पूनम नेगी
टरगाड़ियों की बढ़ोत्तरी के कारण वायु और ध्वनि प्रदूषण बेतहाशा बढ़ा है। हमारे यहां प्रदूषण के मामले में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, कानपुर, लखनऊ और गाजियाबाद अग्रणी हैं। इस समय दिल्ली दुनिया का चौथा प्रदूषित महानगर है। ध्वनि प्रदूषण के मामले में भी दिल्ली आगे है। एक आंकड़े के मुताबिक प्रतिवर्ष वाहनों की संख्या में बीस से तीस प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है। इसके चलते दिल्ली में वाहनों से प्रतिदिन करीब एक हजार पचास टन प्रदूषण पैदा होता है। कमोबेश यही स्थिति देश के अन्य महानगरों की है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सत्तर से पचहत्तर प्रतिशत वायुप्रदूषण वाहनों से होता है। अगर वाहनों से उत्सर्जित होने वाली विषाक्त गैसों की मात्रा इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब हमें सांस लेने के लिए आक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर चलना पड़ेगा। बीते तीन सालों में गहराते प्रदूषण के दुष्परिणामों का आकलन करें तो सड़कों के किनारे लगी फसलों में सत्तर से पचहत्तर प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। इस अवधि में वायु प्रदूषण से पचीस हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वाहनों के इंजन से निकलने वाले धुएं में सीसा होता है। यह कैंसर का कारण बनता है। यह धुआं सांसों के जरिए शरीर में प्रवेश कर आसानी से मस्तिष्क, लीवर, गुर्दे और रक्त में अवशोषित होकर धीरे-धीरे दिमाग की कमजोरी, लकवा और मृत्यु का कारण बनता है। इसका सर्वाधिक प्रभाव बच्चों और किशोरों पर पड़ता है।
प्रदूषण के अलावा दूसरा पहलू है पेट्रोलियम पदार्थों की खपत में भारी वृद्धि। देश के नियोजक भविष्य में पेट्रोलियम पदार्थों में दो से पांच गुना खपत बढ़ने के आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं। कुल पेट्रोल उत्पादन का साठ प्रतिशत से अधिक व्यय इन वाहनों पर होता है। प्रदूषण के महासंकट और पेट्रोलियम पदार्थों के घटते भंडार ने दुनिया के तकनीकी विशेषज्ञों को नया विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। इस क्रम में सबका ध्यान साइकिल के उपयोग की तरफ गया है। आज साइकिल को इक्कीसवीं सदी का वाहन माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि साइकिल सबसे सस्ता, प्रदूषणरहित, सुगमता और सरलतापूर्वक पार्क किया जाने वाला वाहन है। यही नहीं, साइकिल और साइकिल रिक्शे का परिवहन-अर्थशास्त्र में योगदान चौंकाने वाला है। इसमें अगर सवारी ढोने की लागत चालीस पैसे सवारी प्रति किलोमीटर मानी जाए तो इसका योगदान 101.40 अरब रुपए प्रतिवर्ष होता है। इस हिसाब से साइकिल और रिक्शा प्रतिवर्ष 203 अरब रुपए की कमाई करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नब्बे मील से कम नब्बे प्रतिशत यात्रा साइकिल से तय की जाए तो अपने देश में प्रतिवर्ष 9.5 करोड़ बैरल पेट्रोल की बचत हो सकती है। इसके अलावा साइकिल उद्योग पचास हजार परिवारों की आय का साधन जुटाता है। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रति सप्ताह बत्तीस किलोमीटर साइकिल चलाने से दिल की बीमारी होने की संभावना में पचास फीसद की कमी आती है।
साइकिल की दास्तान: इक्कीसवीं सदी के मान्य वाहन के रूप में उभर रही इस साइकिल का इतिहास भी बड़ा रोचक है। साइकिल का आविष्कार स्काटलैंड के लोहार किलपेट्रिक मैकमिलन ने सन् 1630 में किया था। 1890 में साइकिल का पहिया हिंदुस्तान की धरती पर घूमा। उस समय भारी-भरकम साइकिल की कीमत पचासी रुपए थी। