Bhaum Pradosh Vrat 2025: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। वहीं आपको बता दें कि साल में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं। हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है। इस क्रम में हर मास कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एक-एक प्रदोष व्रत पड़ता है और हर एक का विशेष महत्व है। वहीं यहां हम बात करने जा रहे हैं दिसंबर में पड़ने जा रहे भौम प्रदोष व्रत के बारे में, जो 2 दिसंबर को रखा जाएगा। वहीं इस दिन रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…
भौम प्रदोष तिथि 2025
ज्योतिष पंचांग के मुताबिक अगहन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 02 दिसंबर को दोपहर 03:58 मिनट से आरंभ होगी और 03 दिसंबर को दोपहर 12:24 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इसलिए 02 दिसंबर 2025 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त 2025
प्रदोष काल शाम 05:32 बजे से 08:16 बजे तक रहेगा। इस समय भक्तगण भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा- अर्चना कर सकते हैं।
भोलेनाथ के मंत्र
1- ॐ नमः शिवाय
2- ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
3- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||
भगवान शिव की आरती
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
