मीना
युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने के मकसद से केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया की शुरुआत की है। इससे उत्साहित होकर बहुत सारे युवा अपना कारोबार शुरू करने को प्रेरित हुए हैं। मगर कई ऐसे भी युवा हैं, जिन्होंने कहीं कोई प्रशिक्षण या बैंक से कर्ज लिए बिना अपने हुनर और संचार माध्यमों का सदुपयोग करके बहुत छोटे स्तर से उद्यम शुरू किया और अब वे सफल कारोबारी बनने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। इसी तरह कई ऐसे युवा मिल जाएंगे, जिन्होंने बकायदा किसी विशेष हुनर के लिए पढ़ाई की, पर नौकरी करने के बजाय अपने बल पर उद्यम शुरू करने की ठानी और वे अब सफल हैं। पिया के लिए वाट्एसेप के एक खास समूह को नजअंदाज करना मुश्किल होता है। वजह कि इस समूह को उसकी ननद ने बनाया है, जो आॅनलाइन कपड़ों का कारोबार करती है। इस समूह से पिया के परिवार के सभी लोग जुड़े हैं। पिया कहती है कि जबसे उसकी ननद का यह कारोबार शुरू हुआ है उसे यहां से तो खरीदारी करनी ही है। आखिर मामला ननद का है, जिसे नाराज नहीं किया जा सकता।
फोन और कारोबार में रिश्तों की मिठास भी घुल जाए तो क्या कहने। इन दिनों वाट्सऐप समूहों पर चल रहा आॅनलाइन कपड़ों का बाजार रिश्तों और कारोबार को एक मंच पर ला रहा है। पिया कहती है कि पहले भी रिश्तेदार कारोबार से जुड़े होते थे, लेकिन वे अपनी चीज का परिवार और दोस्तों के बीच प्रचार कम कर पाते थे। अब वाट्सऐप ग्रुप पर यह बहुत आसान होता है। आप अपने उत्पादों की तस्वीरें भेजिए और अपनों से उसे आॅर्डर करने की अपील कीजिए।
बंगलुरू में रहने वाली तूलिका यादव बताती हैं कि वे पिछले एक-डेढ़ साल से घर से ही कपड़े, ज्वेलरी, रेडीमेड गारमेंट्स जैसे सामान आॅनलाइन बेच रही हैं। वे कहती हैं कि यह काम उन्होंने एक वाट्सऐप समूह बना कर शुरू किया था। शुरुआत में उन्होंने अपने जानने वाले लगभग सौ लोगों का एक समूह बनाया और वहां अपना सामान भेजना शुरू किया। इस तरह उनका काम चल पड़ा। और आज उनका माल भारत के कई राज्यों में खरीदा जा रहा है। तूलिका बताती हैं कि वे अपने इस काम से अच्छा खासा मुनाफा कमा रही हैं। अगर आप मुनाफा कमा रही हैं, तो क्या अपने रिश्तेदारों को छूट देती हैं? इस सवाल का जवाब उन्होंने हंसते हुए दिया। कहा नहीं, घरवालों को कोई छूट नहीं। उन्होंने कहा कि उलटे घरवाले झिझक में बारगेनिंग भी नहीं करना चाहते। तूलिका कहती हैं कि यह दोतफरफा मामला भी होता है। चूंकि शुरुआत मेरे अपनों से ही हुई थी और आज वे मेरे ग्राहक भी हैं तो मैं सामान की गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकती।
अभी एमबीए में दाखिले की तैयारी में लगी नैना ने टिफिन सर्विस का आॅनलाइन काम शुरू किया है। इस काम के लिए उन्होंने फेसबुक, गूगल, वाट्सऐप और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल किया। वे कहती हैं कि चूंकि मैं एक छात्रा रही हूं, यह समझती हूं कि जो स्टूडेंट्स दिल्ली के बाहर से आते हैं उन्हें खाने की बहुत समस्या होती है। इसलिए मैंने ‘अपना टिफिन सर्विस’ शुरू किया। जो विद्यार्थी घर का बना खाना खाना चाहते हैं वे यहां से मंगा सकते हैं। और यह काम शुरू किए मुझे कुछ ही महीने हुए हैं। नीलम दिल्ली में रहती हैं। उन्होंने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है। वे कहती हैं कि कोर्स तो मैंने कर लिया था, लेकिन अपने हुनर का इस्तेमाल नहीं कर पा रही थी। फिर मैंने एक एक्सपोर्ट की कंपनी में चौदह साल काम किया और ‘सृजनात्मक संस्था मानुषी’ से जुड़ गई। उसके बाद वहां हमने वेस्ट मटीरियल से कार्ड्स, बैग्स, पेपर बैग्स, ज्वेलरी जैसे सामान बना कर आॅनलाइन प्रचार करना शुरू किया। अब अगर किसी को हमारे उत्पाद पसंद आते हैं तो वह ग्राहक हमें हमारे फेसबुक पेज पर बताता है और हम उसे वह सामान उपलब्ध करवाते हैं।
वाराणसी की रहने वाली आंचल को आॅनलाइन काम करते हुए अभी चार महीने हुए हैं। और इतने कम समय में ही उन्होंने बहुत कुछ कर लिया है। आंचल बताती हैं कि जब उन्होंने आॅनलाइन तोहफे जैसे घड़ी, अंगूठी, कार्ड्स बेचने शुरू किए तब उन्होंने पहले इंस्टाग्राम पर एक पेज बनाया और फिर वाट्सऐप समूह बनाया। इससे उनका काम चल पड़ा। आंचल अभी मीडिया में काम ढूंढ़ रही हैं। लेकिन उन्हें लगा कि जब तक नौकरी नहीं है तब तक आॅनलाइन काम शुरू किया जाए। क्योंकि इससे मेरी आत्मनिर्भरता बनी रहेगी। आंचल बताती हैं कि जब भी उनके दोस्तों का जन्मदिन होता था तो वे दुकान से कार्ड्स खरीद कर लाती थीं और उस पर खुद से डिजाइन बना कर उन्हें तोहफे में देती थीं। फिर दुकानवाले ने उनसे पूछा कि तुम इतने कार्ड्स का करती क्या हो? आंचल ने बताया कि वे दोस्तों को तोहफे में देती हैं। दुकानवाले ने उन्हें सलाह दी कि वे आॅनलाइन काम शुरू करें।
लेकिन आंचल बताती हैं कि उन्होंने दुकानवाले की बात को ज्यादा तरजीह नहीं दी। फिर एक दोस्त ने भी कहा। इसके बाद उन्होंने यह काम शुरू कर दिया। और आज इस काम से वे काफी खुश हैं। दिल्ली में रहने वाली विम्मी खन्ना आज आॅनलाइन काम से लाखों कमा रही हैं। उन्होंने सॉफ्टवेयर ऐप से काम शुरू किया था। और उस ऐप का प्रमोशन करते-करते उनके साथ और भी कई महिलाएं और पुरुष जुड़े, जिससे उन्हें मुनाफा मिला। विम्मी खन्ना घर में बैठे-बैठे ही कई सारे आॅनलाइन कारोबार कर रही हैं। वे ऐप के अलावा उत्पादों को भी आॅनलाइन बेचती हैं। आज जब पढ़ाई-लिखाई करके रोजगार की तलाश में युवाओं को भटकना पड़ता है, ये युवा उद्यमी अपने हुनर और लगन से मिसाल कायम कर रही हैं। संचार माध्यमों का समुचित इस्तेमाल कर घर बैठे अपने उत्पाद को लोगों तक पहुंचा रही हैं। निस्संदेह इनसे दूसरे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।

