मानस मनोहर
भोजन पकाना एक कला है। शास्त्रों में वर्णित कलाओं में पाककला भी शुमार है। यानी भोजन पकाना एक प्रकार की रचना करना है। जैसे चित्र बनाने और कविता रचने में अभ्यास, तल्लीनता और लगातार नए प्रयोग की आवश्यकता होती है, उसी तरह पाककला में भी इनकी अपेक्षा की जाती है। यों भोजन पकाना लगभग सभी को आता है- उसी तरह जैसे आजकल स्कूलों में हर बच्चे को चित्र बनाना सिखाया जाता है और वह रंगों-रेखाओं का बुनियादी व्यवहार सीख जाता है, उसी तरह भोजन पकाने की बुनियादी बातें लगभग हर किसी को पता होती हैं। मगर अच्छा भोजन पकाने वाला उसे माना जाता है, जो निरंतर पाककला में प्रयोग करता और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का ध्यान रखता है, निरंतर जायके में बदलाव को लेकर अध्ययन करता रहता है।
राजमा के गुणों के बारे में पिछले अंक में हमने बातें की। राजमा को पकाने के पारंपरिक तरीके से कुछ अलग हट कर प्रयोग पर भी चर्चा हुई। मगर राजमा जब इतने गुणों से भरपूर है, तो उसे एक ही तरीके से क्यों पकाएं और खाएं। भोजन पकाते समय हमेशा अपने परिवार की रुचियों और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। खासकर बच्चे खाने-पीने के मामले में बड़े नखरीले होते हैं। आजकल बाजार में उपलब्ध डिब्बाबंद और पैकेटों में उपलब्ध खाद्य और पेय पदार्थों ने न सिर्फ उनका जायका खराब कर दिया है, बल्कि उनकी सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। अक्सर बच्चे घर में बने भोजन को देखते ही नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं। उसकी एक वजह यह भी है कि ज्यादातर घरों में खानपान में प्रयोग नहीं किए जाते। पारंपरिक तरीके से भोजन पकाया और परोसा जाता है। अगर उसी में थोड़ा बदलाव किया जाए तो बच्चे आकर्षित होंगे।
यों राजमा लगभग सभी बच्चे पसंद करते हैं, पर रोज उन्हें राजमा-चावल तो नहीं खिलाया जा सकता। इसलिए बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए रेशेदार सब्जियों को राजमा में मिला कर उनकी पसंद के व्यंजन बनाए जाएं तो न सिर्फ वे चाव से खाएंगे, बल्कि उन्हें जरूरी पोषण भी मिलेगा। रेशेदार भोजन न लेने की वजह से बहुत सारे बच्चों में एसिडिटी और कब्जियत की शिकायत रहती है। बाजार की चीजें अधिक खाने से उनमें ईटिंग डिसॉर्डर्स पैदा हो रहे हैं। इसलिए भी उनमें घर का बना भोजन खाने की आदत डालना जरूरी है।
राजमा कटलेट
इसके लिए लाल राजमा का इस्तेमाल करना ठीक होता है। बादामी या चित्रा का स्वाद कुछ मीठा होता है, इसलिए कटलेट के लिए उनका उपयोग ठीक नहीं। राजमा को रात भर भिगोएं। सुबह सात-आठ सीटी तक कुकर में उबाल लें, ताकि वे पूरी तरह मुलायम हो जाएं और आसानी से मसले जा सकें। उसमें थोड़े-से उबले हुए आलू भी मसल लें। इसके बाद कटा हुआ हरा धनिया, अदरक, हरे प्याज के बारीक कटे पत्ते, घिसा हुआ गाजर और शिमला मिर्च मिला कर पिट्ठी तैयार कर लें। हथेलियों पर पानी लगा कर छोटे-छोटे टुकड़ें लें और टिक्की तैयार कर लें। टिक्की के ऊपर मक्के का आटा या ब्रेड क्रम्स लपेट लें। ब्रेड क्रम्स घर में ही तैयार कर सकते हैं। घर में दो-तीन दिन पुरानी हो चुकी ब्रेड को हाथ से मसल कर उसका चूरा बना लें। छन्नी से छान लें। ब्रेड क्रम्स तैयार हैं। कटलेट पर ब्रेड क्रम्स की परत चढ़ा लेने से वह कुरकुरा बनता है। वैसे बिना ब्रेड क्रम्स या मक्के का आटा इस्तेमाल किए भी बनाएं तो कोई हर्ज नहीं।
