बिहार विधानसभा चुनाव में हुए नुकसान की कांग्रेस पार्टी समीक्षा करेगी। पार्टी के र्शीष नेतृत्व की अगुआई में सभी समीकरण और जमीनी स्थिति जानने के लिए 27 नवंबर को एक उच्चस्तरीय बैठक होगी। यह बैठक पार्टी के नए मुख्यालय इंदिरा भवन में बुलाई गई है। बैठक में पार्टी के र्शीष नेतृत्व से लेकर बिहार इकाइ तक के पदाधिकारी शामिल रहेंगे। ज्ञात हो कि इस मामले में एक बैठक पहले भी राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कर चुके हैं।

इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में ज्यादातर सीट सहयोगी दलों के खातें में थी और जिन चुनिंदा सीट पर कांग्रेस पार्टी यह चुनाव लड़ा गया था। वहां भी पार्टी के समीकरण बेहद ही निराशाजनक रहे हैं। कांग्रेस पार्टी केवल छ: ही सीट निकाल पाने में कामयाब हुई थी। इस नुकसान की वजह पार्टी की अंदुरूनी लड़ाई माना जा रहा है। इस चुनाव में हुए नुकसान के बाद बिहार में कांग्रेस पार्टी ने बिहार के सात बड़े चेहरों को छ: साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है।

साल दर साल कमजोर हुई कांग्रेस

बिहार के चुनावी समीकरण बताते है कि कांग्रेस की सबसे मजबूत स्थिति 1952 में थी, उस समय कांग्रेस पार्टी का कुल 239 सीट पर कब्जा था और यहां 41.38 फीसद मत कांग्रेस पार्टी के पास थे। इसके बाद से ही लगातार कांग्रेस का मत फीसद और सीटों का आंकड़ा गिरता ही जा रहा है।

वर्ष 1990 में यह आंकड़ा दो अंकों में आ गया था और कांग्रेस के पास 71 सीट थी। इसके बाद से वर्ष 2000 सीटों का यह आंकड़ा गिरकर केवल 23 सीट रह गया था। इसके बाद से ही सीटों और मतदान फीसद के आंकड़े में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बीते चुनाव 2020 में कांग्रेस पार्टी ने 70 सीट पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस पार्टी ने 2020 के चुनाव में 19 विधानसभा सीट जीत थी।

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पहली बार महागठबंधन में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ उसके सहयोगी दल ही मैदान में थे, जबकि गठबंधन में ऐसी स्थिति नहीं बनी। इस सीट पर पार्टी सहयोगी दलों को समझाने में नाकाम रही। हालांकि इस चुनावी दंगल को कांग्रेस पार्टी ने दोस्ताना फाइट का नाम दिया था लेकिन महागठबंधन के अंदर का यह बवाल शायद कांग्रेस पार्टी अपने मतदाताओं को नहीं समझा पाई।

इसका असर भी इन सीट 11 सीट पर साफ नजर आया है। इन सीट में वैशाली, बिहार शरीफ, बछवाड़ा, राजापाकर, बेलदौर, चैनपुर, कलहगांव, सुलतान गंज, सिकंदरा, नरकटिया और करगहर विधानसभा सीट शामिल थी। इस बार मुस्लिम बहुल इलाकों की अधिक संख्या को ध्यान में रखकर ही कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, लेकिन यह कार्ड भी चल रही पाया है।