लोग घरों में बंद हैं। न कहीं जाना, न कहीं आना। घर के अंदर लैपटॉप, मोबाइल फोन और टीवी ही मनोरंजन के विकल्प हैं। ऐसे में घर से दफ्तर के काम के बाद भी लोगों का ज्यादातर समय नीली रोशनी यानी मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के बीच ही बीत रहा है। देखा जाए तो लोग दस से भी ज्यादा घंटे स्क्रीन के सामने बैठ कर गुजार रहे हैं, जिसके कारण आंखों में भारीपन, थकान, जलन, लाली और सूखापन की शिकायतें बढ़ रही हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञों की मानें तो ज्यादा से ज्यादा समय मोबाइल या टीवी देखने से आंखों की मांसपेश्यिों पर अधिक दबाव पड़ता है। हम जितना अधिक स्क्रीन देखते हैं, हमारी आंखों की नमी और पलक झपकने की दर उतनी ही कम होती जाती है। इससे आंखों को नुकसान पहुंचता है। हमें अभी कुछ और दिन ऐसे ही बिताने हैं। ऐसे में आंखों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

लैपटॉप की आंखों से उचित दूरी
आमतौर पर दफ्तर में लैपटॉप व कंप्यूटर डेस्क पर कुर्सी से उचित दूरी और उचित ऊंचाई पर रखे होते हैं। वहीं घर से काम कर रहे लोग लैपटॉप को कभी बिस्तर पर तो कभी गोद में रख कर काम करते हैं इससे आंखों की मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है। साथ ही बैठने की गलत मुद्रा से कमर में दर्द की समस्या भी हो सकती है। इसलिए घर से काम करने के दौरान भी लैपटॉप की आंखों से उचित दूरी और उचित ऊंचाई का ध्यान रखें। इससे आंखों पर कम प्रभाव पड़ता है और शारीरिक मुद्रा भी ठीक रहती है।

चश्मा पहनें
अगर आंखों पर चश्मा चढ़ा है तो बिना चश्मे का काम न करें। आगर आप डिजिटल कंटेंट, आॅनलाइन गेम या सोशल मीडिया पर घंटों समय गुजार रहे हैं तो आपको चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए।

नीली रोशनी का बुरा प्रभाव
नेत्र विशेषज्ञों की माने तो टेलीविजन और मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों पर बुरा प्रभाव डालती है। इससे आंखों में जलन, भारीपन और सूखापन (ड्राईनेस) की शिकायत बढ़ जाती है। सूखापन का मतलब आंखों में आंसुओं यानी पानी की कमी से है। कई दिनों तक यह समस्या होने पर सिरदर्द भी हो सकता है। इससे बचने का एकमात्र उपाय है कि स्क्रीन पर थोड़ा कम समय बिताएं। साथ ही बैठे-बैठे आंखों की कसरत करें। इसके लिए दूर रखी किसी चीज को बिना पलक झपकाएं एकटक देखें, ऐसा करने से आंखों की क्षमता में इजाफा भी होता है।

पलकें झपकाएं
सामान्य तौर पर व्यक्ति एक मिनट में करीब बारह से पंद्रह बार पलकें झपकाता है। लेकिन टीवी और मोबाइल देखते समय वह तीन से चार बार ही पलक झपकाता है। पलक नहीं झपकाने के कारण आंखों में बनने वाला तरल पदार्थ आंखों में नहीं फैल पाता है, जिससे कार्निया सूखी यानी ड्राई हो जाती है। कार्निया के ड्राई होने से आंखों में खुजली और जलन होने लगती है। इससे बचने का बेहतर तरीका है कि याद से पलकों को बार-बार झपकाया जाए। टीवी, मोबाइल फोन देखते समय या लैपटॉप पर काम के दौरान सामान्य तौर पर पलकें झपकाने की कोशिश के अलावा हर घंटे के अंतराल पर पलकों को खोलें और बंद करें और कुछ मिनट तक यह क्रिया दुहराएं।

आंखों को दें आराम
कंप्यूटर या लैपटॉप पर दफ्तर के काम को निपटाने के दौरान आंखों को कुछ देर के लिए बंद भी रखें। दोनों हथेलियों से आंखों को ढंक कर रखें। इसे आंखों को काफी आराम मिलता है।

आंखों का व्यायाम
कोरोना संकट के कारण घर से अभी कुछ दिन और काम करना होगा। ऐसे में आंखों की क्षमता बढ़ाने के लिए आंखों का व्यायाम करें। आंखों की पुतलियों को कुछ देर के लिए ऊपर-नीचे और फिर दाएं-बाएं घुमाएं। इसके अलावा कुर्सी पर सीधा बैठकर एक हाथ में पेंसिल लें और पेंसिल को आंखों की सीध में रखें और उसे बिना पलके झपकाते हुए एकटक देखें। पेंसिल को आंखों के पास लाते हुए इस क्रिया को दुहराएं।

पानी के छींटें
कंप्यूटर पर घंटों काम करने से आंखें थक जाती हैं। साथ ही इससे आंखों की रोशनी यानी देखने की क्षमता भी प्रभावित होती है। अगर लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो आंखों पर चश्मा भी चढ़ सकता है। चश्मा से बचने के लिए लैपटॉप, मोबाइल व कंप्यूटर पर काम करते समय कमरे में पर्याप्त रोशनी रखें। दिन में चार से पांच बार आंखों पर पानी के छींटें मारें। ध्यान रहें कि पानी के छींटें इतने तेज भी नहीं होने चाहिए कि आंखों में चोट लग जाए। सुबह में यानी दांतों की सफाई के दौरान भी रोजाना ऐसा करना चाहिए। इससे आंखों की क्षमता स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

क्या न करेंं
’ आंखों को बार-बार न रगड़ें। बिना डॉक्टर के परामर्श के किसी भी तरह के आई-ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।
’ आंखों की किसी भी तरह की समस्या होने पर घरेलु नुस्खों के प्रयोग से बचें। काजल या आई लाइनर की वजह से आंखों में खुजली या अन्य परेशानियां हो तो इनका प्रयोग तत्काल रोकें और डॉक्टर को दिखाएं। ल्ल