विनोद गुप्ता
ए टीएम (आटोमेटेड टेलर मशीन)आज एक जरूरत बन चुकी है। इसके पीछे भी एक रोचक किस्सा है। बात अब से कोई पचास साल पहले की है। जॉन शेफर्ड बैरन, जो कि एक स्कॉटिया आविष्कारक थे, को नहाते समय ख्याल आया कि वेडिंग मशीन से चॉकलेट बार निकल सकती है तो नकद राशि क्यों नहीं ? उन्होंने एटीएम डिजाइन किया, जिसे लंदन के बारक्लेज बैंक में लगाया गया। उनके एटीएम में रेडियोएक्टिव स्याही से छपी पर्ची डालकर पैसे निकाले जाते थे। उस समय कार्ड तो होते नहीं थे, इसलिए मशीन से रेडियोधर्मी पदार्थ लगे चेक डाले जाते थे। मशीन इसकी पहचान पिन से कर लेती थी। बाद में एटीएम प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए उसमें पासवर्ड की व्यवस्था की गई। अब तो पासवर्ड के तौर पर मशीन आपके यूजर के चेहरे को भी डिटेक्ट करने लगी है।
कुछ जानकारों का कहना है कि लंदन में इस एटीएम के लगने से पहले जापान में ऐसी मशीनें चलन में थीं। जहां तक प्लास्टिक के कार्ड वाले एटीएम का प्रश्न है, 1969 में पहला एटीएम अमेरिका में लगा जिसकी डिजाइन डोनाल्ड वेट्जेट ने बनाई थी। भारत में पहला एटीएम 1987 में मुंबई में एचएसबीसी ने लगाया था। आज तो देश में एटीएम की भरमार है। वर्तमान में देश में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 171 एटीएम हैं। वैसे तो सभी निजी और सरकारी बैंकों ने अपने एटीएम लगा रखे हैं लेकिन सर्वाधिक एटीएम भारतीय स्टेट बैंक के हैं। देश का पहला पोस्टल एटीएम आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में सितंबर 2015 में लगाया गया था। यूनियन बैंक आॅफ इंडिया ने 2007 में सिक्किम में 14300 फुट की ऊंचाई पर एटीएम लगाया था।

