में भी तथ्यों की विसंगतियाँ उजागर की जाती रही हैं।

ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिकॉर्ड है। ऐसे में बांग्लादेश की आज़ादी के समर्थन में सत्याग्रह करने और जेल जाने की बात का मज़ाक़ उड़ना कोई आश्चर्य की बात नहीं है और न ही पत्रकारिता की नाकामी है। पहले भी इसी पत्रकारिता ने उनके झूठ और ग़लतबयानी को पकड़ा है जिस पर कोई जवाब नहीं आया और उन कामों को भी मोदी विरोध के खाँचे में फ़िट कर किनारे कर दिया गया। इस चालाकी को भी समझा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के राजनीति नेतृत्व के नीचे इतिहास का क्या हाल किया गया है और नेहरू के इतिहास को किस तरह कलंकित किया गया है बताने की ज़रूरत नहीं।’

रवीश कुमार का यह फेसबुक पोस्ट खूब वायरल हुआ और लोगों की इसपर ढेरों प्रतिक्रियाएं भी आईं। तमाम यूजर्स ने प्रधानमंत्री की इन बातों को गलत करार देते हुए लिखा कि उन्हें बोलने से पहले काफी सोचना चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने रवीश कुमार को ही ट्रोल किया।