25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन के बीच करीब डेढ़ माह बाद शराब की दुकानें खुली हैं। 4 मई से 17 मई तक जारी लॉकडाउन के तीसरे फेज में सरकार ने तमाम रियायतों के साथ शराब के ठेकों को भी खोलने की मंजूरी दी थी। ठेके खुलने के बाद शराब लेने के लिए लोग सुबह से ही कतारों में लग गए। हाल ये हुआ कि देश के कई हिस्सों में शराब के ठेकों के बाहर करीब 2-2 किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। ठेकों के बाहर लोगों की लंबी कतारों के तमाम वीडियो औऱ तस्वीरें सामने आई हैं।
ठेके के बाहर लोगों की लंबी कतारों पर जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी ने एक ट्वीट किया। अपने इस ट्वीट के लिए सुधीर चौधरी ट्रोल हो रहे हैं। दरअसल हुआ ये कि सुधीर चौधरी ने शराब लेने के लिए लाइनों में लगे लोगों पर हमला बोलते हुए लिखा कि शराब के लिए पैसे हैं लेकिन रेल के भाड़े के लिए नहीं।
शराब के लिए पैसे हैं लेकिन रेल के भाड़े के लिए नहीं। https://t.co/xtrbK0AFlW
— Sudhir Chaudhary (@sudhirchaudhary) May 4, 2020
सुधीर चौधरी ने अपने इस ट्वीट में रेल भाड़ों का जो जिक्र किया उसी को लेकर लोग उनपर भड़क गए। भड़के सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें ट्रोल करने लगे। लोग लिखने लगे कि जो लोग लाइनों में खड़े हैं वो कोई प्रवासी मजदूर नहीं हैं। वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि आप ट्वीट करने से पहले अपनी छोटी सोच को किनारे क्यों नहीं रखते हो।
बहुत से यूजर्स ऐसे भी रहे जो सुधीर चोधरी पर निजी हमला करने लगे। ऐसे यूजर्स ने उनके लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है जिसे यहां पर दर्शाया भी नहीं जा सकता। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी रहे जो सुधीर चौधरी की बात से इत्तेफाक रख रहे हैं।
Mr Bewakoof, these are not stranded migrants… These are residents…
— Trefzsa (@T04795327) May 4, 2020
ओ तिहाडी तुझ जैसे मजदूरी करने वाले है इस लाइन में सब गरीब इंसान तो अब भी पानी के लिए भटक रहा है
— Rofl Gandhi 2.0 (@fixNhiHai) May 4, 2020
Liquor khareedne waale tere vo bhakt viewers hai…
Migrant labourers nhi…
— PANKAJ (@ViewsOfPankaj) May 4, 2020
अबे तिहाड़ी ये जो दारू खरीदने के लिए लाइन में खड़े हैं
वो गरीब फंसे हुए मजदूर हैं ??— Sunny Yadav (@sunnyyadav767) May 4, 2020
सुधीर चौधरी जी, आखिर काबतक इस तरह की प्रतिक्रिया से आप सरकार की नाकामयाबी पर पर्दा डालते रहेंगे। इस विकट परिस्थिति में बेहतर होता कि आप अपनी कलम का इस्तेमाल गरीबों एवं प्रवासी मजदूरों के दर्द को सरकार तक पहुंचाने का प्रयोग करते हैं।@sudhirchaudhary
— Qari Sohaib कारी सोहैब قاری صہیب (@qarisohaibrjd) May 4, 2020
शराब के ठेकेदारों को वोट दिया था या रेल चलाने वाली सरकार को?
— ᏦᏗᏬᏕᏖᏬᏰᏂ ᎷᎥᏕᏂᏒᏗ (@iKaustubhMishra) May 4, 2020
लगता है DNA कर लिया, चल बता इस लाइन में खड़े कितने मज़दूर हैं और कितने स्थानीय आवासी और कितने अपने मालिक के लिए शराब लेने आये हैं ?
मने हद होती है बकलोली की
— AYESHA (@IamAayeshaa) May 4, 2020
अरे चौधरी साहब, ये श्रमिक नहीं है ये नौकरी पेशा वाले लोग है इनकी नौकरी नहीं गयी है ये सड़क पर नहीं अपने बंगले में है, गरीब अहमदाबाद, मुम्बई , दिल्ली से यूपी , बिहार के लिए सड़कों पर रास्ता काट रहा है उनके पास खाने तक के पैसे नहीं टिकट तो दूर की बात है।
— shashi (@shashi_up) May 4, 2020
OMG to ye sub sharaab khareedne rail se safar karke aaye hai???
— पोर्नब सुसुवामी (@15lakh_ke_jumle) May 4, 2020
इनकी मजलूमों, मजदूरों की तुलना नशेड़ियों से कर रहे हो !
इंसानियत है कि नहीं तुम्हारे अंदर !? pic.twitter.com/h3U80PXmGp— Jannat Khan (@jannat09876) May 4, 2020
बता दें कि मीडिया में इस तरह की खबरें हैं कि दूसरे राज्यों में फंसे जिन प्रवासी मजूदरों को उनके गृह राज्य पहुंचाया जा रहा है उनसे ट्रेन में किराया लिया जा रहा है। इसको लेकर देश में राजनीति भी हो रही है।

