सोनाक्षी, आपकी फिल्म कलंक बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ रही है। इससे आप कितना खुश हैं?
’ बहुत ज्यादा खुश हूं। सच कहूं, तो मुझे एक हिट फिल्म की सख्त जरूरत थी। ‘कलंक’ के जरिए मेरी वह जरूरत पूरी हो गई। इस फिल्म में हम सभी कलाकारों ने बहुत मेहनत की थी, सो हमारी मेहनत सफल हो गई। ‘कलंक’ की सफलता ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया है।
० कलंक में आपका किरदार आपकी इमेज से काफी अलग हट के है। इसमें आप गंभीर भूमिका में हैं, जबकि आपकी इमेज ग्लैमरस है?
’ एक अदाकारा के तौर पर मैंने कभी अपने आप को एक इमेज में बांधे नहीं रखा। मैंने अगर ‘रावडी राठौर’ जैसी फिल्म की है, तो ‘लुटेरा’ जैसी गंभीर फिल्म भी की है। मेरे लिए कहानी और किरदार बहुत मायने रखते हैं, चाहे वे नॉन ग्लैमरस ही क्यों न हों। कलंक की कहानी में कई सारे अहम किरदार हैं, जिनकी अपनी अलग कहानी है। हर कलाकार के किरदार की अपनी अलग अहमियत है। मेरी भूमिका इसमें एक ऐसी पत्नी की है, जो कैंसर पीड़ित है और मरने से पहले अपने पति की दूसरी शादी करवा कर उसको खुश देखना चाहती है। मैंने इस किरदार को निभाते वक्त काफी एन्जॉय किया। और उस दर्द को भी महससू किया, जो कैंसर पीड़ित मरीज तिल-तिल मर-मर के इस दुख को महसूस करते हैं। भले इस फिल्म में मेरा बहुत लंबा या ग्लैमरस किरदार नहीं था, लेकिन बहुत अच्छा किरदार था, जिसे निभाने में मुझे बहुत मजा आया।
० कहा जाता है कि जब भी किसी फिल्म में दो टक्कर की हीरोइनें होती हैं, तो उनमें टकराव होने शुरू हो जाते हैं। कलंक में आपके साथ आलिया भट्ट भी हैं। क्या आप दोनों के बीच कोई परेशानी आई?
’ मुझे समझ नहीं आता कि ऐसा लोग क्यों बोलते हैं! क्या दो हीरोइनें अच्छी दोस्त नहीं हो सकतीं? मैंने तो इससे पहले भी दो हीरोइनों वाली फिल्मेंं की हैं। ‘हैप्पी भाग जाएगी 2’ में मैंने डायना पेंटी के साथ काम किया था। उसके साथ भी मेरी अच्छी ट्यूनिंग थी। जहां तक आलिया का सवाल है, तो वह ऐसी बिल्कुल नहीं है। उसका स्वभाव तो मस्ती वाला है। वह इन्नोसेंट भी है। हमने सेट पर बहुत एन्जॉय किया। आदित्य, मैं, वरूण और आलिया हम चारों जब भी सेट पर साथ में होते थे और शूटिंग नहीं होती थी, तो हमारी मस्ती चालू हो जाती थी।
० जब भी आप अपने से सीनियर और साथ ही अपनी फेवरेट एक्टर या एक्ट्रेस के साथ काम करती हैं, तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होती है। जैसे कि आपने कलंक में पहली बार माधुरी दीक्षित और संजय दत्त के साथ काम किया है?
’ जब हम अपने से सीनियर एक्टरर्स के साथ काम करते हैं, तो हमें उनसे कुछ न कुछ अच्छा सीखने को ही मिलता है। मैं बचपन से माध्ुारी मैम की फैन रही हूं। उनकी फिल्में देख देख के बड़ी हुई हूं। संजय दत्त को भी मैं बचपन से जानती हूं। हमारा घरेलू रिश्ता है। लिहाजा, संजय दत्त और माधुरी मैम के साथ मेरा काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा। संजू सर तो बहुत शांत हैं और माधुरी हमारी तरह ही मस्तीखोर हैं।
० ‘दबंग’ से लेकर अब तक के करिअर के दौरान आपने अपने लुक्स पर भी काफी मेहनत की है। पहले के मुकाबले अब आप काफी पतली भी हो गई हैं। क्या ऐसा करना आप जरूरी समझती हैं?
’ हां। आज के दौर में हर कोई बेहतर से बेहतर है। खुबसूरती और कलाकारी की कमी नहीं है। छोटा परदा हो या बड़ा, हर जगह अच्छे कलाकारों की भरमार है। ऐसे में अगर हम काम और लुक्स को लेकर सतर्क नहीं रहेंगे, तो हमें कुछ समय बाद ही घर बैठना पड़ेगा।
० ‘दबंग’ से लेकर आज तक के अपने करिअर ग्राफ को देखती हैं, तो कितना संतुष्ट पाती हैं अपने आप को?
’ हर कलाकार के जीवन में अच्छे के साथ-साथ बुरे भी दिन आते हैं। लिहाजा, हमें दोनों के लिए तैयार रहना चाहिए। अच्छे वक्त में ज्यादा आत्मविश्वास से भरपूर नहीं होना चाहिए और बुरे वक्त मे निराश भी नहीं होना चाहिए। एक सच यह भी है कि जब भी ऐसा किसी कलाकार के साथ होता है, तो वह निराश हो जाता है। मेरा भी कुछ ऐसा दौर आया। मेरी कुछ फिल्में खास नहीं चलीं, जिसका बुरा असर मेरे करिअर पर पड़ा, लेकिन उस दौरान निराश होने के बजाय मैंने अपनी बाकी चीजों पर ध्यान देना शुरू किया, यह सोच कर कि जब आपका बुरा वक्त खत्म हो जाएगा तो अपने आप आपको काम मिलने लगेगा। आज काफी समय बाद मेरी फिल्म ‘कलंक’ रिलीज हुई है और हिट भी हो रही है। इसके अलावा मैं ‘दबंग 3’ की शूटिंग में व्यस्त हूं। सो, मैं अब खुश हूं।
० ‘दबंग 3’ के बारे में कुछ बताइए?
’ ‘दबंग 3’ बहुत अच्छी बन रही है। इस फिल्म में एक बार फिर मैं आपको रज्जो पांडे के किरदार में नजर आऊंगी, जो धमाकेदार है। अभी मैं इसके बारे मे इससे जयादा तो नहीं बता पाऊंगी, लेकिन इतना ही कह सकती हूं कि यह भी ‘दबंग’ की तरह ही दर्शकों को पंसद आएगी ।
० आपके माता-पिता दोनों ही इस बार अलग-अलग पार्टी से चुनाव में खड़े हैं। आप किसकी तरफ हैं?
’ मैं तो अपने माता-पिता के साथ हूं। खासकर मेरे पिता जब भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ रहे थे उस वक्त मैंने उनका पूरा सपोर्ट किया था, क्योंकि उस दौरान भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी जी जैसे महान नेता मौजूद थे। पर आज मुझे उनका इस पार्टी में वह सम्मान नजर नहीं आता, जो होना चाहिए। लिहाजा मैंने खुद अपने पापा से भाजपा से अलविदा लेने को कहा। अब मेरे पिता कांग्रेस के साथ हैं। सो, मैं अपने पापा को पूरा सपोर्ट करूंगी।
० क्या भविष्य में आपका राजनीति में जाने का इरादा है?
’ अरे नहीं बाबा। मेरा राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है। क्योंकि यह मेरे वश की बात नहीं है।