करीब आधे घंटे के लिए कटलेट्स को फ्रिज में रख दें। जब वे सख्त हो जाएं, तो फ्राइंग पैन में दो चम्मच देसी घी डाल कर धीमी आंच पर कुरकुरा होने तक कटलेट्स को पलट-पलट कर तल लें। देसी घी से परहेज करने की जरूरत नहीं। यह आपके शरीर को न सिर्फ पोषण देता है, बल्कि कई प्रकार के विषैले पदार्थों को भी बाहर निकाल देता है। बच्चों को देसी घी से परहेज कतई न करने दें। कटलेट्स तैयार हो जाएं तो टमाटर की मीठी चटनी या धनिया-पुदीने की चटनी के साथ गरमागरम परोसें। चटनी घर में ही बनाएं तो बेहतर। बाजार में उपलब्ध चटनी में चूंकि प्रिजर्वेटिव्स मिले होते हैं, इसलिए उन्हें स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अनुकूल नहीं माना जाता। इस कटलेट को बच्चों के मुताबिक और आकर्षक बनाना है तो ब्रेड पर मीठी चटनी की परत लगा कर बीच में प्याज-खीरे के चुकड़ों के साथ कटलेट को सैंडविच की तरह दें। वे बड़े चाव से खाएंगे। उन्हें स्कूल के टिफिन में देने के लिए यह अलग और पौष्टिक आहार होगा।
पापड़ कोन में राजमा
बच्चे अक्सर शाम को खेल कर लौटते हैं तो उन्हें जोर की भूख लगी होती है। मगर उस वक्त उन्हें कोई पेट भरने वाला आहार दिया जाए, तो रात को खाने के वक्त भोजन में आनाकानी करते हैं। इसलिए उस वक्त उन्हें ऐसा आहार देना उचित रहता है, जिससे उनकी तात्कालिक भूख भी मिट जाए, पोषण भी मिले और जल्दी पच भी जाए। इसी तरह शाम को मेहमान आएं या खुद छुट्टी वाले दिन चाय पर कुछ खाना हो तो पापड़ कोन में राजमा बनाना मजेदार रहता है। कई जगह टाकोज नाम से राजमा से बना यह व्यंजन अब बाजार में भी बिकने लगा है।
पापड़ कोन में राजमा परोसने के लिए। राजमा को उसी तरह उबालें, जिस तरह दूसरे व्यंजनों के लिए उबालते हैं। उसे ठंडा होने के लिए रख दें। अब पत्ता गोभी, ब्रोकली, प्याज, गूदा निकाला हुआ टमाटर, गाजर, शिमला मिर्च, खीरा के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। एक पैन में हल्का नमक डाल कर पानी उबालें। पानी खौलने लगे तो गैस बंद कर दें और उसमें सारी सब्जियों को डाल दें। दो से तीन मिनट बाद सब्जियों को छान लें और तुरंत ठंडे पानी में उन्हें डाल दें। ठंडे पानी में बर्फ के कुछ टुकड़े डाल लें तो अच्छा रहता है। पांच-सात मिनट बाद सब्जियों का पानी पूरी तरह निथार लें। इस तरह सब्जियों पर लगे रसायन आसानी से निकल जाते हैं और उनका कचकचापन भी बना रहता है। इसे अंगरेजी में ब्लांच करना कहते हैं।
निथरी हुई सब्जियों में उबला हुआ आलू, हरी मिर्च, हरा धनिया, अदरक को बारीक काट कर मिलाएं। उसी में उबले हुए राजमा को भी मिला दें। फिर इसमें इमली की चटनी, चाट मसाला, भुना हुआ जीरा और हल्का काला नमक मिला लें। इन सारी चीजों को ठीक से मिला कर रख लें। अब मूंग दाल के पापड़ लें। तवा गरम करें। तवे पर पापड़ डाल कर दो चम्मचों की मदद से भूनते हुए कोन बना लें। इन कोनों में मिली हुई सब्जियों को भर कर परोसें। यह चटपटा, कुरकुरा और पौष्टिक नाश्ता बच्चों के साथ-साथ हर उम्र के लोगों को पसंद आएगा। हल्का और पौष्टिक, जल्दी पच जाने वाला। अगर चाहें तो पापड़ कोन में भरने के बजाय इन सब्जियों को सीधा सलाद के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पापड़ कोन में भर कर भी सलाद के रूप में खा सकते हैं। इन सब्जियों को रोटी में लपेट कर रोल के रूप में बच्चों को टिफिन में दे सकते हैं