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान इसकी कीमत में भारी वृद्धि हुई और यह पांच सौ रुपए में बिकने लगी, पर युद्ध के बाद यह घट कर चौंतीस रुपए हो गई। इसका कारण था भारत में इंग्लैण्ड से निर्मित साइकिलों का आयात होना। जापान से आयातित साइकिलों का मूल्य उस समय सिर्फ चौदह रुपए था। भारत में साइकिल बनाने का पहला कारखाना 1936 में मुंबई में स्थापित हुआ। साइकिल-रिक्शे का आविष्कार अमेरिका के एक पादरी जोनाथन ग्लोबल ने उन्नीसवीं सदी के मध्य में किया और इसे नाम दिया ‘जिन राकीशा’ यानी मनुष्य की शक्ति से चलने वाला वाहन। रिक्शा उसी का परिवर्तित नाम है। परिवहन हेतु रिक्शा का प्रचलन 1930 में भारतवर्ष में हुआ और यह जल्दी ही लोकप्रिय हो गया। आज देश में रिक्शा चालकों की संख्या पचास लाख से ऊपर है। गांवों और कस्बों में तो यह सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई का प्रमुख साधन है। चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली जैसे महानगरों में भी इसका अस्तित्व अभी कायम है। विश्व में साइकिल रिक्शे का प्रयोग बंग्लादेश की राजधानी ढाका में सर्वाधिक होता है। इसकी नई तकनीक विकसित करने के लिए प्रयास जारी हैं। सबसे अधिक साइकिलें बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी एक भारतीय कंपनी के नाम है। 1996 में साइकिल का सालाना उत्पादन मोटर वाहनों के बीस लाख की तुलना में पांच गुना अधिक था। अब भी इनकी संख्या पांच करोड़ से ऊपर आंकी गई है। इसमें से चौहत्तर प्रतिशत साइकिलें ग्रामीण क्षेत्रों में प्रयुक्त की जाती हैं। बीस प्रतिशत साइकिलें शौक और मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं। भारत में दो प्रकार की साइकिलों का उत्पादन होता है। एक तो मजबूत फ्रेम वाली पारंपरिक साइकिलें और दूसरी फैंसी और सुंदर साइकिलें। पहले प्रकार की साइकिलों का उपयोग वाहन और दूसरे तरह की साइकिलों का उपयोग मनोरंजन और खेल के लिए किया जाता है। फैंसी साइकिलों का चलन 1970 के दशक से प्रारंभ हुआ। आज यह बच्चों और नवयुवकों के बीच जबर्दस्त लोकप्रिय है।
बढ़ा साइकिल की ओर रुझान: एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट के सीनियर फेलो डॉ. वाईपी आनंद ने सर्वेक्षण में पाया है कि पर्यावरण हितैषी होने के कारण बीते कुछ सालों में कई देशों में साइकिल चलाने के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। इस दिशा में चीन सबसे आगे है। चीन में करीब सताईस करोड़ साइकिलें हैं। चीन की राजधानी बेजिंग में ही सत्तर लाख साइकिलें हैं। चीन में मोटरकार और साइकिल का अनुपात एक और ढाई सौ का है। शहरी क्षेत्रों में प्रति एक हजार आबादी पर पांच सौ साइकिलें हैं। नगरों में साइकिलों के लिए अलग ट्रैक की व्यवस्था है। जापान और नीदरलैंड जैसे औद्योगिक देशों में भी साइकिल को रेल परिवहन से जोड़ने की व्यवस्था है। जापान में लोग छोटी दूरी साइकिलों से और लंबी दूरी रेलों से तय करते हैं। यहां की पंचानबे प्रतिशत जनसंख्या साइकिल का उपयोग करती है। इस दिनों जापान में पौने सात करोड़ साइकिलें हैं, यानी प्रति एक हजार आबादी पर 434 साइकिलें। इंग्लैण्ड में भी साइकिल के प्रति लोकप्रियता बढ़ रही है। जर्मनी, हंगरी, यूगोस्लाविया, पोलैंड आदि देशों में भी साइकिल के प्रति रुझान बढ़ा है। जर्मनी में साइकिलों को कार की डिक्की में रखने लायक बनाया जाता है, ताकि कभी भी इनका उपयोग किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय साइकिल रेसों के लिए फ्रांस सारे संसार में विख्यात है। फिनलैंड की पचास लाख आबादी में बत्तीस लाख साइकिलें हैं। नीदरलैंड की डेढ़ करोड़ जनसंख्या में दस प्रतिशत लोगों के पास साइकिलें हैं। यहां इनकी संख्या नौ करोड़ अस्सी लाख है, जबकि मोटर वाहनों की संख्या चौवालीस लाख है। नीदरलैंड में साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए साइकिल मास्टर प्लान बनाया गया है। अमेरिका में प्रति एक हजार आबादी में पचहत्तर साइकिलें हैं। इसका अधिकतर उपयोग वहां कालोनी के अंदर या पार्किंग प्लॉट तक किया जाता है। वहां इसे और लोकप्रिय बनाने के लिए एक अधिनियम बनाए जाने का प्रस्ताव है। पर्यावरण के प्रति सजग और संवेदनशील नगर जैसे टोरंटो, बैंकूवर, सीटल आदि में साइकिलों के इस्तेमाल में वृद्धि हो रही है। इटली में साइकिल को काफी सम्मानजनक वाहन माना जाता है। वहां राष्ट्राध्यक्ष से लेकर साधारण जनता तक साइकिलों का उपयोग करते हैं। अमेरिका में पुलिस विभाग के पास सैकड़ों साइकिल दल हैं, जिनसे अपराधी को पकड़ने का काम लिया जाता है। यही नहीं, यहां पांच में से एक व्यक्ति साइकिल पसंद करता है।

